मंगलवार, 3 जुलाई 2018

अमृतसर के बहु करोड़ी बीएसयूपी फ्लेट्स प्रोजेक्ट में क्षेत्र के विधायक के साथ मिल नगर सुधार ट्रस्ट अधिकारिया ने किया 6 करोड़ से अधिक का घोटाला

   ————  प्रेस नोट ———————

अमृतसर के बहु करोड़ी  बीएसयूपी फ्लेट्स प्रोजेक्ट में क्षेत्र के विधायक
के साथ मिल नगर सुधार ट्रस्ट अधिकारिया ने किया 6 करोड़ से अधिक का
घोटाला: मन्न
क्रासर————
— मामले की सीबीआई जांच के लिए घोटाले की सारी फाईल केंद्रीय शहरी विकास
मंत्री हरदीप पुरी को जाएगी सौंपी
— आरोपियों में  ठेका कंपनी में बेनामी हिस्सेदारी वाले कुछ अधिकारी और
नगर सुधार ट्रस्ट  के कई अधिकारी है शांमिल
— निर्धारित मापदंडों को नजर अंदाज करके लगा दिया घटिया मटीरियल फ्लैट्स
निर्माण पर , ​कभी भी गर ​कर बडे हादसे को अंजाम दे सकते के है प्रोजेक्ट
के 464 फ्लैट्स
— कार्रवाई न हुई तो मामला सबूतों के साथ लेकर जाएंगे अदालत में
अमृतसर , 9 जून :
पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व सचिव व प्रवक्ता मनदीप सिंह मन्ना
ने बडा खुलासा करते हुए कहा कि पंजाब सरकार की ओर से केंद्र सरकार से आए
फंड की सहायता से शहरी गरीबों को बढिया घरों की सुविधा देने के लिए न्यू
अमृतसर में बीएसयूपी प्रोजेक्त के तहत 464 रिहाशही फ्लेटों में 6 करोड़
से अधिक का घोटला हुआ है। जबकि यह सारा प्रोजेक्ट 18 करोड़ 46 लाख 25
हजार रूपये का था। वर्ष 2013 में इस प्रोजेक्ट का शुभारंभ क्षेत्र की
तत्कालीन विधायक व मौजूदा स्थानीय निकाय मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू की
पत्नी डा नवजोत कौर ने किया था। इस प्रोजेक्ट में हुए इतने बडे घोटाले
में डा नवजोत कौर सिद्धू, नगर सुधार ट्रस्ट के अधिकारी और फ्लेट बनाने
वाली कंट्रेक्टर कंपनी जिस में एक आईएएस अधिकारी भी साइलेंट पार्टनर है
मुख्य आरोपी है। प्रोजेक्ट में हुए करोड़ों के घोटलो का दस्तावेजों के
साथ मीडिया के समक्ष खुलासा करते हुए मन्ना ने कहा कि इस प्रोजेक्ट के
लिए 60 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार की थी, 20 प्रतिशत राशि पंजाब सरकार और
20 प्रतिशत राशि का हिस्सा नगर सुधार ट्रस्ट का था। प्रोजेक्ट के तहत
शहरों की झूग्गी झोंपडियों में रहने वालों को पक्के घर एक बैडरूप सैट
वाले बना कर देने थे। परंतु अगर इस लोकेशन पर जा कर देखा जाए तो इस
प्रोजेकट के लिए जो निर्माण की शर्तें तय की गई थी उनको ठेकेदारों और
अधिकारियों ने पूरा किए बिना ही अधूरे व सुुविधाओं से रहित फ्लैट तैयार
करके दे दिए ।  कहा जा रहा है कि फलैट्स बनने के बाद यहां से समान चोरी
करे लोग ले गए है। जबकि पुलिस के चौंकी भी इन फलैट्स में बनी हुई है।
मिलीभुगत के चलने नगर निगम के अधिकारियों ने भी ठेकेदारों को सारे काम के
कंप्लीशन सर्टीफिकेट भी जारी कर दिए। फ्लैटस की हाल ऐसी है कि यह कब गिर
जाए कोई अंजादा ही नहीं है। अधिकारी कथित मिली भुगत के साथ इन फ्लैट्स को
गरीब लोगों को अलाट करना चाहते है परंतु जरूरतमंदों ने इस फ्लैट्स को
लेने से इंकार कर दिया है। मन्ना ने कहा कि वह इस सारे प्रोजेक्ट में हुए
घोटाले की फाइल लेकर केंद्रीय  शहरी विकास मंत्री  हरदीप सिंह पुरी के
पास  लेकर जा रहे है ताकि इस मामले की सीबीआई जांच करवाए जाने के साथ साथ
इस में शामिल सभी दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
इन फ्लैट्स को अलाट करने के लिए पहली किश्त 45 हजार रूपये लेनी थी बाकी
