बुधवार, 6 जून 2018

जीएनडीयू के 44वें दीक्षा समारोह में ​हुए नियमों के उल्लंघन खिलाफ राज्यपाल को भेजा प्रस्ताव

 — मामले में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की उठाई गई मांग
— एनपीएफ, एनएसएफ और हिन्दू महासभा के नेताओं ने राज्यपाल को भी मिलने का लिया फैसला
 अमृतसर
गुरु नानक देव विश्वविद्यालय में गत दिवस आयोजित की गई 44 वीं वार्षिक कान्वोकेश्न के दौरान कान्वोकेशन नियमों के हुए उल्लंघन की नेशनल पीपलस फ्रंट ने उच्च स्तरीय जांच करने की मांग की है। कान्वोकेशन के दौरान हुए प्रोटोकोल के उल्लंघन करने के लिए जिम्मेवार अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने की पंजाब के राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर से मांग की है गई है। ताकि कान्वोकेशन के दौरान भविष्य में विद्यार्थियों के अधिकारों  व भावनाओं के साथ खिलवाड़ न हो सके। इस संबंध में नेशनल पीपलस फ्रंट, नेशनल स्टूडेट्स फेडेशन और हिन्दू महासभा राष्ट्रवादी के कार्यकर्ताओं ने संयुक्त बैठक कर एक प्रस्ताव पारित किया । इस प्रस्ताव पर कार्रवाई करने के लिए पंजाब के राज्यपाल को अपील की गई है।
बैठक के बाद नेशनल पीपलस फ्रंट के अध्यक्ष एडवोकेट गगन दीप भाटियां ने कहा कि गुरू नानक देव विश्वविद्वालय में आयोजित 44 वीं वार्षिक कान्वोकेशन के दौरान खुलेआम कान्वोकेशन प्रोटोकाल व नियमों का उल्लंघन हुआ है। जिस में विश्वविद्यालय के प्रबंधक पूरी तरह जिम्मेवार है। इस उल्लंघन के चलते विश्वविद्यालय के घटिया  प्रबंधों की ही पोल नहीं खुली बल्कि विद्यार्थियों की भी भावनाएं आहित हुई है। उन्होंने कहा कि किसी विश्वविद्यालय में विद्यार्थियेां को डिग्री बांटने के लिए आयोजित किया जाता दीक्षा समारोह एक विशेष कार्यक्रम होता है। यह विद्यार्थियों के सम्मान में किसी संस्थान की ओर से आयोजित किया जाता महत्वपूर्ण कार्यक्रम होता है। परंतु जब एक बार कान्वोकेशन शुरू करने के आदेश जारी कर दिए जाते है तो जब तक कान्वोकेटन बंद करने के आदेश जारी नहीं हो जाते तब कि कान्वोकेश के लिए तय नियमों को पालन किया जाता है। परंतु जीएनडीयू की 44वीं कान्वोकशन के दौरान इस का ध्यान ही नहीं रखा गया। यहां तक के नियमों के संबंध में मुख्य अतिथि प्रकाश जावेडकर को भी जीएनडीयू के अधिकारियों ने अवगत नहीं करवाया। अभी विद्यार्थियों को डिग्रियां बांटी ही जा रही थी किे जीएनडीयू के एक डिप्टी रजिस्ट्रार स्तर के अधिकारी ने मुख्य अ​तिथि के कान के पास मोबाइल लगा दिया और बात करने को कहा। जिस का मुख्य अतिथि ने बुरा भी प्रगट किया। कान्वोकेशन अभी बंद ही नही हुई थी कि मुख्य अतिथि विद्यार्थियों को बीच में डिग्रियां बांटनी छोड कर स्टेज पर लगी कुर्सी पर बैठ गए और लम्बा समय तक फोन सुनते रहे। इस दौरान उन्होंने प्रोटोकोल अनुसार डिग्रियां बांटने के लिए पहनते जाते हैट और गाउन को भी उतार दिया। हैट उतार कर टेबल पर रख दिया और गाउंन उतार का अपने कुर्सी के बैक पर रख दिया। जबकि अभी​ डिग्रियां बांटी जा रही थी यह डिग्रियां इस दौरान विश्वविद्यालय के वीसी और डीन अकादमिक बांट रहे थे। इतना ही नही डिग्रियां बांटे जाने की प्रक्रिया के दौरान स्टेट पर ही जीएनडीयू के कुछ अधिकारी इस से उधर जा रहे थे जैसे यह कोई कान्वोकेशन न हो कर कर्ज बांटने वाले जन सभा हो।
एनपीएफ नेता ने कहा कि विद्या​र्थी मुख्य अतिथि से डिग्री लेने के लिए आए थे। बावजूद उनको सिर्फ वीसी और डीन से डिग्री लेने के लिए मजबूर होना पडा। जिस पर कुछ विद्यार्थियों ने एतराज भी प्रगट किया। उन्होंने कहा कि चाहे यूजीसी की ओर से कान्वोकेश्न के लिए तय नियमों का उल्लंघन करने को लेकर किसी भी तरह की सजा का कोई प्रवाधान नहीं है फिर भी इस से विश्वविद्यालय का यहां अक्स प्रभावित हुआ वहीं विद्यार्थियों के मनो को भी ठेस पहुंची है।  दीक्षा समारोह के दौरान जो भाषण की प्रतियां बांटी गई उसमें राज्य भाष पंजाबी का खुलेआम उल्लंघन किया गया। भाषण की प्रतियां ​अंग्रेजी और हिन्दी में बांट दी गई परंतु राजभाषा पंजाबी को पूरी तरह नजर अंदाज कर दिया गया।  उन्होंने कहा कि इस मामले की पंजाब के राज्यपाल को जांच करवा कर आरोपियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई आदेश देने चाहिए। इसको लेकर पार्टी का प्रतिनिधि मंडल जलदी दी पंजाब के राज्यपाल को मिलने के लिए जाएगा।  इस अवसर पर संगठनों के नेता राजविंदर राजा, विजय सिंह ठाकुर, विकास बेरी , रजविंदर सिंह राजबीर , एडवोकेट कुलदीप मेहता आदि भी मौजूद थे। मामले को लेकर जब जीएनडीयू के अधिकारियों व यूजीसी के अधिकारियों से बात की गई तो मुद्दे पर किसी ने भी अपना पक्ष रखने से पूरी तरह इंकार कर दिया।
— पंकज शर्मा

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