शुक्रवार, 27 जुलाई 2018

फर्जी कंस्ट्रक्शन फर्म बना कर लाखों का गबन करने वाले डा नवजोत कौर सिद्धू के कथित पीए की जांच हुई शुरू : मन्ना

————— प्रेस नोट ——————

फर्जी कंस्ट्रक्शन फर्म बना कर लाखों का गबन करने वाले डा नवजोत कौर सिद्धू के कथित पीए की जांच हुई शुरू : मन्ना 
— पंजाब सरकार के संसदीय काज शाखा ने शुरू की घोटाले की जांच 
— जांच के लिए शाखा ने मन्ना से मांगा हलफिया ब्यान
— मन्ना ने हलफिया ब्यान के साथ अन्य संबंधित दस्तावेज भी सौंपा जांच शाखा को 
अमृतसर , 23 जुलाई 
पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व सचिव व प्रवक्ता मनदीप सिंह मन्ना ने कहा कि पंजाब सरकार की ओर से पूर्व संसदीय सचिव डा नवजोत कौर सिद्धू के कथित पीए गरीश कुमार की ओर से फर्जी फर्म बना कर कंट्रेक्ट ले लाखों रूपये के सरकारी पैसे के गबन के मामले की जांच शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री पंजाब कैप्टन अमरिंदर सिंह के आदेशों पर यह जांच शुरू हुई है। पंजाब सरकार के संसदीय काज विभाग की ओर से यह जांच शुरू की है। जांच शुरू करने के साथ ही विभाग ने इस मामले को लेकर उनसे हलफिया ब्यान भी ले लिया है। जिस हलफिया ब्यान को मन्ना ने पंजाब के मुख्यमंत्री समेत पंजाब सरकार के संसदीय विभाग की काज शाखा को भी सौंप दिया है। डा नवजोत कौर के पीए गरीश कुमार की ओर से एक फर्जी फर्म जी एंड जी बना कर नगर सुधार ट्रस्ट से ठेके लेते हुए 30 लाख 57 हजार का गबन किया था। इस गबन का सबूतों समेत मनदीप सिंह मन्ना की ओर से मीडिया के समक्ष खुलासा ​किया  गया था। मामले का खुलासा करने के बाद मन्ना ने सारे घोटाले के  साथ संबंधित दस्तावेज व पर्याप्त सबूत जांच के लिए पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह सौंपे थे। मुख्यमंत्री के आदेशों के बाद अब इस मामले कीइ जांच शुरू हो गई है।
मामले के संबंध में मीडिया के समक्ष खुलासा करते हुए मन्ना ने बताया कि पंजाब सरकार के ससंदीय ​काज विभाग ने इस घोटाले की जांच संबंधी एक पत्र नंबर 4—पीए —123 तिथि 15 जून 20 18 भेज कर कहा था कि अपन की शिकायत पर जांच शुरू की जा रही है। इस लिए आप इस घोटाले के मामले संबंधी अपना हलफिया ब्यान विभाग के पास जमा करवाएं।
इस पत्र के प्राप्त होने के बाद मन्ना ने अपना हलफिया ब्यान विभाग को सौंप दिया है।
मन्ना ने इस घोटाले की जांच के लिए भेजे गए हलफिया ब्यान और विभाग की ओर से ओर मांगे गए हलफिया ब्यान की प्रतियां दिखाते हुए कहा कि उनकी ओर से यह घोटाला निकाला था कि किस ढंग से डा नवजोत कौर सिद्धू और उसके कथित पीए की ओर से एक फर्जी फर्म बना कर नगर सुधार ट्रस्ट से ठेका लिया और सरकारी  पैसा दोनों ​ने मिल कर हजम कर लिया।
