— कम्बाइनों की कमी भी इस बार बनेगी कटाई में देरी का कारण
— अनाज मंडियों में भी नहीं मिल रहे अनाज की सफाई के लिए मजदूर
अमृतसर
कोरोना के बढ चुके प्रभाव के कारण चल रहे लाक डाउन व कर्फ्यू से मजदूरों की कर्मी बडी समस्या बन गई है। मजदूर न तो अनाज मंडियों में आढतियों को जरूरत के अनुसार मिल रहे है और नही किसानों को गेंहू की पक पर तैयार फसल की की कटाई के लिए मिल रहे है। इस के चलते यहां अनाज मंडियों में गेंहू की साफ सफाई के काम की गति धीमी हो सकती है वहीं किसानों को फसल की कटाई भी समय पर होने की उम्मीद नहीं दिखाई दे रही है।जब कि हर वर्ष जम्मू कश्मीर , यूपी और बिहार से बडी संख्या में मजदूर खेतों में गेंहू की कटाई और धान की फसल की बुआई और अनाज मंडियों में काम करने के लिए आते थे। इस बार इन मजदूरों के न आने के कारण खेती के काम प्रभावित हो रहा है।
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न मजदूर मिल रहे न ही कम्बाईने
किरती किसान यूनियन के नेता जतिंदर सिंह छीना और पंजाब किसान सभा के नेता बलविंदर सिंह दुधाला कहते है कि इस बार सरकार की ओर से कंबाईन मालिकों को प्रति एकड कटाई के लिए 1800 रूपये से लेकर 2200 रूपये प्रति एकड रेट तय किया है। परंतु मजदूरों की कमी को मुख्य रखते हुएइस बार कम्बाईन मालिक भी मनमर्जी करते हुए 2500 रूपये से लेकर 2800 रूपए तक वसूल रहे है। जबकि हाथ से काटने वाले मजदूर 2700 व 2800 रूपये प्रति एकड़ के हिसाब से ले रहे है। मजदूरों की कमी के कारण इस बार सब से अधिक मुश्किल पांच एकड़ या इस से कम भूमि के मालिक किसानों को झेलनी पड़ रही है। क्योंकि कम्बाईन के मालिक किसान 15 से 20 एकड़ से कम भूमि की कटाई का काम नहीं करते है। अगर किसान इकट्टा होकर भी गेंहू कटवाएं तो उनको ट्रैक्टरों की कमी मुश्किल बन जाती है। बहुत सारी कम्बाईने बाहरी राज्यों में गई है जो अभी वापिस नहीं आई है। जो बडी मुश्किल है।
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मंडी में अनाज की सफाई के लिए नहीं मिल रहे मजदूर
मंडी मजदूर यूनियन के नेता राकेश कुमार तुली ने बताया कि इस वक्त मंडियों में सब से अधिक मुश्किल मजदूरों की आ रही है। लाक डाउन के कारण यूपी, बिहार व जम्मू कश्मीर से लेबर नही आई है। जिस से मजदूरों की कमी बडी मुश्किल है। प्रशासन ने चाहे इस बार आढतियों को अपनी अपनी दुकानों के लिए 8 से 10 मजदूरों की व्यवस्था करने के लिए कहा गया है। फिर भी जरूरत के अनुसार मजदूरों की कमी रहेगी। क्योंकि अमृतसर ,तरनतारन व जलंधर से सब से अधिक मजदूर जम्मू कश्मीर, यूपी और बिहार से ही आते है। अभी तक चाहे मंडी में गेंहू नही आया है मंडी मे सिर्फ 80 से 95 तक मजदूर ही उपलब्ध है। जबकि आम तौर पर सीजन में 2200 तक मजदूरों की जरूरत होती है। उन्होंने बताया कि इस बार आढती ही अपने स्तर पर मजदूरों का प्रबंध करने में लगे हुए है।
— पंकज शर्मा
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