बुधवार, 6 जून 2018

किरण बाला की सिफारिश से तलबीर गिल हटे पीछे, भंगाली फंसे अपने ही जाल में



— एजसीपीसी करने लगी भंगाली को पद से हटाने की तैयारी
— सरना ने कहा कि बिक्रम , भंगाली व तलबीर ​की है गहरी दोस्ती
पंकज शर्मा , अमृतसर
एसजीपीसी की ओर से 12 अप्रैल को वैशाखी पर्व पर भेजे गए जत्थे में गई किरण बाला का पाकिस्तान पहुचं गयब होकर एक पाक नागरिक के साथ शादी करने के मामले में नया मोड़ आ गया है। अपना बचाव करते हुए पूर्व अकाल मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया के पीए व राजनीतिक सलाहकार ​तलबीर सिंह गिल ने इस मामले में अपनी हाथ पीछे खींच लिए है। जिस के चलते तलबीर सिंह गिल के नाम का उपयोग कर किरण बाला को पाकिस्तान भेजने के लिए वीजा की सिफारिश करने वाला श्री हरिमंदिर साहिब का मैनेजर सुलखन सिंह भंगाली खुद अपने ही बुने जाल में फंस गए है।  लगता है कि एसजीपीसी के अधिकारी अब आने वाले दिनों में भंगाली को पद से हटाने के लिए सोचने लग पडे है। उधर एसजीपीसी के अध्यक्ष गोबिंद सिंह लोगोवाल ने स्पष्ट कर दिया है कि इस मामले में आरोपी पाए जाने वाले एसजीपीसी के किसी भी कर्मचारी व अधिकारी को बख्शा नही जाएगा।
तलबीर गिल की ओर से किरण बाला मामले से अपना हाथ पीछे खींचने के बाद मैनेजर सुलखन सिंह भंगाली ने अपना मोबाइल फोन बद कर लिया है। इस के चलते उनके साथ पक्ष जानने के लिए संपर्क नहीं हो पा रहा है। मैनेजर सुलखन सिंह भंगाली ने तलबीर सिंह गिल के नाम का उपयोग करके किरण बाला को क्यों जत्थे के साथ पाकिस्तान भेजा है इस के पीछे भंगाली की क्या मनशा थी अब मामले की जांच इस ओर शुरू हो गई है। अब यह भी चर्चा शुरू हो गई है कि भंगाली के तलबीर गिल के साथ क्या कारोबारी व राजनीति रिश्ते थे इस पर भी सरकारी सुरक्षा एजेंसियां जांच करने लग पडी है। क्यों के हर जुबान पर चर्चा है कि तलबीर सिंह गिल, बिक्रम सिंह मजीठिया व सुलखन सिंह भंगाली की आपस में काफी निकटता थी। जिन की सिफारिश पर ही भंगाली को श्री हरिमंदिर साहिब का मैनेजर लगाया गया था। क्यों कि अकाली दल की ओर से तलबीर सिंह गिल को एसजीपीसी की सभी गतिविधियों को देखने व संचालित करने के लिए जिम्मेवारी सौंपी गई थी। 

एसजीपीसी के अध्यक्ष गोबिंद सिंह लोगोवाल ने कहा कि सोमवार एसजीपीसी कार्यालय में किताबों के सिलेबस को लेकर एक बैठक का आयोजन किया जा रहा है। इस के बाद मामले को लेकर जांच कमेटी के सदस्यों के साथ भी बैठक की जाएगी।जो भी आरोपी हुआ उसके खिलाफ कार्रवाइ होगी।
उधर जांच कमेटी के सदस्य भगवंत सिंह सियालका ने कहा कि किरण बाला मामले की जांच तय तक होगी। कई नई बाते समाचार पत्रों के माध्यम से सामने आ रही है। जिनकी गहरी जांच होंगी।
शिरोमणाी अकाली दल दिल्ली के अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना ने कहा कि किरण बाला को एसजीपीसी के जत्थे के साथ पाकिस्तान भेजना एक गहरी साजिश है। इस साजिश में बिक्रम सिंह मजीठिया का राजनीतिक सलाहकार तलबीर सिहं पूरी तरह शामिल है। तलबीर सिंह और भंगाली के सबंधों की चर्चा देश व विदेशों में भी है। तलबीर अपने आप को बचाने के लिए पीछे हो रहा है। उन्होंने कहा कि अकाली दल हमेशा से ही एसजीपीसी के कामों में सीधी दखल देता आ रहा है। इस घटना ने इस दखल को पूरी तरह साबित कर दिया है। इस से एसजीपीसी का अक्स भी प्रभावित हुआ है। उन्होंने बताया कि भंगाली को तलबीर ​और बिक्रम की सिफारिश पर ही 30 नवंबर 2015 को हरिमंदिर साहिब का मैनेजर लगाया था। और तलबीर खुद उसे कुर्सी पर बिठाने के लिए आया था। भंगाली दोनों के भरोसे वाला आदमी था। इस लिए भंगाली के एसजीपीसी के फूल टाइम कर्मचारी होने के बावजूद उसे गांव भंगाली में सरपंच की टिकट दे कर गांव का सरपंच बनाया गया था। जो आज भी एसजीपीसी में मैनेजर की पोस्ट के साथ साथ गांव के सरपंच की जिम्मेवारी निभा रहा है। एक व्यक्ति की ओर से दो पोस्टों पर काम करना गैर कानूनी है।


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किरण बाला को पाकिस्तानी वीजा के लिए मैने कोई सिफारिश नही की: तलबीर


पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया के पीए व राजनीतिक सचिव  तलबीर सिंह गिल ने कहा कि किरण बाला मामले के साथ उसका कोई भी संबंध नहीं है। अपने आप को इस विवाद से अलग करते हुए तलबीर सिंह ने भेजे बयान में कहा कि उनकी ओर से किरण बाला को पाकिस्तान जत्थे के साथ भेजने के लिए कोई भी सिफारिश एसजीपीसी के कर्मचारी व श्री हरिमंदिर साहिब के मैनेजर सुलखन सिंह भंगाली को नहीं की थी। सुखलख सिंह भंगाली ने खुद ही उनके नाम का गलत उपयोग किया है। अगर उसके नाम का उपयोग मैनेजर सुलखन सिंह भंगाली ने किया है तो यह भंगाली की ओर से अपनी किसी कमजोरी को छुपाने के लिए उनका नाम गलत उपयोग ​कर दिया है। इस गैर जिम्मेवारी के लिए सुखलन सिंह भंगाली खुद जिम्मेवार है। उसकी मांग है कि एसजीपीसी की जांच कमेटी भंगाली की ओर से उनके नाम के लिए गलत उपयोग के संबंध में विभागीय कार्रवाई करे।

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