— मामले को लेकर अदालत करेगी अलगी सुनवाई 26 अक्टूबर को
— गुरु नानक देव विश्वविद्यालय ने अध्यापकों की विभिन्न पोस्टे एडहाड
सिस्टम के तहत भर्ती करने के लिए विज्ञापन देकर ले ली भी इंटरव्यू भी
, अमृतसर
गुरु नानक देव विश्वविद्यालय की ओर से जून माह के अंतिम सप्ताह दौरान 446
एडहाक अध्यापकों की भर्ती के लिए की गई इंटरव्यू के बाद नियुक्तियां देने
के लिए हाई कोर्ट ने रोक लगा दी है। इस संबंधी सोमवार को अदालत ने एक
आदेश जारी कर दिए है। आदेश मंगलवार को विश्वविद्यालय के अधिकारियों को
मिल जाएंगे। जबकि अदालत की ओर से इस संबंधी पटीशन दायर करने वाले
प्रार्थियों को आदेशों की कापी सौंप दी है। अदालत ने आदेश दिए है कि
जीएनडीयू की ओर से अलग अलग विभागों और विश्वविद्यालय के साथ संबंधित
कालेजों में एडहाक कर्मचारी भर्ती करने के लिए जो इंटरव्यू ली है उस पर
कोई भी कर्म चारी एडहाक पर भर्ती नहीं किया जाएगा। अगले हुक्मों तक इस
पोस्टों पर पहले से ही काम करते हुए कर्मचारी काम करते रहेंगे। अगर
विश्वविद्यालय इस पोस्टों को अगर भरना चाहती है तो पोस्टों पर रेगुलर
भर्ती की जाएगी। एडहाक पर यह भर्ती विश्वविद्यालय नहीं कर सकेगी।
जीएनडीयू ने इस दौरान विश्वविद्यालय की 15 पोस्टों के लिए भी इंटरव्यू
करके कई उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र भी सौंप दिए थे। अब अदालत इस मामले
को लेकर एक अलग दायर रिट पटीशन पर पांच जुलाई को सुनवाई करते हुए आदेश
जारी करेगी।
पंजाब व हरियाणा हाई कोर्ट के जस्टिस माननीय जतिंदर चौहान की अदालत ने यह
फैसला सिविल रिट पटीशन नंबर सीडबल्यू पी —15712 —2018 जो कि ओ प्रकाश
पंकज बनाम गुरु नानक देव विश्वविद्यालय की सुनवाई के दौरान सोमवार देर
शाम को जारी किया है। फैसला अदालत ने सुप्रीम कोर्ट की एक रिट पटीशन
हरगुरप्रताप सिंह बनाम स्टेट आफ पंजाब वर्ष 2007 और रतन लाल बनाम स्टेट
आफ हरियाण एंड अदर्स ज वर्ष 1985 को आधार बना कर जारी किया है। अदालत ने
जीएनडीयू की ओर से उक्त पोस्टों की भर्ती के लिए जारी किए विज्ञापन और उस
भी हुई सभी तरह की इंटरव्यू आदि कार्रवाई पर भी रोक लगा दी है। अदालत ने
अब इस मामले की अगली सुनवाई 26 अक्टूबर तय कर दी है। तब तक विश्वविद्यालय
इन पोस्टों पर कोई भी नियुक्ति नहीं कर सकती है।
उधर जीएनडीयू एडहाक टीर्चस यूनियन के अध्यक्ष डा गुरप्रीत सिंह और
उपाध्यक्ष विशाल शर्मा ने पंजाब व हरियाण हाई कोर्ट के इस फैसला का
जोरदार स्वागत किया है। कहा कि इस फैसले से जीएनडीयू के अधिकारियों की ओर
से अपने चहेतों को अलग अलग पोस्टों पर नियुक्त करने के चोर रास्ते अपनाने
की कार्रवाई पर विराम लगेगा। यह फैसला मेहनतकश कर्मचारियों के पक्ष वाला
है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय इन केसों पर 400 के करीब केवट दायर कर
चुकी है। जिस का खर्च विश्वविद्यालय कहां और किस बजट से कर रही है इस की
जानकारी आम जनता लेना चाहती है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय इस मामले
में एलपीए भी दायर करने की सोच रही है जिस की भी जांच होनी चाहिए कि
विश्वविद्यालय के अधिकारी अनावश्यक पैसे कोर्ट केसों पर खर्च कर रही है।
सरकार को चाहिए कि यह बरबाद किया जा रहा पैसा विश्वविद्यालय के
अधिकारियों के वेतनों से रिक्वर किया जाए। उधर विश्वविद्यालय में हुई
अध्यपके भर्ती के मामले को लेकर आवाज उठा रहे नेशनल पीपल्स फ्रंट के
अध्यक्ष एडवोकेट गगन दीप भाटिया और महासचिव राजविंदर राजा ने कहा कि
हाईकोर्ट का फैसला कर्मचारियों के पक्ष वाला और विश्वविद्यालय के
अधिकारियों की धक्काशाही पर अंकुश लगाने वाला है।
