— मामले संबंधी धन्यावाद प्रस्ताव को रिव्यू करने के लिए बीबी किरणजोत
कौर ने लिखा एसजीपीसी के अध्यक्ष को पत्र
— कहा लंगर मुफ्त भोजन श्रेणी का हिस्सा नही है
पंकज शर्मा , अमृतसर
केंद्र सरकार की ओर से धार्मिक स्थानों के लंगर सामग्री पर जीएसटी की छूट
सेवा भोज योजना के तहत दिए जाने को लेकर सिखों के अंदर नई बहस शुरू हो गई
है। यह योजना के तहत एसजीपीसी को दर्पण पोर्टल में रजिस्टर न करने के
लिए आवाज उठनी शुरू हो गई है। केंद्र सरकार की ओर से लंगर सामग्री से
जीएसटी हटाने जाने को लेकर एसजीपीसी की कार्याकारिणी की ओर से पास किए गए
धन्यवाद प्रस्ताव को दोबारा रिव्यू करने की मांग उठ गई। कहा गया कि इस
संबंधी चर्चा करने के लिए जरनल हाउस की बैठक बुलाई जाए। इस को लेकर
एसजीपीसी की सदस्य बीबी किरणजोत कौर ने एक पत्र एसजीपीसी के अध्यक्ष को
लिखा है।
उधर श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ने भी कहा कि उन्होंने इस लिए
जीएसटी को माफ करने का धन्यावाद किया था कि उनको मीडिया के लोगों ने
बताया था कि लंगर सामग्री से पूरी तरह जीएसटी हटा दिया गया हैैै। परंतु
अब सामने आया है कि जीएसटी के माफी के पीछे नोटिफिकेशन की मदें कुछ अलग
ही है।
बीबी किरणजोत कौर की ओर से गोबिंद सिंह लोंगोवाल का भेजे पत्र में कहा कि
एसजीपीसी को केंद्र सरकार की ओर से श्री हरिमंदिर साहिब के लंगर को सेवा
भोज योजना के तहत छूट नही लेनी चाहिए। क्यों कि जीएसटी की सीधे छूट मिलने
की जगह एसजीपीसी को इस सुविधा के लिए पहले दर्पण पोर्टल में पंजीकरण करना
होगा। फिर हर सामग्री के संबंध में सारा ब्यौरा सरकार को भेजना होगा।
सरकार की एजेसियां इस की जांच करेंगी और बाद में इस का लाभ लेने के लिए
पर्याटन व कलचर विभाग से सहायता लेनी होगी। केंद्र सरकार लंगर आदि के
लिए अनुदान देगी। अगर एसजीपीसी अनुदान केंद्र सरकार से लेती है तो यह
गुरू परंपरा के खिलाफ होगा। क्यों के गुरू साहिब ने लंगर परपंरा पंगत व
संगत के तहत शुरू की थी। लंगर मुफत भोजन नहीं है। बल्कि संगत की ओर से इस
के लिए अपनी समर्था के अनुसार दान देते है। संगत लंगर शकती है और इस के
लिए सेवा भी देती है। जीएसटी के तहत तो छूट मिल रही है वह गुरू लंगर
पंरपरा के खिलाफ है क्यों कि गुरूघरों का लंगर को मुफ्त भोजना नहीं कहा
जा सकता। मामला अति गंभीर है। एक तो धन्यावाद प्रस्ताव वापिस लिया जाना
चाहिए वहीं इस के लिए जनरल हाउस की बैठक भी बुलाई जानी चाहिए। अगर सरकार
के नोटिफिकेशन के अनुसार अनुदान लिया जाता है तो इस के लिए अनुदान में
मिली सारी रााशि का रिकार्ड भी रखना होगा। और इस के एक एक पैसे का हिसाब
सरकार को देना होगा। वहीं यह योजना सिर्फ वर्ष 2018—19 और 2019—20 के ही
लिए है। इस के बाद क्या होगा। किसी को कोई पता नहीं है। दूसरी ओर इस
मुद्दे पर एसजीपीसी के अध्यक्ष गोबिंद सिंह लोगोवाल ने भी अभी कुछ कहने
पर चुप्पी धारण की हुई है।