की किश्तें बाद में लेनी थी। दस वर्षों तक इस ​फ्लैट को लेने वाला कोई भी
व्यक्ति बेच नहीं सकता है। मन्ना ने खुलासा करते हुए बताया कि इन बहुत
सारे  फलैट्स में दरवाजे और दरवाजों के कब्जे तक भी नहीं लगाए गए है। न
ही इन में बिजली के सचिव लगे है। यहां सचिव लगे है वहां पाइपों में तारें
ही नहीं लगी हुई है। सीढियां चढ़ने के लिए निर्धारित ग्रिल भी नही लगाई
गई। इस प्रोजेक्ट का टेंडर 16 सितंबर 2013 को जारी हुई। वर्क आर्डर 27
सितंबर 2013 को शुरू हुआ। अभी इस फ्लैट्स का निर्माण चल ही रहा था कि
घटिया मटीरियल का पयोग होने के कारण एक का लेंटर भी गिर चुका है। इस में
पानी के लिए सिनटेक्स की टेंकिया लगाई जानी थी जिनकी जगह पर कोई और व
धटिया मटीरियल की टंकिया लगा दी गई।  इन फ्लैट्स में 51 लाख की वायरिंग
करनी थी जिस में प्लग, सचिव , डोर बैल अस अन्य समान लगाया जाना था। जिस
में कुछ भी नहीं लगाया गया। 45 लाख रूपये की वाटर सप्लाई जीआई पाईप लगानी
थी जो लगाई ही नही गई। 124.41 लाख के दरवाजे लगाए जाने थे। जो अभी तक सभी
को लगाए ही नहीं गए। 58.74 लाख रूपये का स्पेशल मोटाई का प्लस्तर किया
जाना था परंतु वहां सिग्ल प्लस्तर कर दिया गया जो एक कील की चोट मारने से
ही गिर जाता है। बाथरूमों और रसोईयों में कलरफुल गलेज्ड टाईलं 49 लाख
रूपये के करीब लगाई जानी थी जो नर्धारित मापदंडो वाली लगाई हीं नही गई।
फर्शों पर 39.63 लाख रूपये का मार्बल लगाया जाना था जो नहीं लगाया गया।
सिनटेक्स कंपनी की पानी की टैंकियां 16.32 लाख रूपए की लगानी थी। जिस की
जगह सस्ती व किसी अन्य कंपनी की लगा दी गई। इन टेंकियों का क्वाटों की
पानी की पाइपों के साथ कोई कनेक्शन भी नहीं दिया गया। टंकियों के डक्कन
तक नहीं है। बहुत सी टेंकियां फटी हुई है। रसोईयों में स्टेनलैस स्टील के
वाश बेसिन 38.40 लाख रूपये के लगाने थे। बहुत सारों में इनको लगाया ही
नहीं गया। यहा लगाए वह भी घटिया किसम के व लोहे के लगा दिए गए। घरों में
वाश बेसिन 17.58 लाख रूपये के लगाने थे जो बहुत में लगे ही नहीं।मंत्री
शीट मैटल की अर्थिंग प्रत्येक फ्लेट में की जानी थी 3.72 लाख रूपये की
लगाई जानी थी। जो लगाई ही नही गई। बिजली के आटो कट एमसीबी बाक्स 6.96 लाख
रूपये के लगाने थे जो नही लगाए गए। सीढियों की रेलिंग 6.81 लाख रूपये की
लगानी थी। जो लगाई ही नही गई। कहा जा रहा है रे​लिंग चोर उतार कर ले गए
है। देखा जाए तो चोरों को रेलिंग ग्रांउड फ्लोर से उखाडी आसान है यहा फिर
दूसरे व तीसरे फ्लोर से उतारनी आसान है। शौचायलों के बाहर 124.41 लाख
रूपये के दरवाजे लगाए जाने थे। जो 75 प्रतिशत फ्लैट्स में लगे ही नहीं
है। घरों की ​खिडकियां 7 लाख के करीब राशि की लगनी थी जो बहुत फ्लैट्स
में लगी ही नही। फ्लैट्स में एल्यूमिनियम की चुगाठे व स्लाइडिंग बोल्ट
डोर लगाए जाने थे जो करीब 132 लाख रूपये लगने थे जो नहीं लगाए गए है।
मुख्य गेट पर साढे तीन लाख रूपये के करीब की ग्रिल लगनी थी जो नही लगाई
गई। तीन कोट वाली कली क्वाटरों के अंदर 4.96 लाख रूपये की करनी थी जो
सिर्फ एक कोट ही कर दिया गया। बाहरी दीवारों पर पेंट 15.3 लाख रूपये का
करना था जिस की जगह पर सिंगल कोट कली कर दी गई। लोगों की ग्रिलों व
सीढियां की रेलिंग पर स्टील प्राइमर 3.69 लाख रूपये का करना था जो किया
ही नही गया। लकडी के दरवाजों पर एनेमिल पेंट 6.63 लाख रूपये का करना था
जो किया ही नहीं गया। कमरों में फर्शों के साथ स्केट्रिंग 6.51 लाख रूपये
की लगाई जानी थी।जो लगाई ही नहीं गई।  शौचालयों में शीटें 20.64 लाख
