सैनेटरी नैपकिंन से पैदा हो रही गुप्त बीमारियों प्रति जेलों में बंद
महिलाओं को जागृत करने लगा एनजीओ शी सोसाइटी
पंकज शर्मा , अमृतसर
महिलाओं को समाजिक मुद्दों को लेकर जागृत करने वाले एनजीओ शी सोसाइटी ने
जेलों में बंद महिला कैदियों को सैनेटरी नैपकनों के प्रति जागृत करने का
फैसला लिया है। संस्थान इस अभियान को पंजाब सरकारक के जेल विभाग से मिल
कर महिला कैदियों को दोबारा उपयोग होने वाले वाशएबल सैनटरी नैपकिंन
संबंधी जागृत करेगी। प्रयोग के रूप में सस्थान कैदी महिलाओं को निशुल्क
सैनेटरी नैपकिन भी बांटे जाएंगे।
शी सोसाइटी की चेयरमैन जीवनजोत कौर ने बताया कि पंजाब सरकार के जेल
म़ंत्रालय के सहयोग के साथ उनके एनजीओ से महिलाओं को दो उपयोग में लाए
जाने वाले वाशएबल सैनेटरी नैपकिंन के प्रति जागृत करने का फैसला लिया है।
जेल मंत्री संखजिंदर सिह रंधावा के साथ इस मामले पर बात हो चुकी है।
संस्थान की ओर से पहला जागृति सैमिनार कपूरथला जेल में आयोजित किया जा
चुका है। वहां 185 महिला कैदियों को दो दो वाशएबल सैनेटरी नैपकिंन उपयोग
के लिए दिए गए है। यह नैपकिन आसानी से धो बार बार कई माह तक उपयोग में
लाए जा सकते है। यह नैपनिक हैड मैड है। एनजीओ की सदस्य महिलाएं इन को
तैयार करती है। यह नैपकिंन पूरी तरह काटन के बने हुए है। इन को उपयोग
करने के बाद फैकने की जरूरत नहीं बल्कि उनको धो कर व सुखा कर दोबारा कई
माह तक उपयोग में लाया जा सकता है।
यह काटन के हैंड मैड वाशएबल सैनेटरी नैपकिंन पर्यावरण फ्रेंडली है। इन का
न तो महिलाओं की हैल्थ पर बुरा प्रभाव पडता है और नहीं यह पर्यावरण को
प्रदूषित करते है।
जीवनजोत कौर ने बताया कि उनका संस्थान इस अभियान को पिछले तीन वर्षों से
चला रहा है। जेलों में महिला कैदियों को जागृत करने के लिए पिछले माह ही
यह अभियान शुरू किया गया है। जबकि इस से पहले वह इस के प्रति स्लम
बस्तियों की महिलाओं , स्कूल कालेजों की छात्राओं , विश्वविद्यालय की
छात्राओं और अध्यापिकाओं आदि को जागृत करती आ रही है। इस दौरान उनको
मार्केट में मिलने वाले प्लास्टिक के फाइबर युक्त डिस्पोजेएबल सैनेटिरी
नैपकिन के महिलाओं के शरीर और पर्यावरण पर पडे वाले उल्ट प्रभाव के प्रति
जागृत करती आ रही है। जीवन जोत कहती है कि मार्केट में उपलब्ध सैनेटिरी
नैपकिन यहां महिलाओं को एलर्जी, कैंसर , चमडी रोग आदि पैदा करते है वही
यहा पर्यावरण को प्रदूषित करके वातावरण में कई तरह की बीमारियों को पैदा
करते है। महिलाओं की ओर उपयोग लाए जाते सैनेटरी नैपकिंग प्लास्टिक फाइबर
से बने होते है इस में जो जैल उपयोग होती है वह महिलाओं को कई तरह के
गुप्त रोग पैदा करती है। वहीं उपयोग के बाद जब हम इसे फैक देते है तो यह
धरती में डिसपोज नहीं होता। इसी प्लास्टिक गलने में 500 से 800 वर्ष लगा
देती है। यह एक खतरनाक कचरा पैदा हो रहा है। जो देश के पर्यावरण और
इंसानों के स्वस्थ्य के लिए बुरी तरह हानिकारण है। इस के लिए जागृत करने
के उद्देश्य से उनका संगठन दिन रात काम कर रहा है।
