शनिवार, 26 सितंबर 2020

कनाडा में प्रकाशित हुए स्वरूपों को लेकर एसजीपीसी करेगी आरोपी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई


— बिना स्वीकृति कनाडा के संस्थान के पास कैसे पहुंचे फाउंट व कैसे हुए प्रकाशन इस की भी लगाया जाएगा पता
 अमृतसर
श्री गुरु ग्रंथ साहिब के कनाडा में प्रकाशित हुए स्वरूपों का मामला भी गभीर होता जा रहा है। श्री अकाल तख्त साहिब के बाद अब एसजीपीसी ने भी मामले में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने का मन बना लिया है। श्री अकाल तख्त साहिब के आदेशों को लागू करवाने के लिए एसजीपीसी के अध्यक्ष गोबिंद सिंह लोंगोवाल की ओर से एसजीपीसी के महासचिव हरजंदर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सब कमेटी कनाडा में प्रकाशित स्वरूपों के मामले में उन लोगों की भी पहचान करेगी जो एसजीपीसी के साथ संबंधित है। चर्चा है कि एसजीपीसी के कुछ अधिकारी भी कनाडा में प्रकाशित हुए स्वरूपों के मामले में किसी न किसी तरह शामिल है। यह भी चर्चा है कि एसजीपीसी के कुछ अधिकारी पिछले कुछ वर्षों में उन लोगों के पास कनाडा मे जा कर रहते रहे है जिन लोगों की ओर से कनाडा में श्री अकाल तख्त साहिब के आदेशों के खिलाफ श्री गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूप प्रकातिश किए थे। इस सारे मामले में एसजीपीसी के उन लोगों की भी पहचान की जा रही है। जो किसी न किसी रूप में कनाडा में श्री गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूप प्रकाशित करने वाले के साथ निकटता रखते है।
श्री अकाल तख्त साहिब पर 24 अगस्त को पांच सिंह साहिबान की बैठक में कनाडा की निजी संस्था सतिनाम रिलीजस सोसाईटी के रिपुदमन सिंह मलिक और बलवंत सिंह पंधेर को आदेश दिए थे कि उनकी ओर से श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से 9 मई 1998 को जारी आदेशों का उल्लंघन करके स्वरूप प्रकाशित किए है। इस लिए इन व्यक्तियों की प्रेस और प्रकाशन के साथ सारी सामग्री को भी वहां के एक गुरूद्वारा में सील करके रखने के आदेश दिए थे। वहीं आरोपियों को एक माह के अंदर श्री अकाल तख्त साहिब पर स्पष्टीकरण भेजे के भी आदेश दिए थे। क्योकि इस संस्थान को एसजीपीसी की ओर से कनाडा में पवित्र स्वरूप प्रकाशित करने की कोई भी इजाजत नही दी थी। इस संस्थान का प्रकाशन संबंधी प्रर्थाना पत्र अभी एसजीपीसी के विचाराधीन था। अब सवल यह पैदा हो गया है कि जब इस संस्थान को एसजीपीसी ने स्वीकृति ही नही दी तो किस तरह इस संस्थान ने स्वपरूप प्रकाशित किए और एसजीपीसी के कौन कौन से अधिकारियों की कथित जुबानी  स्वीकृति से संस्थान ने स्वरूप प्रकाशिक करके संगत को कहा कि उनको एसजीपीसी ने स्वरूप प्रकाशित करने की स्वीकृति दे दी है। इस सारे मामले में एसजीपीसी का कौन सा अधिकारी और कर्मचारी शामिल है। इस की एसजीपीसी के गलियारा में जांच शुरू हो गई है। गलियारा में यह भी चर्चा है कि श्री गुरु ग्रथ साहिब के प्रकाशन का फाउंट एसजीपीसी के किसी भी अधिकारी या कर्मचारी की मर्जी या कथित मिलीभुगत के बिना कनाडा के निजी संस्थान के पास पहुंच नही सकता था। वही कनाडा में प्रकाशित स्वरूपों और गायब हुए स्वरूपों के संबंध में श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार भाई रणजीत सिंह ने कहा कि एसजीपीसी के अधिकारियों की मिली भुगत के बिना यह संभव नही है।ममाले के संबंध में एसजीपीसी के अध्यक्ष गोबिंद सिंह लोगोवाल कहा कहना है कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूपों का मामला अति संजीदा है। इस में किस भी दोषी को बख्शा नही जाएगा चाहे व किसी भी पद पर क्यों न तैनात हो। श्री अकाल तख्त साहिब के आदेशों का हर तरह से सख्ती से पालन होगा।
— पंकज शर्मा

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