— पाक भेजने जाने वाले श्रद्धालुओं के जत्थे के साथ जाने वालों पर अभी भी नहीं लागू किए नए नियम
— अगर दोबारा किरण बाला जैसे होती है घटना तो , इस पर सभी अधिकारियों ने धारण की चुप्पी
पंकज शर्मा , अमृतसर
एसजीपीसी की ओर से वैशाखी पर पाकिस्तान भेजे गए जत्थे के साथ गई किरण बाला के पाकिस्तान पहुंच गायब होने व वहां पाक नागरिक के साथ शादी कर वहीं रह जाने के मामले से एसजीपीसी ने अभी तक कुछ नहीं सीखा है। दावों के बावजूद भी एसजीपीसी की ओर से श्री गुरु अर्जुन देव जी के शहीदी दिन व महाराजा रणजीत सिंह की बरसी कार्यक्रम में भेजे जाने वाले जत्थे के सदस्यों के लिए कोई भी नया नियम अपनाया नहीं गया। बल्कि पहले की तरह ही चलने नियमों के अनुसार जत्थे के साथ जाने वाले श्रद्धालुओं के पासपोर्ट वीजा के लिए पाकिस्तान एम्बैसी को भेज दिए गए।
होशियारपुर जिले के कस्बा गढ़शंकर की रहने वाली किरण बाला वैशाखी पर एसजीपीसी के पाकिस्तान गए जत्थे के साथ पाक गई और वहां पहुंच कर गायब होकर एक पाक नागरिक के साथ निकाह करते हुए अपना धर्म भी बदल लिया था। विवाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठने के बाद यहां भारतीय सुरक्षा एजेंजियां स्तर्क हो गई वहीं एसजीपीसी के अध्यक्ष गोबिंद सिंह लोंगोवाल ने एलान किया था कि भविष्य में किरण बाला जैसे कोई घटना ना दोहारई जा सके इस के लिए एसजीपीसी जत्थे के साथ जाने वाले श्रद्धालुओं के नियमों में तबदीली लाएगी। प्रत्येक श्रद्धालु के जाने व उसकी पहचान की गहरी जांच होगी। किसी भी कुवांरे व युवा अकेले लडकी या लडके को जत्थे के साथ नहीं भेजा जाएगा। सुरक्षा एजेंसियों ने यहां तक भी रिपोर्ट सरकार को भेजी थी कि जत्थे के साथ जाने वाले प्रत्येक श्रद्धालु की पुलिस जांच रिपोर्ट भी शामिल की जाए ताकि देश की सुरक्षा के साथ कोई भी व्यक्ति भविष्य में खिलवाड न कर सके।
एसजपीसी के मुख्य सचिव डा रूप सिंह ने भी कहा था कि एसजीपीसी की ओर से गठित की गई किरण बाला मामले की जांच कर रही कमेटी को हिदायत दी गई है कि वह जत्थे के साथ जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए नियम तय करें। परंतु अभी तक इस कमेटी की ओर से भी कोई नियम तय करके एसजीपीसी के नेतृत्व को नहीं सौंपे है।
एसजीपीसी ने एक बार फिर पाकिस्तान में नौ जून को श्री गुरु अर्जुन देव जी के शहीदी दिवस को मनाने के लिए और 21 जून को महाराजा रंजीत सिंह की बरसी मनाने के लिए जत्थे एसजीपीसी मुख्यालय से रवाना करने है। इस के लिए पासपोर्ट मांगे गए । गुरु अर्जुन देव जी के शहीदी के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए 81 श्रद्धलाुओं के पासपोर्ट आए और महाराजा रंजीत सिंह की बरसी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए 82 श्रद्धालुओं के आए पासपोर्टों को वीजा के लिए भेजा गया है। परंतु पूर्व में किए एलानो के अनुसार जत्थों के जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए कोई भी नया नियम लागू नही किया गया। पुराने नियमों के अनुसार ही इस बार भी पासपोर्ट इकट्टा करके पाक एम्बेसी को वीजा के लिए भेज दिए गए । अगर किरण बाला के मामला जैसी घटना दोबारा एसजीपीसी के जत्थे के साथ हो जाती है तो इस के लिए जिम्मेवार कौन होगा इस के लिए कोई भी एसजीपीसी अधिकारी बोलने को तैयार नहीं है। जिस भी अधिकारी से इस मामले में बात की गई तो हर ने चुप्पी धारण करने हुए कहा कि नो कमेंट
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