- राजेश कई बार पंजाब आया पर अपने पुराने साथियों का हाल चाल और पुराने घर देखने नहीं आया इस बात का रंज है राजेश खन्ना के बचपन के दोस्त फकीर चंद को
- दोस्त और चचेरे भाई ने भी की राजेश खन्ना की आत्मा की शांति के लिए शिव मंदिर में प्रर्थना
अमृतसर,18 जुलाई :
राजेश खन्ना के पैतृक घर के साथ वाले घर में उनके बचपन के दोस्त फकीर चंद शर्मा रहते है। फकीर चंद कहते है कि मुझे उस समय पूरी होश है जब राजेश खन्ना तथा वह दोनो अपने अन्य दोस्तों के साथ गली में खेला करते थे। उस समय गलियां पक्की नहीं होती थी कही कहीं गलियों में ईटे लगी होती थी। हम दोपहर को और शाम को सूर्य ढलने से पहले कंचे खेला करते थे। राजेश खन्ना कंचे खेलने में काफी प्रवीण हुआ करते थे। सभी बचों से वह आसानी से कंचे जीत लेते थे। जब काफी कंचे हो जाते थे तो वह मुझे कुछ कंचे अपने घर में छुपा कर रखने को कहता था। राजेश कहता था कि अगर में बहुत सारे कंचे अपने घर लेकर जाउंगा तो घर के लोग उसे झिडक़ेंगे। शाम के समय सूर्य ढलने के बाद हम सभी देर रात्रि को लुक छ़ुप खेल खेला करते थे। जब राजेश करीब 11-12 वर्ष का था तो उसे पिता अपना कारोबार मुबई शिफ्ट करके ले गए जिस के बाद वह भी मुबई चला गया। एक दो बार वह जरूर बचपन में अपनी मां के साथ अपने रिश्तेदारों और चाचा के परिवार के लोगों का मिलने आया परंतु जब वह युवा हुआ तो फिर कभी भी वह अपने इस घर में नहीं आया। अमृतसर और पंजाब में भी राजेश खन्ना कई बार आया परंतु अपने पुराने घर और पुराने दोस्तों को मिलने कभी नहीं आया।
फरीक चंद कहते है कि राजेश की पहली फिल्म अरमान उसने सिनेमा में देखी थी परंतु वह फिल्म के दौरान पहचान नहीं सका था कि वह उसकी राजेश खन्ना की फिल्म देख रहा है जिस के साथ बचपन में वह कभी कंचे खेला करता था। जब राजेश खन्ना की चार पांच फिल्में बन गई और वह मश्हूर होने लगा तो तब पता चला की वह वही राजेश है जो उकने बचपन का साथी हुआ करता था। परंतु राजेश ने कभी भी कोशिश नहीं की कि वह अपने पुराने दोस्तों का हाल चाल ही जान सके। राजेश खन्ना के चाचा के लडक़े दुनी चंद, दोस्त फकीर चंद और शिवाला मंदिर कमेटी के सदस्यों ने राजेश खन्ना के आचानक निधन पर भगवान शिव मंदिर में राजेश खन्ना की आत्मा की शांति के लिए बुधवार को अरदास भी की।
-पंकज शर्मा
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