रविवार, 25 फ़रवरी 2018

सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर करती थी ग्रांट जारी व पीए फर्जी फर्मे बन करता रहा सरकारी पैसे का गबन: मन्ना


- सिद्धू अगर इमानदार है तो अपनी पत्नी डा नवजोत कौर के घोटालों की करवाए निष्पक्ष जांच 
- नवजोत कौर के पीए  ने ठेकेदारी की फर्जी फर्म बना कर हडप लिए तीस लाख 57 हजार रूपये 
- घोटाले कीे जांच के लिए मुख्यमंंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के पास  लेकर जाने का किया एलान 
अमृतसर,  4 फरवरी   :
पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व सचिव व प्रवक्ता मनदीप सिंह मन्ना ने कहाकि ईमानदारी की दबंगगिरी का कथित झंडा बुलंद करने वाले स्थानीय निकाय मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू सब से पहले भ्रष्टाचार मुक्ति अभियान अपने घर से शुरूकरे तभी उसके इमानदार होने की सचाई दुनिया के सामने साबित हो सकती है। बात बात पर झूठ  के पुल बांधने वाले नवजोत सिंह सिद्धू सब से पहले अपनी पत्नी डा नवजोत कौर सिद्धू के कार्यकाल में नवजोत कौर के ही विधान सभा क्षेत्र में हुए विकास में करोड़ों रूपये के भ्रष्टाचार की जांच करवा कर दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करे। इस भ्रष्टाचार में सिद्धू की कोठी में बैठे लोग भी  शामिल है। नवजोत कौर सिद्धू खुद विधायक थी और  उसका पीए नवजोत कौर की शह पर ही फर्जी कंस्ट्र्रकशन कंपनिया बना कर ठेके लेते रहे । जिस में  नवजोत कौर ने पीए के साथ मिल कर तीस लाख  57 हजार के सरकारी धन कर गबन किया है। मन्ना सिद्धू की पत्नी की ओर से अपने पीए के साथ मिल कर फर्जी फर्म बना किए घोटाले का सबूतों के  साथ मीडिया के समक्ष खुलासा कर रहे थे। खुलासा करते हुए मन्ना ने सिद्धू परिवार की ओर से अपने चहरे पर पहने इमानदारी  के निकाब को उतारते हुए उनका चेहरा सफेद दिन की तरह नंगा किया।  दावा किया कि जल्दी ही वे सबूतों और दस्तावेजों की फाईलों के साथ सिद्धू और उसकी पत्नी की इमानदारी के सारे नकाब लीर लीर करते हुए पंजाब के मुख्य मंत्री कै्रपटन अमरिंदर सिंह और पंजाब के लोकपाल के समक्ष शिकायत दर्ज करवाएंगे।  
मन्ना ने खुलासा करते हुए कहा कि नवजोत कौर सिद्धू खुद वर्ष  2० 12
में विधायक बनी और उसका पीए ठेकेदर बन गया और एक फर्जी फर्म जी एंड जी बना कर पब्लिक मनी पर प्राईवेट एजेंडा लागू करते हुए सरकारी धन को खाना शुरू कर दिया। इस फर्जी फर्म के नाम पर पीए ने नगर सुधार ट्रस्ट से  तीस लाख 35 हजार का ठेका लिया। जबकि न ही इस आदमी के पास पहले कोई ठेकेदारी का तजुर्बा था और न ही इसकी कोई फर्म नगर सुधार ट्रस्ट में रजिस्र्ट थी तो फिर यह ठेका कैसे जी एड जी फर्म को दे दिया गया।  