— जीएनडीयू एडहाक अध्यापक एसोसिएशन ने मामले की शिकायतें भेजी
विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार और वीसी को भी
अमृतसर
गुरु नानक देव विश्वविद्यालय और इसके साथ संबंधित कंस्टीच्यूट कालेजों
में काम कर रहे एडहाक अध्यापकों का आर्थिक व मानसिक सोशन किया जा जा रहा
है। इस को लेकर प्रभावित अध्यापक मानवीय अधिकार आयोग के पास पहुंच गए है।
ममाले की गंभीरता को मुख्य रखते हुए इस की शिकायत अध्यापकों ने जीएनडीयू
के वीसी और रजिस्ट्रार समेत विभिन्न कालेजों के प्रिंसिपलों को भी भेजी
गई है।
गुरु नानक देव विश्वविद्यालय एसोसिएशन आफ एडहाक टीचर्स ने जीएनडीयू के
वीसी और चेयरमैन मानवीय अधिकार आयोग के पास भेजी लिखित शिकायत में आरोप
लगाया है कि विश्वविद्यालय के साथ संबंधित कंस्टीच्यूट कालेजों में पढ़ा
रहे पटीशनर एडहाक अध्यापकों का कालेजों के प्रबंधकों की ओर से मानसिक और
आर्थिक शोषण किया जा रहा है। कहा कि पटीशनर अध्यापकों के साथ पक्षपात
वाली नीतियां अपनाई जा रही है। अगर विश्वविद्यालय ने प्रबंधकों को
पक्षपात वाली नीतियां अपनाने से न रोका को अध्यापक कामकाज ठप्प रख कर
संघर्ष के मैदान में उतार आएंगे।
एडहाक अध्यापक यूनियन के नेताओं प्रो गुरप्रीत सिंह , प्रो विशाल शर्मा
और प्रो सुखदेव सिंह ने बताया कि यूजीसी नियमों को अनदेखा करके एडहाक
अध्यापकों पर प्रेशर डाला जाता है कि वह अपना रजिस्टर हर रोज कालेज में
जमा करवाएं और अगले दिन इसे ईशू करवाए। साथ ही विद्यार्थियों के काम वाले
रजिस्टर भी कार्यालय में हर रोज जमा करवाए जाएं। जबकि इस तरह को काई भी
नियम न तो यूजीसी ने बनाया और नही किसी अन्य अध्यापक के उपर उसे लागू
किया गया है।
पिछले दो वर्षों से पटीशनर अध्यापकों को परीक्षा सुपरवाइज की ड्यूटी और
पेपर चैकिंग की ड्यूटी से दूर रखा गया है। परंतु अब इस कालेजों के
अध्यापकों के उपर दाबव डाला जा रहा है कि कालेज में मिड टरम परीक्षा में
ड्यूटी लगाई जाए। इस लिए विश्वविद्यालय स्पष्ट करे कि क्या समेस्टर
परीक्षा और मिड टरम परीक्षा अलग अलग है या फिर एक के ही दो नाम रखे हुए
है। अगर एडहाक अध्यापकों ने यह ड्यूटी लेनी है तो उनको नियामों के अनुसार
अन्य अध्यापकों की तरह ड्यूटी वेतन दिया जाए।
यूनियन नेताओं ने कहा कि विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने समय समय पर
ब्यान दिए है कि एडहाक अध्यापकों को लैक्चर बेस पर रखा गया है। इस लिए इन
अध्यापकों से कक्षा में पढाई के अलावा किसी भी तरह का गैर अध्यापन काम
नहीं लिया जाता। तो फिर अब इन अध्यापकों से अनुशासन ड्यूटी, आईकार्ड
ड्यूटी, क्साल इंचार्ज ड्यूटी, यूथ फेस्टिवल ड्यूटी के लिए टाइम बाउंड
क्यों किया जा रहा है। जब इस संबंधी प्रिंसिपलों को जीएनडीयू के
अधिकारियों के ब्यान दिखाए जाते है तो एडहाक अध्यापकों का वेतन काटने की
धमकी दे दी जाती है।
यूनियन नेताओं ने बताया कि विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार ने 6 सिंतबर 2018
को एक पत्र नंबर आर—5946 अमृतसर के डीसी को लिखा था जिस में स्पष्ट किया
गया था कि एक समेस्टर में 90 दिन की पढाई जरूरी होनी होती है। जीएनडीयू
की ओर से इस अकादमिक वर्ष 2018—19 की शुरूआत लेट की गई है। अब समेस्टर
परीक्षा की डेटशीट के अनुसार 2 नवंबर से प्रेक्टिल और 22 नवंबर से लिखित
परीक्षाएं शुरू की जा रही है। तो फिर यूजीसी का 90 दिन का समेस्टर नियम
लागू क्यों नहीं किया जा रहा है। जबकि अभी तक विद्यार्थियों के समेस्टर
का सिलेबस पूरा नही हुआ है तो परीक्षाएं समय से पहले क्यों आयोजित करने
के लिए मजबूर किया जा रहा है।
—पंकज शर्मा
विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार और वीसी को भी
अमृतसर
गुरु नानक देव विश्वविद्यालय और इसके साथ संबंधित कंस्टीच्यूट कालेजों
में काम कर रहे एडहाक अध्यापकों का आर्थिक व मानसिक सोशन किया जा जा रहा
है। इस को लेकर प्रभावित अध्यापक मानवीय अधिकार आयोग के पास पहुंच गए है।
ममाले की गंभीरता को मुख्य रखते हुए इस की शिकायत अध्यापकों ने जीएनडीयू
के वीसी और रजिस्ट्रार समेत विभिन्न कालेजों के प्रिंसिपलों को भी भेजी
गई है।
गुरु नानक देव विश्वविद्यालय एसोसिएशन आफ एडहाक टीचर्स ने जीएनडीयू के
वीसी और चेयरमैन मानवीय अधिकार आयोग के पास भेजी लिखित शिकायत में आरोप
लगाया है कि विश्वविद्यालय के साथ संबंधित कंस्टीच्यूट कालेजों में पढ़ा
रहे पटीशनर एडहाक अध्यापकों का कालेजों के प्रबंधकों की ओर से मानसिक और
आर्थिक शोषण किया जा रहा है। कहा कि पटीशनर अध्यापकों के साथ पक्षपात
वाली नीतियां अपनाई जा रही है। अगर विश्वविद्यालय ने प्रबंधकों को
पक्षपात वाली नीतियां अपनाने से न रोका को अध्यापक कामकाज ठप्प रख कर
संघर्ष के मैदान में उतार आएंगे।
एडहाक अध्यापक यूनियन के नेताओं प्रो गुरप्रीत सिंह , प्रो विशाल शर्मा
और प्रो सुखदेव सिंह ने बताया कि यूजीसी नियमों को अनदेखा करके एडहाक
अध्यापकों पर प्रेशर डाला जाता है कि वह अपना रजिस्टर हर रोज कालेज में
जमा करवाएं और अगले दिन इसे ईशू करवाए। साथ ही विद्यार्थियों के काम वाले
रजिस्टर भी कार्यालय में हर रोज जमा करवाए जाएं। जबकि इस तरह को काई भी
नियम न तो यूजीसी ने बनाया और नही किसी अन्य अध्यापक के उपर उसे लागू
किया गया है।
पिछले दो वर्षों से पटीशनर अध्यापकों को परीक्षा सुपरवाइज की ड्यूटी और
पेपर चैकिंग की ड्यूटी से दूर रखा गया है। परंतु अब इस कालेजों के
अध्यापकों के उपर दाबव डाला जा रहा है कि कालेज में मिड टरम परीक्षा में
ड्यूटी लगाई जाए। इस लिए विश्वविद्यालय स्पष्ट करे कि क्या समेस्टर
परीक्षा और मिड टरम परीक्षा अलग अलग है या फिर एक के ही दो नाम रखे हुए
है। अगर एडहाक अध्यापकों ने यह ड्यूटी लेनी है तो उनको नियामों के अनुसार
अन्य अध्यापकों की तरह ड्यूटी वेतन दिया जाए।
यूनियन नेताओं ने कहा कि विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने समय समय पर
ब्यान दिए है कि एडहाक अध्यापकों को लैक्चर बेस पर रखा गया है। इस लिए इन
अध्यापकों से कक्षा में पढाई के अलावा किसी भी तरह का गैर अध्यापन काम
नहीं लिया जाता। तो फिर अब इन अध्यापकों से अनुशासन ड्यूटी, आईकार्ड
ड्यूटी, क्साल इंचार्ज ड्यूटी, यूथ फेस्टिवल ड्यूटी के लिए टाइम बाउंड
क्यों किया जा रहा है। जब इस संबंधी प्रिंसिपलों को जीएनडीयू के
अधिकारियों के ब्यान दिखाए जाते है तो एडहाक अध्यापकों का वेतन काटने की
धमकी दे दी जाती है।
यूनियन नेताओं ने बताया कि विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार ने 6 सिंतबर 2018
को एक पत्र नंबर आर—5946 अमृतसर के डीसी को लिखा था जिस में स्पष्ट किया
गया था कि एक समेस्टर में 90 दिन की पढाई जरूरी होनी होती है। जीएनडीयू
की ओर से इस अकादमिक वर्ष 2018—19 की शुरूआत लेट की गई है। अब समेस्टर
परीक्षा की डेटशीट के अनुसार 2 नवंबर से प्रेक्टिल और 22 नवंबर से लिखित
परीक्षाएं शुरू की जा रही है। तो फिर यूजीसी का 90 दिन का समेस्टर नियम
लागू क्यों नहीं किया जा रहा है। जबकि अभी तक विद्यार्थियों के समेस्टर
का सिलेबस पूरा नही हुआ है तो परीक्षाएं समय से पहले क्यों आयोजित करने
के लिए मजबूर किया जा रहा है।
—पंकज शर्मा
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