— सम्मान समारोह 22 की जगह होगा अब 26 जनवरी को
— दिल्ली दंगों के केस के गवाहों के साथ साथ अब वकील फूलका को भी
एसजीपीसी करेगी सम्मानित
पंकज शर्मा , अमृतसर
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से दिल्ली दंगों के दोषियों को
सजा दिलवाने में अहम भूमिका निभाने वाले वकीलों को सम्मानित न करने के
पहले लिए फैसले से एसजीपीसी बैक फुट पर आ गई है। एसजीपीसी के अध्यक्ष
गोबिद सिंह लोंगोवाल ने एलान किया था कि एसजीपीसी दिल्ली दंगों के
दोषियों को सजा दिलवाने में अहम भूमिका निभाने वाले तीन गवाहों को
सम्मानित करने के लिए 22 जनवरी को एसजीपीसी कार्यालय में कार्यक्रम
करेगी। जब इस केस में मुख्य भूमिका निभाने वाले वकील एचएस फूलका को न
सम्मानित करने का मुद्दा मीडिया में उछला तो अगले ही दिन अकाली दल के
अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने एलान किया कि एसजीपीसी दंगों के दोषियों को
सजा दिवलाने में भूमिका निभाने वाले गवाहों के साथ साथ केस के वकीलों को
भी सम्मानित करेगी। सुखबीर के इस एलाने के बाद अब एसजीपीसी ने एलान किया
कर दिया है कि दोषियों को सजाए दिलवाने वाले गवाहों के साथ साथ वकीलों को
भी एसजीपीसी सम्मानित करेगे। पहले यह कार्यक्रम 22 जनवरी को रखा गया था
अब यह कार्यक्रम 26 जनवरी को रख दिया है। एसजीपीसी के अध्यक्ष गोबिंद
सिंह लोंगोवाल के निजी सहायक सुखमिंदर सिंह ने कहा कि 26 जनवरी को यह
सम्मान कार्यक्रम एसजीपीसी कार्यालय तेजा सिंह समुद्री हाल में सुबह 11
बजे आयोजित किया जाएगा।
एसजीपीसी व पंथक गलियारा में चर्चा है कि 22 जनवरी की जगह 26 जनवरी की
तिथि एक सुनियोजित ढंग से तय की गई है। क्योंकि अगर 26 जनवरी को यह
सम्मान समारोह किया जाता है तो इस के लिए मीडिया कवरेज कम होगी । मीडिया
कर्मी इस दौरान सुबह 11 बजे गणतंत्र दिवस के सरकारी कार्यक्रमों की करवेज
में लगे होंगे। क्योंकि गवाहों के साथ साथ फूलका को भी सम्मानित किया
जाना है इस लिए फूलकों को अधिक करवेज नहीं मिलेगी। चर्चा यह भी है कि 27
जनवरी को समाचार पत्र 26 जनवरी की छुट्टी होने के कारण मार्केट में नही
आते। 28 जनवरी को जब पत्र मार्केेट में आते है तो उसमें गणतंत्र दिवस
कार्यक्रमों की कवरेज के कारण स्थान भी कम रहता है इस लिए फूलका के
सम्मान कार्यक्रम के लिए जगह भी अधिक नही मिल पाएगी। चाहे 22 की जगह 26
जनवरी को सम्मान कार्यक्रम रखे जाने के लिए सुखमिंदर सिंह ने कारणों का
जिक्र नहीं किया है परंतु इस मामले को लेकर पंथक क्षेत्रों में गहरी
चर्चा शुरू हो गई है।
उल्लेखनीय है कि पहले इस सम्मान समारोह में इस केस को लड़ कर दोषियों
को सजा दिलवाने वाले वकील एचएस फूलका को सम्मान समारोह से बाहर रख दिया
गया था। जबकि इस से भी पहले फूलका को भी सम्मानित करने का फैसला अकाली
दल ने लिया था। जब से एडवोकेट फूलका ने पंथक सेवा संगठन और पंथक सेवा
आर्मी बना कर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी और सिख गुरुधामों को
राजनीतिक दखलअंदाजी से मुक्त करने के लिए अभियान की शुरू आत की है तब से
सम्मान करने वाले लोगों की सूची से एडवोकेट फूलका का नाम हटा दिया गया था
। एसजीपीसी ने 22 जनवरी को एसजीपीसी कार्यालय में रखे गए सम्मान समारोह
में सिर्फ इस केस के तीन गवाहों को ही सम्मानित करने का फैसला लिया था।
मामला उछले के बाद अब एसजीपीसी ने वकीलों को भी सम्मानित करने का फैसला
लिया है। चंडीगढ़ में 19 दिसंबर 2018 को अकाली दल की कोर कमेटी की हुई
बैठक में फैसला लिया गया था कि कांग्रेस के सीनियर नेता सज्जन कुमार को
दिल्ली दंगों के दोष में सजा करवाने वाले एडवोकेट एचएस फूलका और गवाहों
को सम्मानित किया जाएगा। इस के लिए अकाली दल की ओर से 26 दिसबर की तिथि
भी एलान कर दी थी। कहा था कि इन को अकाली दल श्री अकाल तख्त साहिब पर
सम्मानित करेगा। परंतु 21 दिसंबर से 28 दिसंबर को साहिबजादों की शहीदी को
मुख्य रख सिख कौम शोक सप्ताह मनाती है। इन दिनों में कोई भी सम्मान
समारोह आयोजित नहीं होता है। जिस को मुख्य रख 26 दिसंबर वाले सम्मान
समारोह को एसजीपीसी के अध्यक्ष गोबिंद सिंह लोंगोवाल ने एक ब्यान जारी कर
स्थगित कर दिया था।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें