— मौजूदा इमरात की जगह नई इमारत होती है निर्मित को यह गुरूद्वारा इमारत की एतिहासिकता के साथ नहीं होगा खिलवाड़
अमृतसर
गुरूद्वारा डेरा बाबा नानक की एतिहासिक इमारत को कार सेवा के माध्यम से नव निर्माण करवाने को लेकर पैदा विवाद में पुरातत्व विभाग के पूर्व अधिकारी भी कूद पडे है। पुरातत्व विभाग के पूर्व अधिकारी रजिंदर सिंह बाठ, पूर्व पुरतत्व इंजीनियर बलवंत सिंह मांगट और जीएनडीयू के प्लानिंग विभाग के पूर्व मुखी प्रो बलविंदर सिंह कहा कि डेरा बाबा नानक गुरूद्वार साहिब की मौजूदा इमारत कोई एतिहासिक व प्रचीन इमारत नहीं है। यह इमारत करीब 1970 के आसपास निर्मित हुई है। इस लिए अगर मौजूदा इमारत की जगह कारसेवा के माध्यम से नई इमारत का निर्माण कर दिया जाता है तो यह कोई गुरूद्वारा की पुरतत्व इमारत के साथ खिलवाड़ नहीं होगा। अपने तर्क को स्पष्ट करने के लिए इन पूर्व अधिकारियों ने कई तथ्य भी व फोटो भी पेश किए। यह अधिकारी शुक्रवार को मीडिया के समक्ष गुरूद्वारा साहिब की इमारत के नव निर्माण को लेकर पैदा विवाद संबंधी पक्ष रख रहे थे।
पूर्व अधिकारियों ने कहा कि उनकी ओर से जो तथ्य इकट्ठा किए गए है उन से स्पष्ट होता है कि गुरूद्वारा साहिब की मौजूदा इमारत एतिहासिक ईमारत नहीं है। यह इमारत करीब चालीस वर्ष पहले हुए कार सेवा के दौरान बनाई गई थी। इस दौरान यहां की पुरानी इमारत की जगह नई बनाई गई।पहले यहा स्थित एतिहासिक कुआं गुरूद्वारा साहिब के बाहर था। जब कार सेवा हुई तो इस कुंआ को गुरूद्वारा साहिब के अंदर शामिल कर लिया गया। अब इस कुंआ के पानी में काई जम चुकी है। इस इमारत के लेंटर पर जो जोड़ है वह लीक करता है। जिस को आधुनिक निर्माण तकनीकों से ठीक किया जा सकता है। परंतु कुछ संगठन इस इमारत के पुरातन होने का जो दावा कर रहे वह दावा सहीं नहीं है।
पुरतत्व विभाग के पूर्व अधिकारियों ने दावा करते हुए कहा कि गुरूद्वारा साहिब का एक गुंबद और गुरूद्वारा साहिब के अंदर स्थित पालकी साहिब ही एतिहासिक है। डेरा बाबा नानक के गुरूद्वारा साहिब वाली जगह और वहां का कुआ एतिहासिक और प्रचीन है। परंतु मौजूदा इमारत प्रचीन नहीं है। जब उनका प्रतिनिधि मंडल सारे मामले की जांच के लिए वहां गया था तो वहां उनको कई ऐसे बुजुर्ग मिले थे जिन्होंने बताया कि उन्होंने इस गुरूद्वारा साहिब के नव निर्माण के लिए करीब 40 वर्ष पहले हुए कार सेवा में हिस्सा लिया था। उनका कहना था कि इमारत पहली एतिहासक इमातर को गिरा कर दोबारा बनी थी। अगर अब भी इस इमारत को दोबारा निर्मित कर जिया जाता है या फिर कुंआ को गुरूद्वारा की नई बनने वाले इमारत से बाहर कर दिया जाता है तो यह किसी भी तरह गुरूद्वारा साहिब की एतिहासिकता के साथ खिलवाड़ नहीं हो सकता।
उल्लेखनीय है कि एसजीपीसी ने एक फैसला लेकर इस गुरूद्वारा साहिब की मौजूदा इमारत को गिरा कर इस जगह पर गुरूद्वारा साहिब की नई इमारत बनाने के लिए कार सेवा की जिम्मेवारी कार सेवा वाले एक संतों कों सौंपी है। इस में एसजीपीसी ने कहा कि गुरूद्वारा साहिब के अंदर जो एतिहासिक कुंआ है इस कुंए को नई इमारत के निर्माण के दौरान गुरूद्वारा साहिब से बाहर किया जाए। मौजूदा इमारत को एसजीपीसी इस लिए गिराना चाहती है कि क्यों के इस संबंधी उनके पास रिपोर्ट आई है कि इस की छत बरसात के मौसम के दौरान टपकती है। जबकि एसजीपीसी के इन गुरूद्वारा के दोबारा निर्माण को लेकर दमदमी टकसाल को एतराज है। टक्साल के नेताओं का कहना है कि अगर गुरूद्वारा की मौजूदा इमारत गिरा दी जाती है और नई इमारत बनाई जाती है तो इस से गुरूद्वारा का पुरातत्व स्वरूप खत्म हो जाएगा। इस अवसर पर उक्त विशेषज्ञों के साथ अंग्रेज सिंह , चरणजीत सिंह गुमटाला आदि भी मौजूद थे।
— पंकज शर्मा
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