- घर के रेनोवेशन के दौरान मिला था घर के फर्श के नीचे से सोने- चांदी के सिक्कों का खजाना
- पंकज शर्मा
अमृतसर, 18 जुलाई :
अमृतसर की गली तिवारियां वाली में मातम है। करोड़ों युवा दिलों पर राज करने वाले इस गली के गौरव व सपूत राजेश खन्ना आज इस भरी दुनिया को अल विदा कर गए है। जिस घर में राजेश खन्ना कभी बचपन में रहे थे उस घर के आसपास के लोगों के आंखों में राजेश खन्ना के चले जाने से आए आंसू साबित करते है कि लोगों के मनों में राजेश खन्ना की गहरी पैठ थी। राजेश खन्ना के चाचा का लडक़ा दुनी चंद खन्ना ठीक उसी घर के सामने वाले घर में रहते है जिस घर में राजेश खन्ना का बचपन बीता था।
बचपन की यादों को ताजा करते हुए दुनी चंद ने बताया कि राजेश खन्ना बचपन से ही काफी हंसमुख और मेल मिलाप वाला था। उसका व्यवहार हमेशा दोस्ताना हुआ करता था। पढ़ाई में वह ठीक ठीक ही था। दुनी चंद ने बताया कि राजेश खन्ना के पिता और उनके ताया चूनी लाल अपने परिवार के साथ आजादी के बाद लाहौर से भारत आ गए थे। यहां पर राजेश खन्ना पल कर बड़े हुए। शहर के गेट लोहगढ़ के अंदर संकरी गली तिवाडिय़ां और इस के आसपास के इलाके में राजेश खन्ना अपने हम उम्र दोस्तों के साथ खेला करता था। शाम में सभी दोस्त लुकन मीटी खेल खेलते थे। देर रात्रि तब मां बाप आवाजें लगाते तभी घर वापिस जाते थे। आपस में हम लड़ाई झगड़े भी किये करते थे। दिन को फिर एक जुट खेलते थे रात्रि में हुए आपसी लड़ाई झगड़े हम रात्रि नींद के खत्म होने के साथ ही भूल जाते थे।
दुनी चंद बताते है कि हमने कभी सोचा ही नहीं था कि राजेश कभी फिल्मों में काम करेगा। राजेश के पिता राजेश को हमेशा एक बड़ा बिजनेस मैन व व्यापारी ही बना देखना चाहते थे। राजेश के पिता कपड़े के व्यापारी थे। लाहौर अमृतसर पहुंच कर भी उन्होंने कपड़े का बिजनेस शुरू किया। अधितकर माल उसके पिता मुबई और दिल्ली भेजते थे। मुबई के मार्केट बढ़ी थी इस लिए राजेश के पिता चुनी लाल ने अपने कपड़े का बिजनेस मुबई शिफ्ट कर लिया। और राजेश व सारा परिवार मुबई शिफट हो गया। जब परिवार मुबई शिफ्ट हुआ तो उस समय राजेश करीब 10 -12 वर्ष का था। राजेश बड़ा हुआ तो फोन पर उनके पिता के साथ और उनके साथ बातचीत करता रहता था। यहां तक की अपने पुराने दोस्तों और अमृतसर के हालातों के संबंध में भी बातचीत करता था। जिस घर में राजेश खन्ना रहता था उस घर के बाहर एक शिवाला भी था। वर्ष 1980 में राजेश खन्ना के परिवार ने अपना घर 64 हजार रूपये में शिवाला मंदिर कमेटी को दे दिया। शिवाला मंदिर कमेटी के पदाधिकारियों विजय कुमार हांडा, शिवम केंसरी और जीवन सेठ ने बताया कि जब इस मकान को मंदिर के सुविधाओं के अनुसार रेनोवेट किया गया तो उस दौरान घर के एक फर्श में बने तहखाने में से एक खाजाने का संदूख निकला था। इस संदूख में से सोने व चांदी के पुराने सिक्के मिले थे। मंदिर कमेटी ने इन सिक्कों से ही बाद में घर की पूरी रेनोवेशन करके इसे मंदिर का बढिय़ा निर्माण किया। और घर में मंदिर की पूजा व अन्य धार्मिक कार्यक्रमों के लिए आवश्यक सुविधाएं जुटाई गई है।
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