— श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार कह चुके है कि तनखईया चड्डा को
सम्मानित करना पंथक मर्यादा के खिलाफ
— चड्डा खिलाफ जांच पर सभी ने धारण की चुप्पी
पंकज शर्मा , अमृतसर
श्री अकाल तख्त साहिब के तनखाईया एलान किया गए चीफ खालसा दीवान के पूर्व
प्रधान चरणजीत सिंह चड्ढा को श्री हरिमंदिर साहिब के लंगर घर व
गुरूद्वारा डेरा बाबा नानक में सिरोपा देकर सम्मानित करने का मामला ठंडे
बस्ते में डाला जा रहा है। इस मामले में यहा कथित राजनीतिक दबाव के चलते
चरणजीत सिहं को बचाने की कोशिश हो रही है वहीं इस में आरोपी बताए जा रहे
एसजीपीसी के अधिकारियों को भी बचाने की कोशिश हो रही है। चर्चा है कि
चड्डा के राजनीतिक आका इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए एसजीपीसी के उपर
दाबव बना रहे है चड्डा को इस मामले में से मुक्ति दिलवाई जाए। एसजीपीसी
के अधिकारियों ने इस मामले पर चुप्पी धारण कर ली है। अधिकारी इस मामले
में एक तीर से दो शिकार कर चड्डा और अपने कर्मचारियों को बचाना चाहते है।
उल्लेखनीय है कि गुरू घर के तनखाईयों को सिरोपा भेंट कर सम्मानित नहीं
किया सकता। चरणजीत सिंह को श्री गुरु राम राम लंगर के प्रबंधकों की ओर
से सिरोपा देकर सम्मानित किए जाने की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायल हुई
थी । जिस को लेकर एसजीपीसी गलियारा में हडंकप मच गया था। चड्डा को दूध
स्टोर करने वाली कैंडी मशीन भेंट करने पर प्रबंधकों ने सिरोपा देकर
सम्मानित किया गया जबकि अकल तख्त साहिब के आदेश हुए थे कि चड्डा दो
वर्षों के लिए न तो किसी तरह धार्मिक व राजनीतिक गतिविधियों में हिस्सा
ले सकते है और न ही उनको कोई इस तरह की गतिविधियों में शामिल करे। उनको
सिरोपा देना तो बहुत ही दूर की बात है।
चरणजीत सिंह चड्डा अपनी पत्नी हरबंस कौर के साथ श्री गुरू राम दास लंगर
घर के लिए दूध को गर्मी में संभालने के लिए 800 लीटर वाली एक शमीन भेंट
करने के लिए गए थे। इस दौरान उनको वहां के प्रबंधकों की ओर से सिरोपा
देकर सम्मानित कर दिया गया। जो कि श्री अकाल तख्त साहिब से चड्डा के
खिलाफ जारी हुए आदेशों का उल्लंघन है। एसजीपीसी में यह चर्चा शुरू हो गई
थी कि इस मामले में मैनेजेर मनजिंदर सिंह मंड और उनके साथ दो एडिशनल
मैनेजर हरप्रीत सिंह व सतनाम सिंह आरोपी है जो हमेशा वहा तैनात रहते है।
जब चड्डा को सिरोपा दिया गया था तो उस वक्त लंगर के इंचार्ज गुरप्रीत
सिंह गोपी भी मौजूद थे।
इसी तरह चड्डा को गुरूद्वारा डेरा बाबा नानक के गुरूद्वारा साहिब से
सिरोपा देकर भी सम्मानित गया था। इस सम्मानित किए जाने की सोशल मीडिया
पर वायल हुई तस्वीरों ने एक बार फिर विवाद को दोबारा बढा दिया था। चर्चा
यह रही थी कि यह कार्रवाई सीधे रूप में श्री अकाल तख्त साहिब के आदेशों
को चुनौती है। बताया जा रहा है चड्डा को 23 मई को गुरूद्वारा डेरा बाबा
नानक में सिरोपा देकर सम्मानित किया गया है। जबकि श्री अकाल तख्त साहिब
से पांच सिंह साहिब ने बैठक करने के बाद 23 जनवरी 2018 को चड्डा के खिलाफ
आदेश जारी किए थे।
मामले को लेकर जब श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह
से बात की गई तो उन्होंने कहा कि चड्डा के उपर दो वर्षों के लिए धार्मिक
व समाजिक गतिविधियों में हिस्सा लेने के लिए रोक लगाई है। चड्डा श्री
अकाल तख्त साहिब से तनखाईया घोषित है। इस लिए परपंरा के अनुसार उनको
सिरोपी नहीं दिया जा सकता। जिन लोंगों ने सिरोपा दिया है उनके खिलाफ भी
धार्मिक कार्रवाई बनती है।
इस मामले को लेकर जब जत्थेदार अकाल तख्त साहिब के निजी सहायक सतिंदर सिंह
के साथ बात की गई तो उन्होंने कहा कि इस संबंधी अकाल तख्त साहिब पर कोई
शिकायत नहीं पहुंची है परंतु एसजीपीसी इस पर जांच कर रही है। जब एसजीपीसी
के मुख्य सचिव डा रूप सिंह के साथ बात की गई तो उनका फोन हमेशा बंद आया।
जब मामले को लेकर एसजीपीसी के सचिव मनजीत के संपर्क किया गया तो उन्होंने
कहा कि इस संंबंधी एसजीपीसी अध्यक्ष गोबिदं सिंह लोंगोवाल के पीए जगजीत
सिंह जग्गी ही स्पष्ट कर सकते है। पक्ष जानने के लिए बार बार पीए जगजीत
सिंह से संपर्क किया गया तो उन्होंने अपना फोन ही नहीं उठाया
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