— एसजीपीसी कर रही है पंथक शख्सियत का इस पद के लिए तलाश
— सिंह साहिब के फैसलों को लेकर एसजीपीसी के कुछ अधिकारी नही है खुशअमृतसर
श्री अकाल तख्त साहिब के स्थाई जत्थेदार की पोस्ट करीब 23 माह से खाली है। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से तख्त दमदमा साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह को श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार के पद का अतिरिक्त कार्यभार देकर एक्टिंग जत्थेदार लगाया गया है। जब 22 अक्टूबर 2018 को श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया था तो उस वक्त एसजीपीसी ने ज्ञानी हरप्रीत सिंह को अकाल तख्त के जत्थेदार के पद का अतिरिक्त कार्यभार सौंप दिया था। उस वक्त एसजीपीसी की ओर से एलान किया गया था कि श्री अकाल तख्त साहिब का स्थाई जत्थेदार जल्दी ही तैनात कर दिया जाएगा। परंतु आज तक एसजीपीसी को कोई भी ऐसा चेहरा श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार के पद के लिए नही मिला जिसे सारा सिख पंथ स्वीकार करने को तैयार हो।
श्री गुरु ग्रंथ साहिब के एसजीपीसी के प्रबंधों से गायब हुए 328 स्वरूपों के मामले में जब से श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने वर्ष 2016 की और मौजूदा कार्यकारिणी कमेटियों को धार्मिक सजा श्री अकाल तख्त साहिब से सुनाई है। तब से एसजीपीसी के नेतृत्व ने श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार के पद के लिए स्थाई जत्थेदार की तलाश तेज कर दी है। संभावना है कि इसी वर्ष नवंबर में होने वाले एसजीपीसी के अध्यक्ष के चुनाव से पहले अकाल तख्त साहिब के नए जत्थेदार की ताजपोशी कर दी जाए।
एसजीपीसी गलियारा से सूत्रों से स्पष्ट हुआ है कि एसजीपीसी के पदाधिकारियों की ओर से कृछ पंथक शख्सियतों से जत्थेदार के पद के लिए संपर्क भी किया गया। परंतु किसी भी सिख व पंथक शख्सियत ने जत्थेदार के पद को लेने के लिए अपनी सहमति नही दी है। हर एक ने यही ही कहा कि इस पद पर बैठ कर एक किसी एक ग्रुप का स्पोक्स पर्सन बन कर सिख के विभिन्न गंभीर मुद्दों पर निष्पक्ष फैलसा नही दे पाएंगे। कुछ ने तो यहा तक कह दिया कि अभी उनके लिए इस पद पर बैठ का सिख कौम की अगुवाई करने का सही वक्त नही आया है। इस पद के लिए राजनीतिक दबाव में काम करने के लिए वह तैयार नही है।
उधर तख्त दमदमा साहिब के जत्थेदार व श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यवाहक जत्थेदार ने भी सिख कौम के अंदर अपने प्रभाव को बढाने के लिए बहुत सारे ऐसे फैसल लिए है जिनको सिख कौम ने तो पसंद किया परंती एसजीपीसी ने पसंद नही किया , कुछ ऐसे फैसले भी लिए गए है जिस को एसजीपीसी नेतृत्व ने पंसद किया परंतु सिख पंथ की बहुसंख्यक संगन ने पसंद नही किया है। ज्ञानी हरप्रीत सिंह आज भी उस दिशा की तरफ बढ कर फैसले लेने लगे है जिस से उनका सिख कौम के अंदर प्रभाव बढे। परंतु एसजीपीसी नेतृत्व का एक हिस्सा ऐसा भी है जो ज्ञानी हरप्रीत सिंह की जगह किसी अन्य को स्थाई जत्थेदार देखना चाहता है। इस के चलते संभावना बढने लगी है कि एसजीपीसी अब जल्दी ही श्री अकाल तख्त साहिब के स्थाई जत्थेदार के संबंध में फैसला ले लेगी।
— पंकज शर्मा
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