गुरुवार, 12 जुलाई 2018

पटीशनर एडहाक अध्यापकों को नहीं करने दी गई जीएनडीयू की ओर से नौकरी छुट्टियों के बाद ज्वाइन

— जीएनडीयू के खिलाफ 180 पटीशनर अध्यापकों  को कालेजों के प्रबंधकों ने
नही लगाने दी हाजिरी
— पटीशनर अध्यापकों ने कहा यह अदालत के आदेशों का उल्लंघन, अवमानना का
अदालत में अलग से दायर करेंगे व केस
अमृतसर
कोर्ट की शरण में गए एडहाक अध्यापकों को गर्मियों की छुट्टियों के बाद
जीएनडीयू अधिकारियों ने कालेजों में ज्वाइन करवाने से रोक लगा दी है।
विश्वविद्यालय के खिलाफ इन 180 पटीशनरों को गुरुवार अलग अलग 8 कालेजों के
प्रंबंधकों ने जीएनडीयू अधिकारियों के मौखिक आदेशों को मुख्य रख ज्वाइन
नहीं करवाया है। इस के रोष में जीएनडीयू एडहाक टीचर्स एसोसिएशन की ओर से
अलग अलग कालेजों के प्रिंसिपलों के साथ साथ जीएनडीयू के वीसी और
रजिस्ट्रार को शिकायत पत्र जारी कर दिए है। एलान किया है कि पटीशनर
अध्यापाकों को ज्वाइंन कर करवाने के खिलाफ यह अध्यापक अदालत के आदेशों की
अवमानना का अलग से विश्वविद्यालय के प्रबंधकों के खिलाफ केस दायर करेंगे।
जीएनडीयू एडहाक टीचर्स एसोसिएशन के नेताओं विशाल शर्मा , सुखदेव सिंह और
डा गुरप्रीत सिंह ने बताया कि जीएनडीयू के अलग अलग कालेजों में पढाने
वाले वह 180 अध्यापक जब गुरुवर को गर्मियों की छुट्टियों के बाद कालेज
पहुंचे और हाजिरी लगाने लगे तो उनको कालेजों के प्रबंधकों ने यह कह कर
हाजिरी लगाने से रोक किया कि विश्वविद्यालय की अेार से आदेश हुए है कि इन
अध्यापकों को ड्यूटी ज्वाइन न करवाई जाए। जब आदेश दिखाने को कहा गया तो
आदेश दिखाने से इंकार कर दिया गया और इन अध्यापकों को हाजिरी नहीं लगाने
दी गई।
पटीशनर अध्यापकों ने बताया कि वह वर्ष 2017 मार्च से विश्वविद्यालय के
खिलाफ कोर्ट में गए हुए है। 180 यह पटीशन अध्यापक जीएनडीयू के अलग अलग
कालेजों में एडहाक रूप में पढा रहे है। विश्वविद्यालय ने  1 जून से 11
जुलाई तक गर्मियों की ​छुट्टियां एलान की हुई थी। गुरुवार जब पटीशन
अध्यापक कालेजों में पहुचे तो उनको हाजिरी नहीं ​लगाने दी गई।एक कालेज के
प्रबंधकों ने जो एक अध्यापिका को बायोमेट्रिक मशीन से हाजिरी लगाते समय
हाजिरी लगाने से रोके के लिए धक्के दिए और यहां तक के बायोमेट्रिक मशीन
की तारे काट कर मशीन ही प्रबंधकों ने उखाड दी है। जिस की ​भी लिखित
शिकायत उनकी ओर से विश्वविद्यालय के अधिकारियों को की गई है। उन्होंने
कहा कि जीएनडीयू के जालंधर कालेज में भी पटीशन एडहाक अध्यापक है।  परंतु
उनको हाजिरी से नहीं रोका गया और उन्होंने पहले की ही तरह सारा दिन
कक्षाएं लगाई है। विश्वविद्यालय दोहरा मापदंड अपना रही है। एसोसिएशन
प्रतिनिधियों ने बताया कि पटीशनर अध्यापकों को माननीय हाई कोर्ट ने एक
आदेश जारी करके 28 मार्च तक स्टे दिया हुआ है। अदालत के आदेशों के अनुसार
विश्वविद्यालय और कालेजों के प्रबंधक इन एडहाक अध्यापकों को उनकी पोस्टों
से 28 अक्टूबर 2018 तक नही हटा सकते और यह अध्यापक अपनी पदो पर काम करते
रहेंगे। अधिकारियों ने कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन किया है। संगठन और
पटीशन अध्यापक इस मामले को लेकर अधिकारियों के खिलाफ अदालत के आदेशों के
उल्लंघन का अलग से केस दायर करने जा रहे है।
मामले के संबंध में जब विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डा केएस काहलों के
साथ संपर्क किया गया तो उन्होंने फोन ही नहीं उठाया। जब विश्वविद्यालय के
डीन डा कमलजीत सिंह के संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि गुरुवार को
छुट्टियों के बाद जब एडकाह अध्यापक ड्यूटी पर आए तो उनको कक्षाएं पढाने
नही दी गई क्यों के एडकाह अध्यापकों की ओर से जो विश्वविद्यालय के खिलाफ
केस करके स्टे लिया हुआ है उस स्टे के खिलाफ विश्वविद्यालय की ओर से उपरी
बैंच में स्टे तोड़ने की अपील की हुई है। जिस की अगले सप्ताह को सुनवाई
है। अदालत जो फैसला देगा उसके अनुसार विश्वविद्यालय अगली कार्रवाई करेगा।
अभी इन पटीशनर अध्यापकों को कक्षाएं नहीं लगानी दी जा रही है।
— पंकज शर्मा

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