मैडम सिद्धू ने पीए ने 18 सितंबर  2०13  को नगर सुधार ट्रस्ट में एक प्रार्थन पत्र देते हुए कहा कि उनकी जी एड जी कंस्ट्रक् शन कंपनी है। जो पुड्डा में बी  ग्रेड की फर्म के रूप में रस्ट्रिड है। इस प्रार्थना पर बिना कोईजांच किए  नगर सुधार ट्रस्ट के जेई से लेकर चेयरमैन तक के अधिकारियों ने एक ही दिन में नगर सुधार ट्रस्ट में रजिस्टर कर दिया और नवजोत कौर सिद्धू के एक आदेश के आधार पर  15 अक्टूबर 2०13 को पूर्व विधान सभा के सडके, नालियां और पार्क की रिपेयर का काम का टेंडर खोला जाता है। इस काम के ठेके देने की अपरूवल 17 जुलाई 2०13 को होती है। इस के बाद ही मैडम का पीए फर्म  बनाता है और तीस लाख 57 हजार का ठेका जी एंड जी फर्म को दे दिया जाता है।बाद में मैडम सिद्धू इलाके की वार्ड नंबर 21 के विकास के काम भी एक पत्र के माध्यम से चेज कर देती है। जो काम यही फर्जी फर्म करती है। नगर सुधार ट्रस्ट के अधिकारी इस फर्म को सारे पैसों का भुगतान भी कर देते है। इस फर्जी फर्म का अकाउंट नंबर 8० 4 ० 221० ००० 6289  ग्रामीण विकास बैंक  शिवाला भाईयां में खोला  जाता है।  जिस में सारे लेनदेन होते है। 
मन्ना ने  विभाग के ही सबूत दिखाते हुए कहा कि जब इस फर्म के पुड्डा में रजिस्टर होने संबंधी आईटीआई से सूचना मांगी गई तो जवाब मिला कि इस नाम की कोई भी फर्म पुड्डा में बी  श्रेणी में  कभी रजिस्ट्रर्ड थी और न ही रजिस्ट्रर्ड है। इसी फर्म की रजिस्ट्रेशन संबंधी नगर सुधार ट्रस्ट से भी आरटीआई से जानकारी मांगी गई। नगर सुधार ट्रस्ट ने भी जवाब दिया कि इस नाम की कोई भी फर्म विभाग में रजिस्ट्रर्ड नहीं है। अगर यह फर्म  रजिस्ट्र्रड ही नहीं तो इस को काम का ठेका कैसे दे दिया गया।  इस फर्म को नगर सुधार ट्रस्ट में 18 सितंबर 2०13 में ही  अधिकारी एक ही दिन में रजिस्ट्रर्ड करने की रिपोर्ट तैयार कर 19 सितंबर को रजिस्ट्रेशन फीस जमा करवाने के आदेश देते है। परंतु रिकार्ड में सामने आया कि इस फर्म को रजिस्ट्रर्ड की फीस तीस अक्टूबर को ही भर दी गई थी। जबकि फर्म बनाने की और रजिस्ट्रर्ड करने की प्रक्रिया फीस जमा होने के एक महीने बाद शुरू होती है। जो मैडम सिद्धू के घोटाले को पूरी तरह नंगा करती है।
मन्ना ने और भी सबूत दिखाते हुए कहा कि नवजोत कौर सिद्धू  जनवरी  2० 16 को एक पत्र नंबर ओजीएल- सीपीएस- 886 लिखती है कि जी एंड जी  फर्म ने टेंडर जितना लैस में लिया है उस की जितनी भी सेविंग हुई उसे इस्ट मोहन नगर पार्क पर लगाया जाए। यह पत्र नगर सुधार ट्रस्ट के कार्यालय में फरवरी महीने में  डायरी होता है जबकि फर्म को सारे ठेके के काम की पेमेंट तीस लाख 57 हजार रूपये 16 जनवरी 2०16 को ही हो जाती है।  