दिल्ली अल्पसंख्यक कमिशन के चेयरमैन डा जफ्फुल इस्लाम खान के नेतृत्व में मुसलिम समुदाय का एक प्रतिनिधि मंडल अकाल तख्त साहिब मे जत्थेदार को
अमृतसर
श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने मुसिलम समुदाय की ओर से सीएए व एनसीआर के खिलाफ चलाए जा रहे आंदोलन का समर्थन किया है। ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने यह समर्थन तब किया जब दिल्ली अल्पसंख्यक कमिशन के चेयरमैन डा जफ्फुल इस्लाम खान के नेतृत्व में मुसलिम समुदाय का एक प्रतिनिधि मंडल मिलने के आया। इस प्रतिनिधि मंडल की ओर से ज्ञानी हरप्रीत सिंह को एक ज्ञापन सौंपा गया कि श्री अकाल साहिब की ओर से मुसलिम समुदाय का सीएए व एनसीआर के खिलाफ चलाए जा रहे आंदोलन का समर्थन किया जाए। क्योंकि एनसीआर और सीएए के लागू होने से मुसलिम समुदाय और अल्पसंख्यकों में भारी डर व सहम का महौल पाया जा रहा है। इस प्रतिनिधि मंडल ने सिख मसुदाय का भी उस बात पर धन्यावाद किया जिस में सिख समुदाय को सीएए के अधीन लाने व उनकी भारतीय नागरिकता की रक्षा का पक्ष किया है।
ज्ञानी हरप्रीत सिंह को ज्ञापन सौंपने के बाद डा जफ्फुल इस्लाम ने कहा कि सीएए और एनसीआर के लागू होने से अल्पसंख्यक बुरी तरह डरे हुए है। इस लिए उनकी ओर से अलग अलग धर्मों के प्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपे जा रहे है कि सरकार के उपर दबाव बनाया जाए कि सीएए और एनसीआर को भारत में लागू न किया जाए। देश के अंदर एक की धर्म की विचारधारा को लागू करने की कोशिशें हो रही है वहीं देश को हिन्दू राष्ट्र में तबदील करने की कोशिशें हो रही है। उन्होंने कहा कि देश के अंदर अगर सीएए व एनसीआर लागू होता है तो मुसमिलम समुदाय का भारत में रहना मुश्किल हो जाएगा।
मुसलिम समुदाय के प्रतिनिधियों का प्रतिनिधि मिलने संबंधी ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहाकि भारत में अलग अलग धर्मों के लोग रहते है। सीएए व एनसीआर को लेकर मुसलिम समुदाय में काफी डर है। इस मुद्दे पर सिख कौम मुसलिम समुदाय के साथ है। सिख कौम मुद्दे को लेकर जो आंदोलन कर रही है उसका हम समर्थन करते है। देश में अगल अलग धर्मों और अल्पसंख्यकों के जान माल की रक्षा करना सरकारों की जिम्मेवारी है। इस मुद्दे को लेकर अलग अलग मुसलिम संगठन पहले भी श्री अकाल तख्त साहिब से मदद के अपील कर चुके है। जिस को मुख्य रखते हुए सिख कौम मुसलिम समुदाय के साथ है। देश के अंदर किसी भी अल्पंसख्यक के अंदर डर व दहशत नहीं होनी चाहिए।
उल्लेखनीय है कि इस से पहले अकाली दल बादल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल भी सीएए में मुसलिम समुदाय को शामिल करने की मांग कर चुके है। वहीं पूर्व मुख्य मंत्री प्रकाश सिंह बादल भी केंद्र सरकार को सलाह दे चुके है कि देश को एक धर्म का एजेंडा लागू नही होना चाहिए बल्कि एक सेकुलर सरकार का एजेंडा लागू होना चाहिए क्योंकि देश के अलग अगल धर्मों के लोग आपस में मिल कर रहते है। वहीं पंजाब विधान सभा में भी कांग्रेस सरकार सीएए को राज्य में लागू करने के खिलाफ प्रस्ताव पारित कर चुकी है।
— पंकज शर्मा
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें