- कहते थे कि इंतजार है उस घड़ी का जब मैं अपनी हसरत पूरी कर सकूं
अमृतसर,18 जुलाई :
राजेश खन्ना के चचेरे भाई दुनी चंद खन्ना कहते है कि राजेश खन्ना में हर भार यह मलाल रहता था कि वह पंजाब तो गया परंतु अपने पैतृक घर अमृतसर की गली तिवारियां में नहीं जा पाया। इस बात का जिक्र कई बार राजेश खन्ना ने दुनी चंद और दुनी चंद के परिवार के अन्य सदस्यों के साथ किया था। वह हमेशा कहता था कि वह एक बार अपना पुराना घर जरूर देखना चाहता है और वहां बने भगवान शिव के मंदिर में नतमस्तिक होना चाहता है। परंतु सुरक्षा कर्मचारी और जिला प्रशासन के लोग उसे वहां जाने से हमेशा सुरक्षा की दृष्टि से रोक देते थे। जिस कारण वह अपने पुराने घर और भगवान के शंकर के समक्ष नतमिस्तक होने के सपने को पूरा किये बिना ही इस दुनिया से विदा हो गए।
दुनी चंद कहता है कि वह कई बार मुबई परिवार के साथ राजेश खन्ना के घर आता जाता रहा है। परंतु जब भी वह जाता तो राजेश खन्ना उनकों कभी भी घर नहीं मिला। वह अपने ताया व ताई तथा परिवार के अन्य लोगों से मिल कर आ जाते रहे है। क्यो कि राजेश खन्ना हमेशा विभिन्न स्थानों और बाहरी देशों में शुटिंग आदि पर गए रहते थे। जिस कारण बचपन से लेकर आज तक वह तस्वीरों और टीवी पर आती फिल्मों के जरिये तो उसे मिलते रहे है परंतु डायरेक्टर नहीं मिल पाए। दुनी चंद ने बताया कि जब विधान सभा चुनावों के दौराव वह तारनतारन जिले में कांग्रेस के विभिन्न उम्मीदवारों के चुनावी प्रचार के लिए आए थे तो अमृतसर के एक होटल में रहे थे। जब वह अपने भाई से मिलने होटल में गए तो सुरक्षा कर्मचारियों ने मुझे राजेश खन्ना से मिलने ही नहीं दिया। उस दिन पहली बार मेरी आंखों से अश्रुधारा बही थी कि क्या जिंगदी है कि एक भाई अपनी भाई से ही नहीं मिल सकता।
चुनाव प्रचार के दौरान ही जब राजेश खन्ना से मीडिया ने जब पूछा था कि वह वर्षों बाद अमृतसर आए है तो क्या वह अपने पैतृक घर में जाएंगे तो जब राजेश ने कहा था कि इंतजार है उस घड़ी का जब मैं अपनी हसरत पूरी कर संकू. . . . ., खुदा जाने हसरत पूरी होती भी है या फिर यू ही इंतजार में जिंदगी गुजर जाती है।
मीडिया ने उस समय उससे यह सवाल भी किया था कि कुड समय से आप काफी बीमार चल रहे है क्या आप को कोई गम है या फिर कोई जीवन की मुश्किल है जिस ने बीमारी का रूप धारण कर अप को पकड़ लिया है। तब राजेश का जवाब था कि जिंदगी तो गम है, हर इंसा को गम मिलता है जिदगी में, कोई अमृत समझ का पी लेता है गमों को तो किसी को जहर की तरह धीरे धीरे मारते है गम। मुझे कोई गम नहंी है। शरीर जरूर कमजोर है परंतु मेरी आवाज में पूरी गर्ज है आज भी।
- पंकज शर्मा
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