— कुल गई 113 औरतों में से किरण बाला नहीं आई थी जत्थे के साथ वापिस
— समय बीत जाने के बाद भी मामलें की जांच कर रही कमेटी नहीं जुटा पाई है
अभी तक सभी तथ्य
— भंगाली के साथ संबंधित अन्य रिकार्ड को भी जा रहा है खंगाला
पंकज शर्मा , अमृतसर
एसजीपीसी की ओर से वैशाखी पर खालसा का स्थापना दिवस मनाने के लिए भेजे गए
जत्थे में किरण बाला समेत 21 अकेली औरते जत्थे के साथ गई थी। इस के तथ्य
भी समाने आ गए है। परंतु किरण बाला पाकिस्तान पहुंच कर जत्थे से अलग हो
गई और उसने पाकिस्तान में रहने वाले एक व्यक्ति के साथ मिल कर निकाह कर
लिया और अपना धर्म भी बदल लिया था। जबकि इस जत्थे के साथ कुल 113 औरतें
एसजीपीसी की ओर से भेजी गई थी। किरण बाला के गायब होने के बाद जांच के
लिए एसजीपीसी के अध्यक्ष गोबिंद सिंह लोंगोवाल ने एक जांच कमेटी बिठाई
थी। इस जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट 20 दिनों के भीतर सौंपनी थी परंतु डेढ
माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद भी जांच कमेटी मामले संबंधी तथ्य
जुटा पाने में अभी तक असफल रही है। हालाकि एसजीपीसी की ओर से विवाद की
गंभीरता और मीडिया में खुल कर सामने आने को मुख्य रख सुलखन सिंह भंगाली
को हरिमंदिर साहिब के मैनेजर पद से हटा कर अन्य पोस्ट पर तैनात कर दिया
है। परंतु कथित राजनीतिक दबाव के चलते जांच कमेटी भी अपनी जांच धीमी गति
से चला रही है।
उल्लेखनीय है कि किरण बाला के पाकिस्तान रह जाने के बाद दस्तावेजी सबूत
सामने आए थे कि हरिमंदिर साहिब के मैनेजर सुलखन सिंह भंगाली ने अकेली
किरण बाला को पाकिस्तान भेजने के लिए वीजा देने की सिफारिश की थी। अपनी
सिफारिश में भंगाली ने उल्लेख किया था कि किरण बाला को पाक जाने के लिए
वीजा देने की सिफारिश पूर्व अकाली मंत्री बिक्रम सिंह मीडिया के राजनीतिक
सलाहकार तलबीर सिंह गिल ने की है। मामले सामने आने के बाद तलबीर सिंह गिल
ने अपनी सिफारिश करने पर इंकार कर दिया था। अब एसजीपीसी के गलियारा में
आवाज उठनी शुरू हो गई है कि भंगाली की ओर से आज तक जो भी सिफारिशें की गई
है उन सभी की जांच होनी चाहिए। ताकि पता चल सके कि भंगाली ने किस किस काम
के लिए किन किन नेताओं की कितनी बाच सिफारिश करके कौन कौन से काम करवाए
है। जिन कामों को नेताओं की सिफारिश करके करवाया गया है उन सब भी जांच हो
ताकि सामने आए जांच कमेटी भी अपनी जांच धीमी गति से चला रही है।
उल्लेखनीय है कि किरण बाला के पाकिस्तान रह जाने के बाद दस्तावेजी सबूत
सामने आए थे कि हरिमंदिर साहिब के मैनेजर सुलखन सिंह भंगाली ने अकेली
किरण बाला को पाकिस्तान भेजने के लिए वीजा देने की सिफारिश की थी। अपनी
सिफारिश में भंगाली ने उल्लेख किया था कि किरण बाला को पाक जाने के लिए
वीजा देने की सिफारिश पूर्व अकाली मंत्री बिक्रम सिंह मीडिया के राजनीतिक