— गुरु नानक देव विश्वविद्यालय ने अध्यापकों की विभिन्न पोस्टे एडहाड
सिस्टम के तहत भर्ती करने के लिए विज्ञापन देकर ले ली भी इंटरव्यू भी
, अमृतसर
गुरु नानक देव विश्वविद्यालय की ओर से जून माह के अंतिम सप्ताह दौरान 446
एडहाक अध्यापकों की भर्ती के लिए की गई इंटरव्यू के बाद नियुक्तियां देने
के लिए हाई कोर्ट ने रोक लगा दी है। इस संबंधी सोमवार को अदालत ने एक
आदेश जारी कर दिए है। आदेश मंगलवार को विश्वविद्यालय के अधिकारियों को
मिल जाएंगे। जबकि अदालत की ओर से इस संबंधी पटीशन दायर करने वाले
प्रार्थियों को आदेशों की कापी सौंप दी है। अदालत ने आदेश दिए है कि
जीएनडीयू की ओर से अलग अलग विभागों और विश्वविद्यालय के साथ संबंधित
कालेजों में एडहाक कर्मचारी भर्ती करने के लिए जो इंटरव्यू ली है उस पर
कोई भी कर्म चारी एडहाक पर भर्ती नहीं किया जाएगा। अगले हुक्मों तक इस
पोस्टों पर पहले से ही काम करते हुए कर्मचारी काम करते रहेंगे। अगर
विश्वविद्यालय इस पोस्टों को अगर भरना चाहती है तो पोस्टों पर रेगुलर
भर्ती की जाएगी। एडहाक पर यह भर्ती विश्वविद्यालय नहीं कर सकेगी।
जीएनडीयू ने इस दौरान विश्वविद्यालय की 15 पोस्टों के लिए भी इंटरव्यू
करके कई उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र भी सौंप दिए थे। अब अदालत इस मामले
को लेकर एक अलग दायर रिट पटीशन पर पांच जुलाई को सुनवाई करते हुए आदेश
जारी करेगी।
पंजाब व हरियाणा हाई कोर्ट के जस्टिस माननीय जतिंदर चौहान की अदालत ने यह
फैसला सिविल रिट पटीशन नंबर सीडबल्यू पी —15712 —2018 जो कि ओ प्रकाश
पंकज बनाम गुरु नानक देव विश्वविद्यालय की सुनवाई के दौरान सोमवार देर
शाम को जारी किया है। फैसला अदालत ने सुप्रीम कोर्ट की एक रिट पटीशन
हरगुरप्रताप सिंह बनाम स्टेट आफ पंजाब वर्ष 2007 और रतन लाल बनाम स्टेट
आफ हरियाण एंड अदर्स ज वर्ष 1985 को आधार बना कर जारी किया है। अदालत ने
जीएनडीयू की ओर से उक्त पोस्टों की भर्ती के लिए जारी किए विज्ञापन और उस
भी हुई सभी तरह की इंटरव्यू आदि कार्रवाई पर भी रोक लगा दी है। अदालत ने
अब इस मामले की अगली सुनवाई 26 अक्टूबर तय कर दी है। तब तक विश्वविद्यालय
इन पोस्टों पर कोई भी नियुक्ति नहीं कर सकती है।
उधर जीएनडीयू एडहाक टीर्चस यूनियन के अध्यक्ष डा गुरप्रीत सिंह और
उपाध्यक्ष विशाल शर्मा ने पंजाब व हरियाण हाई कोर्ट के इस फैसला का
जोरदार स्वागत किया है। कहा कि इस फैसले से जीएनडीयू के अधिकारियों की ओर
से अपने चहेतों को अलग अलग पोस्टों पर नियुक्त करने के चोर रास्ते अपनाने
की कार्रवाई पर विराम लगेगा। यह फैसला मेहनतकश कर्मचारियों के पक्ष वाला
है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय इन केसों पर 400 के करीब केवट दायर कर
चुकी है। जिस का खर्च विश्वविद्यालय कहां और किस बजट से कर रही है इस की
जानकारी आम जनता लेना चाहती है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय इस मामले
में एलपीए भी दायर करने की सोच रही है जिस की भी जांच होनी चाहिए कि
विश्वविद्यालय के अधिकारी अनावश्यक पैसे कोर्ट केसों पर खर्च कर रही है।
सरकार को चाहिए कि यह बरबाद किया जा रहा पैसा विश्वविद्यालय के
अधिकारियों के वेतनों से रिक्वर किया जाए। उधर विश्वविद्यालय में हुई
अध्यपके भर्ती के मामले को लेकर आवाज उठा रहे नेशनल पीपल्स फ्रंट के
अध्यक्ष एडवोकेट गगन दीप भाटिया और महासचिव राजविंदर राजा ने कहा कि
हाईकोर्ट का फैसला कर्मचारियों के पक्ष वाला और विश्वविद्यालय के
अधिकारियों की धक्काशाही पर अंकुश लगाने वाला है।
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