बुधवार, 11 नवंबर 2020

विपक्ष के भारी विरोध के बीच एसजीपीसी का 9 अरब 81 करोड 94 लाख 80 हजार और पांच सौ रूपए का बजट सर्व समिति से पास

— पिछले वर्ष के मुकाबले 18.51 प्रतिशत कम रहा इस बार का बजट, बजट पर दिखा कोरोना का प्रभाव

 अमृतसर
भारी हंगामें व विपक्ष के विरोध के बीच शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का वर्ष 2020—21 का  9 अरब 81 करोड 94 लाख 80 हजार और पांच सौ रूपए का बजट सर्व समिति से पास कर दिया गया। जबकि गत वर्ष यह बजट 1205 करोड से अधिक का था। बजट इजलास की अध्यक्षता एसजीपीसी के अध्यक्ष गोबिंद सिंह लोंगोवाल की ओर से की गई जबकि बजट का एजेंडा एसजीपीसी के महासचिव हरजिंदर सिंह धामी की ओर से पेश किया गया। जिस को हाउस के बहुसंख्यक सदस्यों की ओर से जैकारे लगा कर पास कर दिया गया। हर वर्ष बजट में 12 से लेकर 15 प्रतिशत वृद्धि होती रही है। परंतु कोरोना के प्रभाव के चलते इस बार का बजट पिछले वर्ष के बजट के मुकाबले 18.51 प्रतिशत कम रहा। एसजीपीसी हर वर्ष मार्च माह में बजट पास करती थी। पंरतु कोरोना के प्रभाव के कारण यह बजट अक्टूबर में पेश किया गया। इस के चलते एसजीपीसी के खर्च चलाने के लिए एसजीपीसी की कार्यकारिणी कमेटी ने दो बार तीन तीन माह के लिए खर्च चलाने की स्वीकृति दी गई थी।
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विपक्ष ने किया विरोध

बाद दोपहर करीब एक बजे बजट इजलास की शुरूआत के दौरान तख्त केसगढसाहिब के जत्थेदार ज्ञानी रघुबीर सिंह ने अरदास की। हुकमनाम श्री हरिमंदिर साहिब के मुख्य ग्रंथी ज्ञानी जगतार सिंह की ओर से लिया गया। इस दौरान श्री अकाल तख्त साहिब  के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह मौजूद थे। इजलास की कार्रवाई एसजीपीसी के सचिव महिंदर सिंह आहली ने शुरू की तो हाउस में विपक्ष के सदस्यों बाबा गुरमीत सिंह त्रिलोकीवाला, बलविंदर सिंह बैसं, बीबी किरण जोत कौर , सेवा सिंह सेखवा , करनैल सिंह पंजोली और अमरीक सिह शाहपुर की ओर से विरोध प्रगट करना शुरू कर दिया। यह सदस्य मांग कर रहे थे कि एसजीपीसी का प्रधान और कार्यकारिणी कमेटी श्री गुरु ग्रंथ साहिब के गायब स्वरूपों को लेकर स्थिति स्पष्ट करे और दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाए। सारे बाजट कार्यक्रम के दौरान सत्ताधारी और विरोधी पक्ष के सदस्यों किसी न किसी बात को लेकर नोक झोंक होती रही। पहली बार है कि कई वर्षों के बाद इस बार विरक्ष के कुछ लोगों को भी बोलने का समय दिया गया। परंतु बलविंदर सिंह बैस को सत्ताधारी पक्ष के सदस्यों ने अपनी बात पूरी नही करने दी। जिस के चलते उन्होंने भारी विरोध प्रगट करते हुए सत्ताधारी ग्रुप को तानाशाह बताया । कहा कि इसी तानाशाही के चलते ही गायब स्वरूपों की जानकारी नही दी जा रही है।

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किस के लिए कितना बजट

—बजट में जनरल बोर्ड फंड के लिए 57 करोड रखे गए।
—ट्रस्ट फंड के लिए 37 करोड 61 लाख रूपए रखे गए
— शिक्षा के उपर 28 करोड़ 44 लाख रूपए रखे गए
— धर्म प्रचार के लिए 58 करोड रूपए रखे गए
— प्रिंटिंग प्रेसों के लिए 8 करोड 28 लाख रूपए रखे गए
— शिक्षण संस्थानों के लिए 2 अरब 15 करोड रखे गए
— डायरेक्टोरेट आफ एजूकेशन के लिए 87 लाख 80 हजार 500 रूपए रखे गए
— गुरुद्वारा साहिब सेक्शन 85 के लिए 5 अरब 77 करोड रूपए रखे गए
— गुरु सिख खिलाडियों व खेलों के लिए 90 लाख रूपए
— कुदरती आफतों के लिए 96 लाख रूपए रखे गए
— सिकलीगर सिखों और पंजाब के बाहर के गुरुद्वारों , स्कूलों के लिए 5 करोड 30 लाख रूपए
— आथिक रूप में कमजोर लोगों के बच्चो की शिक्षा के लिए 1 करोड 50 लाख
— सिख इतिहास खोज , लिखाई , छपाई के लिए 5 लाख 70 हजार
— मीरी पीरी मेडिकल कालेज शाहबाद मारकंडा , श्री गुरु ग्रंथ साहिब मिशन अंबाला के लिए 14 लाख 20 हजार रूपए