सलाहकार तलबीर सिंह गिल ने की है। मामले सामने आने के बाद तलबीर सिंह गिल
ने अपनी सिफारिश करने पर इंकार कर दिया था। अब एसजीपीसी के गलियारा में
आवाज उठनी शुरू हो गई है कि भंगाली की ओर से आज तक जो भी सिफारिशें की गई
है उन सभी की जांच होनी चाहिए। ताकि पता चल सके कि भंगाली ने किस किस काम
के लिए किन किन नेताओं की कितनी बाच सिफारिश करके कौन कौन से काम करवाए
है। जिन कामों को नेताओं की सिफारिश करके करवाया गया है उन सब भी जांच हो
ताकि सामने आए सके कि किन कामों में सच में सफारिश हुई या फिर झूठा ही
नेताओं के नामों का उपयोग हुआ है।
उधर एसजीपीसी के एक अधिकारी ने अपना नाम गुप्त रखने की शर्त पर बताया कि
सच में ही भंगाली ने पूर्व मंत्री की सिफारिश पर ही किरण बाला को पाक
भेजने की हिदायत यात्रा विभाग को दी थी। पंरतु इस तथ्यों को छुपाने की
कोशिश की जा रही है। जांच कमेटी असल तथ्यों की जांच करने की जगह अब यह
जांच कर रही है कि भंगाली की ओर से सिफारिश किए गए पत्र की काफी लीक होकर
मीडिया और सोशल मीडिया के पास कैसे पहुंच गई थी। उधर इस मामले की जांच
कर रही जांच कमेटी के सदस्य एडवोकेट भगतवंत सिंह सियालका, रविंदर सिंह
चक्क, गुरतेज सिंह, सुरिंदर सिंह भुल्लेवाल और जसविंदर सिंह दीनपुर अभी
तक मामले को हल करने के लिए तथ्यों को जुटा रहे है और भंगाली के साथ
संबंधित अन्य रिकार्ड को भी खंगाल रहे है।
— पंकज शर्मा
— समय बीत जाने के बाद भी मामलें की जांच कर रही कमेटी नहीं जुटा पाई है
अभी तक सभी तथ्य
— भंगाली के साथ संबंधित अन्य रिकार्ड को भी जा रहा है खंगाला
पंकज शर्मा , अमृतसर
एसजीपीसी की ओर से वैशाखी पर खालसा का स्थापना दिवस मनाने के लिए भेजे गए
जत्थे में किरण बाला समेत 21 अकेली औरते जत्थे के साथ गई थी। इस के तथ्य
भी समाने आ गए है। परंतु किरण बाला पाकिस्तान पहुंच कर जत्थे से अलग हो
गई और उसने पाकिस्तान में रहने वाले एक व्यक्ति के साथ मिल कर निकाह कर
लिया और अपना धर्म भी बदल लिया था। जबकि इस जत्थे के साथ कुल 113 औरतें
एसजीपीसी की ओर से भेजी गई थी। किरण बाला के गायब होने के बाद जांच के
लिए एसजीपीसी के अध्यक्ष गोबिंद सिंह लोंगोवाल ने एक जांच कमेटी बिठाई
थी। इस जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट 20 दिनों के भीतर सौंपनी थी परंतु डेढ
माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद भी जांच कमेटी मामले संबंधी तथ्य
जुटा पाने में अभी तक असफल रही है। हालाकि एसजीपीसी की ओर से विवाद की
गंभीरता और मीडिया में खुल कर सामने आने को मुख्य रख सुलखन सिंह भंगाली
को हरिमंदिर साहिब के मैनेजर पद से हटा कर अन्य पोस्ट पर तैनात कर दिया
है। परंतु कथित राजनीतिक दबाव के चलते जांच कमेटी भी अपनी जांच धीमी गति
से चला रही है।
उल्लेखनीय है कि किरण बाला के पाकिस्तान रह जाने के बाद दस्तावेजी सबूत
