बुधवार, 20 मई 2020

श्री गुरु रामदास लंगर में उपयोग हो रही आर्गेनिक सब्जियों से कुदरती खेती का संदेश पहुंच रहा है दुनिया भर में


— आज मनवता की सेहत को बचाने के लिए रसायणक खादों व कीटनाशकों के करना होगा किनारा
पंकज शर्मा , अमृतसर
 विश्व प्रसिद्ध आध्यात्मिक स्थल श्री हरमंदिर साहिब के दर्शन के लिए आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए श्री गुरु रामदास जी लंगर हाल में तैयार किए जाने वाले लंगर में
 आर्गेनिक सब्जियों का इस्तेमाल हो रहा है । इसके लिए शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने अंतरराष्ट्रीय अटारी सीमा के निकट स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारे श्री सतलानी साहिब की सात एकड़ भूमि में आर्गेनिक खेती की शुरुआत वर्ष 2016 में की थी।  अब इसका एरिया बढा कर 23 एकड कर दिया गया है। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से किसानों और संगत को रसायणक खादों को छोड़ आर्गेनिक विधियां अपना कर खेती करने व अपनी सेहत के संभाल के प्रति जागृत करने के लिए ही इस अभियान की शुरूआत की थी। एसजीपीसी के पूर्व अध्यक्ष अवतार सिह मक्कड की ओरा से आर्गेनिक खेती का शुभारंभ गुरुद्वारा सतलानी साहिब से किया गया था। एसजीपीसी की से शुरू किए इस अभियान की सफलता को मुख्य रख वर्ष 2016 में पंजाब सरकार की ओर से अर्गेनिक सब्जियों व फल पैदा करने वाले इस प्रोजेक्ट को स्टेट अवार्ड भी दिया गया था। इससे जहां लोग कीटनाशक युक्त सब्जियों से विमुख होंगे, वहीं अपने स्वास्थ्य के प्रति भी जागरूक होंगे।
संगत को लंगर में स्वास्थ्यवर्द्धक सब्जियां खिलाने के लिए आर्गेनिक खेती की शुरुआत की गई थी। ताकि इस का संदेश दुनिया भर में पहुंचाया जा सके।  यहां पांच एकड़ भूमि में पालक, गाजर, मूली, शलगम, धनिया, सरसों, मेथी, भिंड्डी , गोभी, पत्ता गोभी , चुकंदर  व मौसम की हर सब्जी की खेती की जाती है। वहीं बाकी भूमि पर बाग लगाया गया है। वहां नाशपाती, गब्बूगोशा, किन्नू ,अलूचा , आडू व  आलू बुखारा आदि के पौदे लगाए गए है।  सब्जियों और बाग के किसी भी पौदे पर  रासायनिक खाद व कीटनाशक का प्रयोग नहीं किया जाता। यहां से पैदा होने वाली सारी सब्जियों और फलों का उपयोग  गुरु के लंगर में किया जाएगा। बाहर मार्केट में कुछ भी नही बेचा जाता है।
श्री हरिमंदिर साहिब के एडिशनल मैनेजर राजिंदर सिंह रूबी ने बताया कि सब से पहले वहां बाग दो एक्ड में शुरू किया गया था जिसा का क्षेत्र अब बढा दिया गया है। आर्गेनिक सब्बिजयां पैदा करने वाले खेतों में सारी खेती व देखभाग कृषि विशेषज्ञों की सलाह से की जाती है।
लंगर में अगर  लोगों की अच्छी सेहत के लिए अच्छा भोजन  नहीं दे सकेंगे तो उनकी सेहत खराब हो सकती है। हर रोज यहां करीब डेढ  लाख से अधिक  श्रद्धालु  लंगर खाते आते हैं और उनकी सेहत बनीं रहे ये भी हमारे लिए जरुरी हैं। ज्यादा से ज्यादा पैदावार लेने के चक्कर में आज किसान खेती करते वक्त फसलों में कीटनाशक और रसायन का इस्तमाल करते हैं, जिससे अनाज के जहरीले होने के साथ ही मिट्टी, पानी और हवा भी इससे प्रभावित होती है।
श्री गुरु राम दास जी लंगर भवन  में ऑर्गेनिक सब्जियां से बने लंगर को खाने का अपना अलग ही सवाद  है, जो सेहत के लिए अच्छा होने के साथ ही खाने में भी काफी अच्छा लगता है। एसजीपीसी  की ये पहले काफी अच्छी हैं और बाकी जगह भी लंगर के लिए जैविक सब्जियों का ही इस्तमाल करने के लिए एसजीपीसी कोशिशें कर रही है।
एसजीपीसी के मुख्य सचिव डा रूप सिंह कहते है कि एसजीपीसी की ओर से लंगर में आर्गेनिक सब्जियों का उपयोग करने का जो प्रयास कुछ वर्ष पहले किया था। इस का बढिया संदेश कुदरती खेती के प्रति गया है। एसजीपीसी के प्रबंधों के अधीन चलने वाले अन्य गुरुद्वारों की जमीनों पर भी अर्गेनिक सब्जियों की खेती कर उनका उपयोग लगर के लिए करने की योजना है। जिसे जल्दी ही लागू किया जाएगा। गुरु घर से कुदरती खेती के प्रति जागृति किया जा रहा है। ताकि मानवता के खराब हो रही सेहत को कुदरती विधियों व खानपान को अपना बचाया जा सके।
— पंकज शर्मा

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