— सम्मान समारोह सिर्फ केस के गवाहों को ही सम्मानित करने तक रखा गया सीमित
पंकज शर्मा , अमृतसर
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से दिल्ली दंगों के दोषियों को
सजा दिलवाने में अहम भूमिका निभाने वाले तीन गवाहों को सम्मानित करने के
लिए 22 जनवरी की तिथि तय की गई है। परंतु इस सम्मान समारोह से इस केस को
लड़ कर दोषियों को सजा दिलवाने वाले वकील एचएस फूलका को सम्मान समारोह से
बाहर रख दिया गया है। जबकि पहले फूलका को भी सम्मानित करने का फैसला
अकाली दल ने लिया था। जब से एडवोकेट फूलका ने पंथक सेवा संगठन और पंथक
सेवा आर्मी बना कर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी और सिख गुरुधामों को
राजनीतिक दखलअंदाजी से मुक्त करने के लिए अभियान की शुरू आत की है तब से
सम्मान करने वाले लोगों की सूची से एडवोकेट फूलका का नाम हटा दिया गया
है। एसजीपीसी अब फिर 22 जनवरी को एसजीपीसी कार्यालय में रखे गए सम्मान
समारोह में सिर्फ इस केस के तीन गवाहों को ही सम्मान करेगी। जो गवाह अपने
ब्यानों से पीछे नहीं हटे और दोषियों को सजाएं दिलवाई है।
उल्लेखनीय है कि चंडीगढ़ में 19 दिसंबर को अकाली दल की कोर कमेटी की हुई
बैठक में फैसला लिया गया था कि कांग्रेस के सीनियर नेता सज्जन कुमार को
दिल्ली दंगों के दोष में सजा करवाने वाले एडवोकेट एचएस फूलका और गवाहों
को सम्मानित किया जाएगा। इस के लिए अकाली दल की ओर से 26 दिसबर की तिथि
भी एलान कर दी थी। कहा था कि इन को अकाली दल श्री अकाल तख्त साहिब पर
सम्मान करेगा। परंतु 21 दिसंबर से 28 दिसंबर को साहिबजादों की शहीदी को
मुख्य रख सिख कौम शोक सप्ताह मनाती है। इन दिनों में कोई भी सम्मान
समारोह आयोजित नहीं होता है। जिस को मुख्य रख 26 दिसंबर वाले सम्मान
समारोह को एसजीपीसी के अध्यक्ष गोबिंद सिंह लोंगोवाल ने एक ब्यान जारी कर
स्थगित कर दिया था। कहा था कि फूलका समेत गवाहों को सम्मानित करने के
लिए जल्दी ही नई तिथि एलान कर दी जाएगी। इस के बाद फूलका ने एक समाजिक
संगठन का गठन करके एसजीपीसी समेत अलग अलग सिख धार्मिक स्थानों को
राजनीतिक लोगों के हाथों से मुक्त करवाने का अभियान श्री अकाल तख्त साहिब
पर अरदास करके शुरू कर दिया। जो अकाली दल का पसंद नहीं आया। इस के लिए ही
अब एसजीपीसी ने सिर्फ केस के गवाहों को ही सम्मानित करने के लिए 22
जनवरी तिथि तय कर दी है। एसजीपीसी के सूत्रों से पता चला है कि फूलका की
ओर से अकाली दल के खिलाफ चलाए अभियान को मुख्य रखते हुए ही उनका नाम
सम्मानित किए जाने वाले व्यक्तियों की सूची से हटा दिया गया है जिस को
लेकर एसजीपीसी और पंथक गलियारे में खासी चर्चा शुरू हो गई है।
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