बुधवार, 11 नवंबर 2020

एसजीपीसी के तीन डिसमिस कर्मचारी गए न्याय के लिए हाई कोर्ट

— कहा एसजीपीसी अधिकारियो ने उनको गायब स्वरूपों के मामले में फंसाया है गलत

— अपने निर्दोष होने संबंधी सारे सबूत वह पहले ही दिखा चुके थे एसजीपीसी के अध्यक्ष को
 अमृतसर
श्री गुरु ग्रंथ साहिब के गायब 328 स्वरूपों के मामले में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से दोषी एलान किए गए तीन कर्मचारियों ने पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट में केस दायर कर एसजीपीसी के फैसले को चुनौती दे दी है।
इस मामले में अदालत ने एसजीपीसी से जवाब मांग लिया है।
एसजीपीसी के फैसले के खिलाफ यह केस एसजीपीसी के पब्लिकेशन विभाग के उप सचिव गुरबचन सिंह , बाज सिंह और दलबीर सिंह की ओर से दायर किया गया है। एसजीपीसी ने गायह हुए श्री गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूपों के मामले में पांच कर्मचारियों को नौकरी से डिसमिस कर दिया था जबतक पांच कर्मचारियों को निलंबित कर दिया था। डिसमिस कर्मचारियों ने यह केस दायर किया है।
केंस के संबंध में गुरबचन सिह कहा कि उनकी ओर से अदालत में एसजीपीसी के फैसले को चुनौती दी गई है। एसजीपीसी उनके के उपर गलत दोष लगाए है। वह जुलाई माह में रिटायर हो गए थे। पंरतु उनके सेवा काल में वृद्धि कर दी गई और कुछ दिनों के बाद ही उनको मामले में झूठा फंसा दिया गया। उन्होंने कहा कि पब्लिकेशन विभााग में जब से आग लगी थी तब से स्वरूपप कम चले आ रहे थे। उस वक्त वे इस विभाग से संबंधित नही थे। उनका कहना है कि एसजीपीसी के अध्यक्ष गोबिंद सिंह लोंगोवाल और पूर्व अध्यक्ष बीबी जगीर कौर को भी वे मिले थे। और लगाए गए दोषों को रद्द करने के संबंधी दस्तावेज भी पेश किए थे। परंतु भरोसा देने के बाद भी उनके खिलाफ कार्रवाई कर दी गई। इस लिए वह न्याय के लिए अदालत में गए है। उन्होंने अदालत के माध्यम से मांग की है कि वह सेवा काल में वृद्धि नही चाहते है। वही उनकी सेवा मुक्ति के सभी लाभ भी अदालत दिलवाए। विभाग के कलर्क बाज सिंह का दावा है कि उसे भी इस मामले में गल्त फंसाया गया है। वह सच्चा सिंह इस सबंध में उसके पास सभी सबूत है। जिन संबंधी उसने एसजीपीसी के अध्यक्ष व अन्य अधिकारियों को भी जानकारी दी थी। उस वक्त उसे चुप्प् रहने को कहा गया था। परंतु उसे न्याय नही दिया गया और उसे दोषी बना दिया गया। जानकारी के अनुसार एसजीपीसी की ओर से भी इस संबंधी अदालत में अर्जी दायर करके अपील की गई है कि अदालत इस मामले संबंधी फैसला लेने से पहले एसजीपीसी का पक्ष जरूर सुने।
मामले के संबंध में एसजीपीसी के अध्यक्ष गोबिंद सिह लोगोंवाल ने कहा कि अब तक अदालत की ओर से इस संबंधी कोई भी जवाब एसजीपीसी से मांग नही गया है। जो भी जवाब मांगा जाएगा उसे कानूनी माहिरों की सहायता से अदालत को दिया जाएगा। इस मामले को लेकर एसजीपीसी ने पहले ही कानूनी विशेषज्ञों की कमेटी बनाई गई है। इस में और भी कानूनी विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा।
— पंकज शर्मा

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