बुधवार, 6 जून 2018

पूर्व अकाली मंत्री के पीए के कहने पर हरिमंदिर साहिब के मैनेजर ने की थी किरण बाला को पाकिस्तान भेजने की सिफारिश


— मैनेजर सुलखन सिंह भंगाली की ओर से लिखित रूप में किरण बाला के आधार पर अपने हस्ताक्षरों से यात्रा विभाग को दी थी हिदायत
 अमृतसर    
एसजीपीसी की ओर से वैशाखी पर पाकिस्तान भेजे गए जत्थे के साथ गई किरण बाला का पाकिस्तान पहुंच कर एक मुसलिम से शादी कर वहां शरण लेने का ​मामला गहरा गया है।  मामले की जांच के लिए एसजीपीसी की ओर से बनाई गई कमेटी ने सारे घटना क्रम के संबंध में ​एसजीपीसी के रिकार्ड की जांच की है। इस जांच के दौरान सामने आया है कि रिकार्ड पर्याप्त पेश नहीं किया कया है। जिस को मुख्य रख अब एसजीपीसी की जांच कमेटी इस मामले संबंधी  13 या 14 मई को दोबारा बैठक करके रिकार्ड को खंगालेगी कि इस सारे प्रकरण में एसजीपीसी के कौन कौन अधिकारी ओर कर्मचारी शामिल है। जांच कमेटी की हुई बैठक के दौरान जो रिकार्ड पेश किया गया है उस रिकार्ड में वह दस्तावेज भी समाने आया है । जिस पर श्री हरिमंदिर साहिब के मैनेजर सुलखन सिंह भंगाली की ओर से 23 जनवरी 2018 को एसजीपीसी के यात्रा विभाग के मैनेजर को लिखा है कि श्री तलबीर सिंह गिल की ओर से इस नाम को जत्थे में शामिल करने की सिफारिश की गई है। सुलखन सिंह भंगाली ने इस बात की सिफारिश किरण बाला के आधार कार्ड की फोटो काफी के उपर की गई है। किरण बाला के आधार कार्ड का नंबर 854867911693 है। इस आधार कार्ड की कापी के उपर किरण बाला के पति का नाम नरिंदर सिंह लिखा है और पता गढशंकर होशियारपुर लिखा हुआ है। इस आधार कार्ड की फोटो कापी पर विभागीय पत्र  नंबर 192 लिखा हुआ है। वह किरण बाला का फोन नंबर 8591105530 भी लिखा हुआ है। इस दस्तावेज से स्पष्ट होता है कि तलबीर सिंह गिल की ओर से ही किरण बाला के नाम की जत्थे के साथ भेजने के लिए सिफारिश की गई थी। वहीं किरण बाला जत्थे में जाने से दो दिन पहले ही अमृतसर पहुंच गई थी। ​जो श्री हरिमंदिर साहिब की सिराय में ही रही। चर्चा यह रही कि जिस की रिहायश का प्रबंध भी एसजीपीसी के एक अधिकारी की ओर से किया गया था। यहां तक कि एक अधिकारी किरण बाला के साथ फोन पर संपर्क में भी रहा। पाकिस्तान पहुंचने के बाद भी एक अधिकारी का लिंक फोन पर किरण बाला के साथ बना रहा था। जिस तलबीर सिंह गिल की ओर से किरण बाला को जत्थे के साथ भेजने की सिफारिश की गई है वह अकाली दल के एक पूर्व मंत्री व मौजूदा विधायक का पीए है।
उधर मामले की गंभीरता को मुख्य रख देश की सुरक्षा व गुप्तचर एजेंसियों ने ​मामले को लेकर एसजीपीसी पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।  एसजीपीसी अपने आरोपी कर्मचारियों का बचाव करने के मोड में दिखाई दे रहे है। यही कारण है कि अब एसजीपीसी की जांच कमेटी कुछ लोगों  ने कहना शुरू कर दिया है कि उनके पास मामले के संबंध में पूरा रिकार्ड नहीं पहुंचा जिस को लेकर अब दोबारा बैठक बुलाई जाएगी।
सरकारी एजेंसियां अभी इस मामले को लेकर एसजीपीसी की ओर से की जा रही कार्रवाई पर नजर टिकाए बैठे हुए है।  इस मामले में अपनो का बचाव करते हुए एसजीपीसी के अध्यक्ष की ओर से गठित की गई जांच कमेटी कई तरह के आसान रास्ते बचाव के लिए देखने लग पडी है। जबकि सुरक्षा एजेंसियों की ओर से की जा रही जांच में भी बडी संख्या में रिकार्ड इकट्ठा किया जा रहा है। एसजीपीसी का नियम है कि वह किसी भी अकेली औरत को कमरा नहीं देती ।  ​बावजूद इसके कमरा किरण बाला को दिया गया। वही अकेली औरत को जत्थे के साथ भेजा नहीं जाता फिर भी एक युवा औरत को अकेला भेजा गया है। जो जांच का विषय है। 
पता चला है कि उधर इस सारे घटना क्रम का रिकार्ड और सीसी टीवी कैमरों की फुटेज भी गुप्तचर व सुरक्षा एजेंसियों ने अपने कब्जे में लिया हुआ है। इस मामले की जांच के लिए एसजीपीसी के अध्यक्ष गोबिंद सिहं लोगोंवाल की ओर से गठित की गई जांच कमेटी की बैठक 10  दिन बीत जाने के बाद हुई परंतु किसी भी निष्कर्ष तक नहीं पहुंच पाई।  सरकारी एजेंसियां एसजीपीसी की जांच कमेटी की रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। जबकि सुरक्षा एजेंसियों की ओर से किरण बाला मामले में सभी आरोपियों की पहचान करते हुए उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत इकट्ठा कर लिए है। शनिवार   सारा दिन एसजीपीसी के गलियारा में यही चर्चा रही कि जब सब कुछ साफ है कि एसजीपीसी की किस सराय में किरण बाला को किस ने ठहराया है । उधर एसजीपीसी के अध्यक्ष की ओर से बनाई गई किरण बाला मामले की जांच कमेटी के सदस्य भगवंत सिंह सियालका, रविंदर सिंह चक्क, गुरतेत सिंह ढड्डे   और सुरिंदर सिंह अब 13 या फिर 14  मई को दोबारा  बैठक करके सारे रिकार्ड की जांच करेंगे। अपनी रिपोर्ट बीस दिनों में इस कमेटी ने एसजीपीसी के अध्यक्ष को सौंपनी है। एसजीपीसी अध्यक्ष गोबिंद सिंह लोंगोवाल ने इस कमेटी का गठन 25 अप्रैल को किया था। मामले के संबंध में जब एसजीपीसी के अध्यक्ष गोबिद सिंह लोंगोवाल को  पक्ष जानने के लिए बार बार संपर्क किया गया तो उनका फोन नंबर बंद आया।
अकाली दल के पूर्व मंत्री के पीए तलबीर सिंह को भी पक्ष जानने के लिए संपर्क किया जाता रहा। उनके फोन पर घंटी तो जाती रही परंतु उन्होंने फोन उठाया ही नही।

— पंकज शर्मा

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