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बाजट में पास किए प्रस्ताव
— जम्मू कश्मीर की सरकारी भाषाओं की सूची में पंजाबी को निकालने के विरोध में प्रस्ताव पास किया गया
— केंद्र सरकार की ओर से पास किए गए कृषि बिलों को किसान विरोध बताया गया और इन को वापिस लेने की मांग की गई। देश के सांसद इस के खिलाफ मैदान में आए।
— पाकिस्तान में सिखों के इतिहासिक गुरुद्वारों के आस्तिव को खत्म करने की निंदा की गई। गुरुद्वारों की जमीनों पर हुए नजायज कब्जे छुडवाए जाएं। भारत सरकार पाकिस्तान के गुरुद्वारों की इमारतों को खत्म करने का मुद्दा पाक सरकार के पास उठाए।
— गुरुद्वारा करतारपुर साहिब का रास्ता दोबारा खोलने के लिए भारत सरकार स्वीकृति दे। जब अन्य धार्मिक स्थान खुले है तो यह रास्त को भी खोला जाए।
— उत्तरांखड, सिक्कम व उडीसा में स्थित सिख धार्मिक स्थानों का प्रबंध एसजीपीसी को सौंपा जाए। गुरुद्वारा ज्ञान गोदडी, हरिद्वार, गुरुद्वारा डांग मार सिक्कम , गुरुद्वारा बावली मंठ, मंगू मठ और पंजाबी मठ उडीसा के प्रबंध और इनके निर्माण के आदि के कार्यों की जिम्मेवारी एसजीपीसी को सौंपी जाए।
—जेल में कई वर्षों से बंद सिख कैदियों को रिहा किया जाए। यूएपीए कानून का गलत हो रहा है उपयोग इस कानून को वापिस लिया जाए
— सोशल मीडिया पर गुरु साहिब, सिख योद्धाओं , गुरबाणी और सिख इतिहास के साथ संबंधित विवादित पोस्टें डालने पर पाबंदी लगाई जाए।
— कोरोना महामारी के दौरान लोगों की सेवा करने वाली सिख संस्थाओं की प्रशंसा की गई
— कानून की धारा 295—ए के तहत दी जाने वाली सजा को उम्र कैद में तबदील करने की मांग की गई। कहा कि इस धारा के तहत सजा बहुत ही कम है। दोषी आसानी से जमानत करवा लेते है।
— एसजीपीसी के पब्लिकेशन विभाग के कर्मचारियों की ओर से अपनी ड्यूटी पूरी जिम्मेवारी से नही निभाई गई। दोषियों को एसजीपीसी ने अपने नियमों के अनुसार कार्रवाई की और सजा दी है। एसजीपीसी स्वरूपों के गायब होने पर खासला पंथ से क्षमा मांगती है। एसजीपीसी 19 मई 2016 में गुरुद्वारा रामसर साहिब में आग लगने की घटना के दौरान प्रभावित हुए स्वरूपों की घटना को मंदभागा समझती है और इस घटना पर असफोस प्रगट करती है।
— एसजीपीसी के सदस्यों के मिलते वार्षिक तीन लाख के कोटे को जो कोरोना के कारण कुछ समय के लिए बंद कर दिया गया था इस इजलास के दौरान उसमें से 2 लाख की स्वीकृदि दी जाती है।
— इजलास के दौरान एसजीपीसी के पूर्व अध्यक्ष अवतार सिंह मक्कड, तख्त दमदमा साहिब के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी जसवंत सिंह , एसजीपीसी के मैंबर कवलइंद्र सिंह ठेकेदार, सज्जन सिंह बज्जूमान , सीकेडी के आनरेसी सचिव व तख्त पटना साहिब बोर्ड के सदस्य सुरिंदर सिंह रूमालियावाला, श्री हजूर साहिब प्रबंधकीय बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष तारा सिंह और सिख ज्यूडिशियल बोर्ड क पूर्व चेयरमैन कश्मीर सिंह पट्टी के देहांत पर शोक प्रस्ताव पारित किया गया।
— पंकज शर्मा

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