मैडम सिद्धू यह पत्र  फर्म के काम के नाम पर गबन पैसे को एडजस्ट करने के लिए ही लिखती है। उन्होंने कहा कि मैडम ने अपने पीए के साथ मिल कर कई और भी फर्जी  फर्मे बना कर सरकारी पैसे की बड़ी लूट की है। जिस की नवजोत सिंह सिद्धू  पंजाब के ही किसी  निष्पक्ष आईपीएस अधिकारी की निगारी में इनवेस्टीगेशन टीम बना कर करवाए। उन्होंने कहा कि अगर नगर निगम में पीएफ घोटाले वाली मैडम से एक दिन ही रिकवरी करवाई जा सकती है तो नगर सुधार ट्रस्ट के एक अन्य घोटाले में शामिल दमन भल्ला से रिक्वरी क्यों नहीं करवाई गई। सच तो यह है कि दमन  भल्ला मैडम के इशारो ंपर उसके पीए की फर्जी फर्मों के लिए ठेकों के फर्जी बिलों के भुगतान में बडी भुमिका निभाता रहा है। मैडम खुद ही अपने इलाके में ग्रांट जारी करवा अपने लोगोंं को ठेके देकर खुद ही कमिशन दलाली के कामों में लगी रही है। यही कारण था कि अकाली-भाजपा सरकार के साथ मैडम सिद्धू का विरोध था बावजूद वह विकास कार्यों में मिलने वाले कथित कमिशन हासिल करने के लिए पदसे त्याग पत्र नहीं देती थी। क्यों के इनका लूट का काम ही इसी से चलता था। जब कैप्टन अमरिंदर सिंह ने नगर सुधार ट्रस्ट भंग करने का एलान किया था तो इस का सब से पहले नवजोत सिंह सिद्धू और नवजोत कौर सिद्धू ने ही विरोध किया था। क्यों कि इनको पता था कि इनका सब कुछ नगर सुधार ट्रस्टों के पैसे के कमिशन से चलता है। उन्होंने कहा कि आज भी सिद्धू की कोठी में ऐसे लोग है जिन्होंने फर्जी नामों पर कई फर्में बनाई हुई है। यह लोग कुछ पुलिस अधिकारियों के साथ ,नगर निगम और नगर सुधार ट्रस्ट के अधिकारियों के साथ बैठे दिखाई देते है और पिछले समय के दौरान एमपी लैड फंड से करवाए मेंटीनेंस आदि के कामों के फर्जी बिल पास करवाते रहते है। जिनका खुलासा भी सबूतों के साथ जल्दी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उनकी ओर से पहले शमशान घाट का घोटाला निकाला था जिस की फाइलें गायब कर दी गई। इस इस फर्जी फर्म की फाइलें भी विभाग अवश्य गायब कर देगा। जिनको गायब करवाने में विभाग के मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू की सीधी भूमिका होगी।
मन्ना ने कहा कि उनकी ओर से पहले भी सिद्धू ू की पत्नी नवजोत कौर के   अमृतसर पूर्वी  विधान सभा क्षेत्र में वार्ड नंबर 17 में स्थित एक शमशानधाट की चार दीवारी , पेंट व अन्य विकास कार्यों  के लिए  27 लाख  84 हजार रूपये का एक टेंडर रिलीज 18 जुलाई  2०12 को हुआ था। इस काम के लिए विकास राशि सिद्धू की पत्नी ने सरकारी फंड से जारी की थी।  टेंडर एक गोकल कोअप्रेटिव सोसायटी को जारी किया गया।  काम पांच महीने में खत्म करना था। इस सोसायटी ने काम  एक महीने में ही 17 अगस्त  2०12 को ही कागजों में खत्म करके दे दिया। यह काम वर्क आर्डर नंबर 4262 था । जिस काम का सारा रिकार्ड  झूठा ही विभाग की  एमबी बूक नंबरी 84० फर्जी रूप में दर्ज किया गया। जबकि इस जगह पर आज तक एक भी इंट विकास के नाम पर नहीं  लगी  है।  इस घोटाले की जांच का नवजोत सिद्धू ने एलान किया था परंतु आज तक जांच नही करवाई है।


- जारी कर्ता 
मनदीप सिंह मन्ना 
पूर्व सचिव व प्रवक्ता 
पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी 


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