सामने आए थे कि हरिमंदिर साहिब के मैनेजर सुलखन सिंह भंगाली ने अकेली
किरण बाला को पाकिस्तान भेजने के लिए वीजा देने की सिफारिश की थी। अपनी
सिफारिश में भंगाली ने उल्लेख किया था कि किरण बाला को पाक जाने के लिए
वीजा देने की सिफारिश पूर्व अकाली मंत्री बिक्रम सिंह मीडिया के राजनीतिक
सलाहकार तलबीर सिंह गिल ने की है। मामले सामने आने के बाद तलबीर सिंह गिल
ने अपनी सिफारिश करने पर इंकार कर दिया था। अब एसजीपीसी के गलियारा में
आवाज उठनी शुरू हो गई है कि भंगाली की ओर से आज तक जो भी सिफारिशें की गई
है उन सभी की जांच होनी चाहिए। ताकि पता चल सके कि भंगाली ने किस किस काम
के लिए किन किन नेताओं की कितनी बाच सिफारिश करके कौन कौन से काम करवाए
है। जिन कामों को नेताओं की सिफारिश करके करवाया गया है उन सब भी जांच हो
ताकि सामने आए जांच कमेटी भी अपनी जांच धीमी गति से चला रही है।
उल्लेखनीय है कि किरण बाला के पाकिस्तान रह जाने के बाद दस्तावेजी सबूत
सामने आए थे कि हरिमंदिर साहिब के मैनेजर सुलखन सिंह भंगाली ने अकेली
किरण बाला को पाकिस्तान भेजने के लिए वीजा देने की सिफारिश की थी। अपनी
सिफारिश में भंगाली ने उल्लेख किया था कि किरण बाला को पाक जाने के लिए
वीजा देने की सिफारिश पूर्व अकाली मंत्री बिक्रम सिंह मीडिया के राजनीतिक
सलाहकार तलबीर सिंह गिल ने की है। मामले सामने आने के बाद तलबीर सिंह गिल
ने अपनी सिफारिश करने पर इंकार कर दिया था। अब एसजीपीसी के गलियारा में
आवाज उठनी शुरू हो गई है कि भंगाली की ओर से आज तक जो भी सिफारिशें की गई
है उन सभी की जांच होनी चाहिए। ताकि पता चल सके कि भंगाली ने किस किस काम
के लिए किन किन नेताओं की कितनी बाच सिफारिश करके कौन कौन से काम करवाए
है। जिन कामों को नेताओं की सिफारिश करके करवाया गया है उन सब भी जांच हो
ताकि सामने आए सके कि किन कामों में सच में सफारिश हुई या फिर झूठा ही
नेताओं के नामों का उपयोग हुआ है।
उधर एसजीपीसी के एक अधिकारी ने अपना नाम गुप्त रखने की शर्त पर बताया कि
सच में ही भंगाली ने पूर्व मंत्री की सिफारिश पर ही किरण बाला को पाक
भेजने की हिदायत यात्रा विभाग को दी थी। पंरतु इस तथ्यों को छुपाने की
कोशिश की जा रही है। जांच कमेटी असल तथ्यों की जांच करने की जगह अब यह
जांच कर रही है कि भंगाली की ओर से सिफारिश किए गए पत्र की काफी लीक होकर
मीडिया और सोशल मीडिया के पास कैसे पहुंच गई थी। उधर इस मामले की जांच
कर रही जांच कमेटी के सदस्य एडवोकेट भगतवंत सिंह सियालका, रविंदर सिंह
चक्क, गुरतेज सिंह, सुरिंदर सिंह भुल्लेवाल और जसविंदर सिंह दीनपुर अभी
तक मामले को हल करने के लिए तथ्यों को जुटा रहे है और भंगाली के साथ
संबंधित अन्य रिकार्ड को भी खंगाल रहे है।
— पंकज शर्मा
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