— कहां अगर अकाल तख्त ने रूकावटें हटाई है तो दीवान कैसे लगा सकता है उस पर आने जाने की रोक
अमृतसरश्री अकाल तख्त साहिब की ओर से लगाई गई रूकावटें हटने के बाद चीफ खालसा दीवान के पूर्व अध्यक्ष चरणजीत सिंह चड्ढा की ओर से राजनीतिक व समाजिक गतिविधियों को बढ़ाना शुरू कर दिया है। चड्ढा की ओर से एक बार फिर चीफ खालसा दीवान के अंदर अपना हस्तक्षेप शुरू करने की कोशिश की गई है। यहां तक के अलग अलग धार्मिक व समाजिक संस्थानों पहुंच कर भी चड्ढा ने सम्मनित होना शुरू कर दिया है। जिस को लेकर दीवान की मौजूदा कार्यकारिणी ने दीवान के संस्थानों के अंदर चरणजीत सिंह चड्ढा के प्रवेश पर रोक लगा दी है। इस रोक के बाद चड्ढा ने दीवान के मौजूदा नेतृत्व के खिलाफ श्री अकाल तख्त साहिब पर शिकायत देने का एलान कर दिया है।
मीडिया के बातचीत के दौरान चड्डा ने कहा कि चीफ खालसा दीवान का मौजूदा नेतृत्व हिटलरशाही नीतियों पर चल रहा है। उसे दीवान के गुरुद्वारों में भी प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा है। जबकि अकाल तख्त साहिब ने उसे क्लीन चिट दे दी है। वर्ष 2019 में उसने अमृतपान भी अकाल तख्त तख्त साहिब से अपनी पत्नी के साथ किया था। वर्ष 2018 में अकाल तख्त साहिब की ओर से उस पर जो रोक लगाई गई थी उस को वर्ष 2021 में हटा दिया गया है। इस लिए दीवान के मौजूदा नेतृत्व के पास अधिकार नही रहता है कि उसको दीवान के संस्थानों आने जाने से रोके। यह भी आरोप लगाए कि मौजूदा नेतृत्व खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ा रहा है।
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दीवान के पूर्व अध्यक्ष चरणजीत सिंह चड्ढा की ओरा से लगाए गए आरोपों के संबंध में चीफ खालसा दीवान के पूर्व अध्यक्ष निर्मल सिंह ने कहा कि चड्ढा पर दीवान के संस्थानों में आने जाने से रोक दीवान की कार्यकारिणी कमेटी ने सर्वसमिति से प्रस्ताव पारित करते लगाए है। चड्ढा इस वक्त दीवान का प्राथमिक सदस्य भी नही है। दीवान के अलग अलग संस्थानों में 90 प्रतिशत के करीब स्टाफ महिलाओं का है। 60 प्रतिशत से अधिक बच्चियां शिक्षण संस्थानों में पढ़ती है। चड्ढा की जो अशलील वीडियो एक महिला के साथ अश्लील हरकतें करने की सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी वह आज भी सोशल मीडिया पर है। अगर चड्ढा संस्थानों में आए जाएगा तो उसकी सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो का प्रभाव महिला कर्मचारियों और विद्यार्थियों पर उल्ट पड़ सकता है। चड्ढा की गतिविधियों से जो दीवान का अक्स खराब हुआ था वह लोगों के मनों में दोबारा आ सकता है। जिस से कर्मचारियों को मानसिकत आहत हो सकता है। इस लिए कार्यकारिणी ने जो फैसला लिया है। वह सही फैसला है।
— पंकज शर्मा
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