गुरुवार, 12 जुलाई 2018

जांच मुकम्मल होने के बावजूद भी किरण बाला मामले के आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई से एसजीपीसी अधिकारियों ने धारण की चुप्पी


— राजनीतिक दबाव के चलते मामले के आरोपियों को बचाने में लगे है एसजीपीसी
के कई अधिकारी
— जांच कमेटी ने जांच कर रिपोर्ट सौंपी दी है एसजीपीसी अध्यक्ष को ,
बावजूद इस रिपोर्ट को नहीं किया जा रहा सर्वजनक
— अधिकारियों का दावा अभी अधूरी है जांच रिपोर्ट
पंकज शर्मा , अमृतसर
वैशाखी पर जत्थे के साथ पाकिस्तान गई गढ़शंकर की महिला किरण बाला के पाक
पहुंच कर गायब होने का विवाद गहरा होता जा रहा है। किरण बाला मामले की
जांच के लिए एसजीपीसी के अध्यक्ष गोबिंद सिंह लोंगोवाल की ओर बनाई गई
जांच कमेटी ने चाहते अढाई माह बीतने के बाद रिपोर्ट एसजीपीसी के अध्यक्ष
को सौंप दी है बावजूद इस मामले में अभी तक न तो एसजीपीसी की ओर से श्री
हरिमंदिर साहिब के पूर्व मैनेजर सुलखन सिंह भंगाली और न ही अभी तक इस
मामले में सिफारिश करने के आरोपी पूर्व अकाली मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया
के राजनीतिक सलाहकार के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई है। एसजीपीसी के
अधिकारी इस मामले को ठंडे बस्ते में डालने की कोशिशों में है। पता चला है
कि इस मामले में सुलखन सिंह भंगाली समेत तलबीर सिंह गिल दोनों के उपर ही
आरोप साबित हो रहे है।
किरण बाला एसजीपीसी के जत्थे के साथ पाकिस्तान गई , वहां जत्थे से गायब
हो कर पहले ही तय योजना के अनुसार पाक में रहने वाले एक व्यक्ति से मिली
और पाक पहुंच कर एक पाक नागरिक नकाह कर लिया और अपना धर्म भी बदल लिया।
इस मामले के चलते एसजीपीसी के अक्स को काफी ठेस पहुंची और भारतीय सुरक्षा
एजेंसियों ने भी इस को गंभीरता से लेते हुए इस की तय तक जांच की।
एसजीपीसी की जांच कमेटी ने लोगोंवाल की हिदायतों के अनुसार 20 दिनों में
अपनी रिपोर्ट सौंपनी थी। परंतु कथित राजनीतिक दबाव के चलते यह जांच
रिपोर्ट जांच कमेटी ने अढाई माह के बाद सौंपी। अभी भी इस रिपोर्ट को
एसजीपीसी की ओर से न तो सर्व जनक किया गया है और न ही किसी आरेापी के
खिलाफ कोई कार्रवाई की गई। मामला देश की सुरक्षा के साथ जुडा होने के
कारण सरकारी सुरक्षा व गुप्तचर एजेसियां इस मामले में एसजीपीसी की जांच
रिपोर्ट का इंतजार कर रही है ताकि इस के बाद ही आरोपियों के खिलाफ कोई
कार्रवाई सरकारी तौर पर की जाए । परंतु एसजीपीसी भी इस मामले की गंभीरता
को समझती है। जिस के चलते इस रिपोर्ट को दबा कर रखा गया है और किसी के भी
खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही। वहीं चर्चा है कि अकाली दल के शीर्षक
नेतृत्व के दबाव के चलते इस मामले में आरोपियों को बचाने की कोशिश हो रही
है ताकि अगर आरोपियों के नामों का खुलासा हो गया तो अकाली दल के रजनीतिक
विरोधियों के हाथ में कोई ऐसा सबूत न लग जाए तो आने वाले समय में अकाली
दल के लिए कोई बडी राजनीतिक मुश्किल पैदा हो जाए। क्यों कि अकाली दल नहीं
चाहता के इस रिपोर्ट का मुद्दा  कहीं आने वाले एसजीपीसी और लोक सभा
चुनावों के लिए अकाली दल के लिए कोई मुसीबत बन जाए।
लोगोंवाल की ओर से बनाई गई जांच कमेटी मामले की जांच के बाद जांच रिपोर्ट
को अंतिम रूप देकर इस रिपोर्ट को एसजीपीसी के अध्यक्ष के पास सौंप चुकी
है। परंतु लोगोंवाल के कार्यालय की ओर से इस को दबा कर रखा गया है।

जांच कमेटी की ओर से इस मामले पर भी गहराई से विचार किया गया था कि श्री
हरिमंदिर साहिब के पूर्व मैनेजर सुलखन सिंह भंगाली की ओर से किरण बाला को
जत्थे के साथ भेजने के लिए जो सिफारिश एसजीपीसी के यात्रा विभाग को लिखित
रूप में की थी उसके पीछे क्या कारण थे। भंगाली की ओर से किरण बाला को
जत्थे के साथ भेजने के लिए सिफारिश पत्र पर लिखा था कि किरण बाला को
जत्थे के साथ भेजने के लिए पूर्व अकाली मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया के
राजनीतिक सचिव तलबीर सिंह गिल ने सिफारिश की है। परंतु जब यह चिट्ठी
मीडिया में वायरल हो गई थी तो तलबीर सिंह गिल अपनी की गई सिफारिश से पीछे
हट गए थे और उन्होंने एलान कर दिया था कि किरण बाला को जत्थे के साथ पाक
भेजने में उनका कोई रोल नहीं है इस के​ लिए पूरी तरह सुलखन सिंह भंगाली
ही जिम्मेवार है।
एसजीपीसी के अध्यक्ष गोबिंद सिंह लोगोवाल ने 25 अप्रैल 2018 को आदेश जारी
करते हुए एक जाच कमेटी बनाई थी।  एसजीपीसी के गलियारे में चर्चा यह भी
रही थी के जांच कमेटी कथित राजनीतिक दबाव के चलते अपनों को बचाने में लगी
हुई है। इस मुद्दे को लेकर अगल अलग सिख संगठनों की ओर से एसजीपीसी की
कार्यप्रणाली और जांच कमेटी की जांच विधियों पर भी उंगल उठाई गई थी। जांच
कमेटी के सदस्य रविंदर
सिंह चक्क  का कहना था कि रिपोर्ट एसजीपीसी के उच्च अधिकारियों को सौंपी
जा चुकी है।   सुरक्षा एजेंसियों ने अपने तौर पर इस मामले में एसजीपीसी
के कई अधिकारियों की मोबाइल कालों की जांच की है। जिन से कई सुराग इस
ममले में सामने आए थे।  एसजीपीसी के अध्यक्ष गोबिंद सिंह लोंगावाल का
कहना है कि किरण बाला मामले में किसी भी आरोपी को बख्शा नही जाएगा। अभी
तक उनके पास मुकम्मल जांच रिपोर्ट नहीं पहुंची है। उधर लोंगोवाल के निजी
सचिव व अमृतसर के उनके कार्यालय के प्रभारी जगजीत सिंह जग्गी कहते है कि
जांच रिपोर्ट तो पहुंची है। परंतु अभी अधूरी जांच रिपोर्ट ही पहुंची है।
पूरी रिपोर्ट पहुुंचने पर ही आगे के संबंध में कुछ कहा जा सकता है।

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