महिलाओं को जागृत करने लगा एनजीओ शी सोसाइटी
पंकज शर्मा , अमृतसर
महिलाओं को समाजिक मुद्दों को लेकर जागृत करने वाले एनजीओ शी सोसाइटी ने
जेलों में बंद महिला कैदियों को सैनेटरी नैपकनों के प्रति जागृत करने का
फैसला लिया है। संस्थान इस अभियान को पंजाब सरकारक के जेल विभाग से मिल
कर महिला कैदियों को दोबारा उपयोग होने वाले वाशएबल सैनटरी नैपकिंन
संबंधी जागृत करेगी। प्रयोग के रूप में सस्थान कैदी महिलाओं को निशुल्क
सैनेटरी नैपकिन भी बांटे जाएंगे।
शी सोसाइटी की चेयरमैन जीवनजोत कौर ने बताया कि पंजाब सरकार के जेल
म़ंत्रालय के सहयोग के साथ उनके एनजीओ से महिलाओं को दो उपयोग में लाए
जाने वाले वाशएबल सैनेटरी नैपकिंन के प्रति जागृत करने का फैसला लिया है।
जेल मंत्री संखजिंदर सिह रंधावा के साथ इस मामले पर बात हो चुकी है।
संस्थान की ओर से पहला जागृति सैमिनार कपूरथला जेल में आयोजित किया जा
चुका है। वहां 185 महिला कैदियों को दो दो वाशएबल सैनेटरी नैपकिंन उपयोग
के लिए दिए गए है। यह नैपकिन आसानी से धो बार बार कई माह तक उपयोग में
लाए जा सकते है। यह नैपनिक हैड मैड है। एनजीओ की सदस्य महिलाएं इन को
तैयार करती है। यह नैपकिंन पूरी तरह काटन के बने हुए है। इन को उपयोग
करने के बाद फैकने की जरूरत नहीं बल्कि उनको धो कर व सुखा कर दोबारा कई
माह तक उपयोग में लाया जा सकता है।
यह काटन के हैंड मैड वाशएबल सैनेटरी नैपकिंन पर्यावरण फ्रेंडली है। इन का
न तो महिलाओं की हैल्थ पर बुरा प्रभाव पडता है और नहीं यह पर्यावरण को
प्रदूषित करते है।
जीवनजोत कौर ने बताया कि उनका संस्थान इस अभियान को पिछले तीन वर्षों से
चला रहा है। जेलों में महिला कैदियों को जागृत करने के लिए पिछले माह ही
यह अभियान शुरू किया गया है। जबकि इस से पहले वह इस के प्रति स्लम
बस्तियों की महिलाओं , स्कूल कालेजों की छात्राओं , विश्वविद्यालय की
छात्राओं और अध्यापिकाओं आदि को जागृत करती आ रही है। इस दौरान उनको
मार्केट में मिलने वाले प्लास्टिक के फाइबर युक्त डिस्पोजेएबल सैनेटिरी
नैपकिन के महिलाओं के शरीर और पर्यावरण पर पडे वाले उल्ट प्रभाव के प्रति
जागृत करती आ रही है। जीवन जोत कहती है कि मार्केट में उपलब्ध सैनेटिरी
नैपकिन यहां महिलाओं को एलर्जी, कैंसर , चमडी रोग आदि पैदा करते है वही
यहा पर्यावरण को प्रदूषित करके वातावरण में कई तरह की बीमारियों को पैदा
करते है। महिलाओं की ओर उपयोग लाए जाते सैनेटरी नैपकिंग प्लास्टिक फाइबर
से बने होते है इस में जो जैल उपयोग होती है वह महिलाओं को कई तरह के
गुप्त रोग पैदा करती है। वहीं उपयोग के बाद जब हम इसे फैक देते है तो यह
धरती में डिसपोज नहीं होता। इसी प्लास्टिक गलने में 500 से 800 वर्ष लगा
देती है। यह एक खतरनाक कचरा पैदा हो रहा है। जो देश के पर्यावरण और
इंसानों के स्वस्थ्य के लिए बुरी तरह हानिकारण है। इस के लिए जागृत करने
के उद्देश्य से उनका संगठन दिन रात काम कर रहा है।
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