कौर ने लिखा एसजीपीसी के अध्यक्ष को पत्र
— कहा लंगर मुफ्त भोजन श्रेणी का हिस्सा नही है
पंकज शर्मा , अमृतसर
केंद्र सरकार की ओर से धार्मिक स्थानों के लंगर सामग्री पर जीएसटी की छूट
सेवा भोज योजना के तहत दिए जाने को लेकर सिखों के अंदर नई बहस शुरू हो गई
है। यह योजना के तहत एसजीपीसी को दर्पण पोर्टल में रजिस्टर न करने के
लिए आवाज उठनी शुरू हो गई है। केंद्र सरकार की ओर से लंगर सामग्री से
जीएसटी हटाने जाने को लेकर एसजीपीसी की कार्याकारिणी की ओर से पास किए गए
धन्यवाद प्रस्ताव को दोबारा रिव्यू करने की मांग उठ गई। कहा गया कि इस
संबंधी चर्चा करने के लिए जरनल हाउस की बैठक बुलाई जाए। इस को लेकर
एसजीपीसी की सदस्य बीबी किरणजोत कौर ने एक पत्र एसजीपीसी के अध्यक्ष को
लिखा है।
उधर श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ने भी कहा कि उन्होंने इस लिए
जीएसटी को माफ करने का धन्यावाद किया था कि उनको मीडिया के लोगों ने
बताया था कि लंगर सामग्री से पूरी तरह जीएसटी हटा दिया गया हैैै। परंतु
अब सामने आया है कि जीएसटी के माफी के पीछे नोटिफिकेशन की मदें कुछ अलग
ही है।
बीबी किरणजोत कौर की ओर से गोबिंद सिंह लोंगोवाल का भेजे पत्र में कहा कि
एसजीपीसी को केंद्र सरकार की ओर से श्री हरिमंदिर साहिब के लंगर को सेवा
भोज योजना के तहत छूट नही लेनी चाहिए। क्यों कि जीएसटी की सीधे छूट मिलने
की जगह एसजीपीसी को इस सुविधा के लिए पहले दर्पण पोर्टल में पंजीकरण करना
होगा। फिर हर सामग्री के संबंध में सारा ब्यौरा सरकार को भेजना होगा।
सरकार की एजेसियां इस की जांच करेंगी और बाद में इस का लाभ लेने के लिए
पर्याटन व कलचर विभाग से सहायता लेनी होगी। केंद्र सरकार लंगर आदि के
लिए अनुदान देगी। अगर एसजीपीसी अनुदान केंद्र सरकार से लेती है तो यह
गुरू परंपरा के खिलाफ होगा। क्यों के गुरू साहिब ने लंगर परपंरा पंगत व
संगत के तहत शुरू की थी। लंगर मुफत भोजन नहीं है। बल्कि संगत की ओर से इस
के लिए अपनी समर्था के अनुसार दान देते है। संगत लंगर शकती है और इस के
लिए सेवा भी देती है। जीएसटी के तहत तो छूट मिल रही है वह गुरू लंगर
पंरपरा के खिलाफ है क्यों कि गुरूघरों का लंगर को मुफ्त भोजना नहीं कहा
जा सकता। मामला अति गंभीर है। एक तो धन्यावाद प्रस्ताव वापिस लिया जाना
चाहिए वहीं इस के लिए जनरल हाउस की बैठक भी बुलाई जानी चाहिए। अगर सरकार
के नोटिफिकेशन के अनुसार अनुदान लिया जाता है तो इस के लिए अनुदान में
मिली सारी रााशि का रिकार्ड भी रखना होगा। और इस के एक एक पैसे का हिसाब
सरकार को देना होगा। वहीं यह योजना सिर्फ वर्ष 2018—19 और 2019—20 के ही
लिए है। इस के बाद क्या होगा। किसी को कोई पता नहीं है। दूसरी ओर इस
मुद्दे पर एसजीपीसी के अध्यक्ष गोबिंद सिंह लोगोवाल ने भी अभी कुछ कहने
पर चुप्पी धारण की हुई है।
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