मन्ना ने बताया कि उनको स्थानीय निकाय विभाग से हासिल हुए विभिन्न दस्तावेजों से पता चला कि गरीश कुमार ने एक बडा घोटला फर्जी कंस्ट्रक्शन फर्म बना कर किया है। गरीश जो कि डा नवजोत कौर ​सिद्धू का कथित पीए है ने नवजोत कौर के साथ मिल कर एक फर्जी कंस्ट्रक्शन कंपनी बनाई। इस कंपनी के नाम पर दोनो ने मिल कर 30 लाख 57 हजार रूपये का ठेका लिया। नवजोत कौर वर्श 2012 में अमृतसर पूर्वी से विधायक बनती है। इसी दौरान यह पीए जो पहले कभी न तो ठेकेदार था और नही उसे कभी इस काम का कोई तजुर्बा था। इस पीए ने जी एंड जी नाम की फर्म बनाई। नवजोत कौर सिद्धू की सिफारिश पर इस फर्म को नगर सुधार ट्रस्ट में रजिस्टर भी धोखा धडी के तहत करवा लिया। गरीश कुमार ने 18 सितंबर 2013 को एक पत्र लिखा कि उसकी फर्म को नगर सुधार ट्रस्ट में रजिस्टर किया जाए। दस्तावेजों के अनुसार इस फर्म को नवजोत कौर सिद्धू के जुबानी आदेशों पर एक ही दिन में  बिना किसी तरह की अल्य जांच किए विभाग में रजिस्टर कर दिया गया। एक ही दिन में जेई से लेकर चेयरमैन तक इस फर्म को रजिस्ट्र करने की स्वीकृति दे देते है। सामने आता है कि 15 अक्टूबर 2013 को पूर्वी विधान सभा इलाके की सडकों ,नालियों ओर पार्कों की रिपेयर के काम का टेंडर खोला जाता है। काम के ठेके की स्वीकृति 17 जुलाई 2013 को होती है। इस के बाद यह पीए फर्म बनाता है। नगर सुधार ट्रस्ट के अधिकारी इस पीए की फर्म को 30 लाख 75 हजार का ठेके दे देते है। बाद में डा सिद्धू एक पत्र लिख कर वार्ड नंबर 21 के विकास काम बदल देती है। यह बदले हुए काम भी जी एंड जी फर्म को दे दिए जाते है। अधिकारी इस फर्म को बिना काम चैक किए इस काम के सारे पैसों का भुगात फर्म को कर देते है। इस फर्जी फर्म का एक अकाउंट नंबर 804022100006289 ग्रामीण विकास बैंक शिवाला बाग भाईयां बांच में खोला जाता है और इस खाते मे पैसे ट्रांसफर होते है। फर्म नगर सुधार ट्रस्ट में रजिस्टर करवाने के वक्त कहा जाता है कि यह फर्म पहले ही पुड्डा में बी श्रेणी के तहत रजिस्टर है। परंतु नगर सुधार ट्रस्ट के अधिकारी इसकी जांच नहीं करते। आरटीआई से पुड्डा का जवाब ​मिलता है कि इस नाम की कोई भी फर्म पुड्डा में न तो रजिस्टर है और न ही कभी रजिस्टर थी। कितनी हैरानी की बात है कि नगर सुधार ट्रस्ट के ​अधिकारी एक ही दिर 18 सिंतबर 2013 को फर्म रजिस्टर करने की स्वीकृति देते हुए आदेश करते है कि फर्म की रजिस्ट्रेशन फीस 19 सितंबर को जमा करवाई जाए। दस्तावेजों से सामने आयाकि फर्म रजिसर्टेशन के आदेशों से पहले ही फर्म रजिस्ट्रेशन की फीस 30 अगस्तर 2013 को ही नगर सुधार ट्रस्ट के खाते में जमा करवाई होती है। जो इस में हुए घोटाले को साबित करता है। डा सिद्धू जनवरी 2016 को एक पत्र नंबर सीपीएस 866  विभाग को लिख कर हिदायत देती है कि जी एंड जी फर्म के टैंडर जिनता लैस है उसकी सेविंग को इस्ट मोहन नगर के पार्क पर लगा दिया जाए। जबकि पत्र ट्रस्ट में फरवरी माह में डायरी होता है।  यह पत्र डा सिद्ध इस लिए लिखती है कि इस  फर्म ने जो भी गबन किया है। उस पैसे की किसी तरह एडजस्टमेंट की जाए। मन्ना ने कहा कि उन्होंने सारे दस्तावेत सरकार को सौंप दिए है। अगर और भी कोई दस्तावेज जांच के दौरान चाहिए होता को वह सरकार को उपलब्ध करवाएंगे। उन्होंने आशा प्रगट करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह इस मामले की निष्पक्ष जांच करवाएंगे और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करेंगे।
— जारी कर्ता
मनदीप सिंह मन्ना
 पूर्व सचिव व प्रवक्ता 
पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी

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