रूपये की लगाई जानी थी जो धटिया क्वालिटीइ की और निर्धारित से कम मापदंडो
वाली लगा दी गई। इन में फलोरिंग टाईलस 15.87 लाख रूपये की लगाई जानी थी
जो लगाई ही नहीं गई। यहां लगाई वह भी ​मापदंडों पर खरी नहीं उतरती है।
दरवाजों पर पेंट 7.05 लाख रूपये का किया जाना था जो किया ही नहीं गया। इस
फ्लैट्स पर  3.186 लाख रूपये का सरिया डाला जाना था। जो कम डाल दिया गया।
जिस से कुछ फ्लेट्स की छतें बनाते समय ही गिर गई थी। हैरानी की बात यह है
कि पंखों के प्लावंट ही नहीं है।यहा तक के घरों में पंखों के रेगुलेटर भी
नहीं लगाए गए। फ्लैट्स के सनशेडों की हालत ऐसी है कोई भी व्यकित अगर जोर
से नीचे को दबाए तो उसी समय यह सनशेड नीचे गिर जाते है।  सब से बडी बात
यह है कि सरकार की तो एमबी जिसे मइयरमेंट बुक कहते है जो एक सिक्रेट होती
है ओर उसे सिर्फ विभाग के इंजीनियार ने ही भरना होता है वह ​एमबी भी
विभाग का इंजीनियार नही बल्कि ठेकेदार का एक करिंदा ही भरता रहा है।
उन्होंने कहा कि इतना बडा घोटला क्षेत्र के तत्कालीन विधायक की मर्जी के
बिना नही हो सकता । जिस की जाच होने जरूरी है। उन्होंने कहा कि वह यह भी
मांग केंद्रीय मंत्री के पास उठाएंगे कि इस घोटाले की जांच से पहले इस
प्रोजेक्ट के शामिल रहे सभी अधिकारियों पर पहले पदों से हटाए व बाद में
जांच करें। क्यों के यह मामला पूरी तरह वित्तीय अपराध घोटाले में आता है
जिस में आरोपियों को कारावास के साथ साथ उनकी चल व अ​चल संपत्ति जबत किए
जाने का भी कानूनी प्रावधान है। इस मामले को लेकर उनकी ओर से नगर सुधार
ट्रस्ट के अधिकारियों को एक लिखित शिकायत भी दी थी कि इन पूरी तरह
कंप्लीट न हुए फ्लैट्स को लोगों को अलाट न किया जाए। क्यों के यह फ्लैट्स
किसी भी समय गिर सकते है और निर्दोष लोगों की जान माल को बड़ा खतरा
है।बावजूद विभाग के अधिकारी  इन फ्लैट्स को जल्दी से जल्दी लोगों को अलाट
करके इस घोटलें में से अपनी गर्दन को बचाना चाहते है।  परंतु यह किसी भी
कीमत पर होनी नहीं दिया जाएगा। इस में शामिल सभी आरोपियों के खिलाफ वह
अदालत का दरवाजा भी खटखटाएंगे। उन्होंने कहा कि विभाग का दावा है कि बहुत
सारा समान फ्लैटस में से चोरी हो गया। फलैट्स में ही पुलिस की चौंकी हो
और चोर अगर चोरी करके ले भी गए है जो जितना समान चोरी होने का विभाग के
अधिकारी दावा कर रहे है वह समान कम से कम 20 —22 ट्रकों में ही भर को चोर
लेकर जा सकते है। अगर चोर तारे चोरी करके ले गए तो चोर कैसे थे जो पाइपों
में तारें निकाल गए ले गए और जाते समय दोबार सचिव बाक्स बक्सों के साथ
फिक्स करके ले गए।  जब की जानकारी के लिए आस पास की रिहाईशों वालों से
संपर्क किया जो उनका कहना था कि इस तरह की बात उन्होंने कभी भी यहां न तो
देखी और न सुनी। अगर सच में फ्लैट्स का समान चोरी हो गया तो आज तक विभाग
के अधिकारियों ने 6 करोड के चोरी हुए समान की पुलिस रिपोर्ट किसी पुलिस
थाना या किसी पुलिस अधिकारी के पास क्यों दर्ज नहीं करवाई। उन्होंने कहा
कि इस मामलें में ठेका लेने वाली कंपनी चमन लाल एंड संन्स , नगर सुधार
ट्रस्ट के अधिकारी , क्षेत्र की तत्कालीन विधायक डा नवजोत कौर सिद्धू और
कुछ आईएएस अधिकारी भी शामिल है जिनका इस ठेकेदार फर्म में बेनामी
हिस्सेदारियां भी है।
— जारी कर्ता
मनदीप सिंह मन्ना
पूर्व सचिव व प्रवक्ता
पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी

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