— जीएनडीयू के अधिकारी आरटीआई का जवाब देने पर नहीं दिखा रहे है गंभीरता
— अपनों की जानकारी देने की जगह सही जवाब नहीं देते है आरटीआई के प्रार्थी को
जागरण संवाददाता, अमृतसर
गुरू नानक देव विश्वविद्यालय प्रशासन आरटीआई के जवाब देने के प्रति गंभीर नही है। अधिकारी यहां विवादों में फंसते दिखाई दे रहे हो वहां विभाग जवाब देना ही उचिव नहीं समझा। बल्कि टाल मटोल वाल उत्तर देकर समया बिताने की कोशिश करता है। एक ऐसा ही मामला जीएनडीयू में आरटीआई का तब सामने आया जब जीएनडीयू की ही एक प्रोफेसर ने विश्वविद्यालय के वीसी की योग्तिाएं और उसकी ओर से हासिल किए अलग अलग संस्थानों के सर्टीफिकेटों की जानकारी मांगी को जवाब मिला की विश्वविद्यालय के पास मौजूदा वीसी का रिकार्ड ही नही है। यह सारा रिकार्ड डिस्ट्राय कर दिया गया है। अब इस मामले के संबंध में अपील अथार्टी के पास शिकायत डाली गई है। जिसका भी काफी समय बीत जाने के बाद भी जवाब नहीं दिया गया है।
यह मामला उस वक्त सामने आया जब जीएनडीयू के संगीत विभाग की एक प्रध्यापिका ने जीएनडीयू के जन सूचना अधिकारी से आरटीआई के माध्यम से जवाब मांग कि उसे बताया जाए कि जब जीएनडीयू के मौजूदा वीसी डा जसपाल सिंह को वीसी बनने से पहले एक प्रध्यापक के रूप में रखा गया था तो उसने अपनी योगिताओं के जो सर्टीफिकेट दिए थे उनकी सर्टीफाइड जानकारी उसे उपलब्ध करवाई जाए। यह भी मांग की गई थी कि बताया जाए कि मौजूदा वीसी ने अपना कौन सा बायोडाटा विश्वविद्यालय को जमा करवाया है। उसमें जिन संस्थानों से अलग अलग सर्टीफिकेट हासिल किए है उन संस्थाओं की क्या मान्यता है। यह भी मांगा गया कि मौजूदा वीसी ने जब वीसी के पद के लिए एप्लाई किया तो उस वक्त क्या क्या एकादमिक योगिताएं , व अन्य योगिताओं के सर्टीफिकेट, पीएचडी की डिग्री व और क्या क्या सर्टीफिकेट और योगिताएं प्रार्थना पत्र में दर्ज की थी। यह भी मांगा गया कि आज तक मौजूदा वीसी के कितने और कौन से आर्टीकल नियमों के अनुसार जो विभिन्न अकादमिक पत्रिताकों में प्रकाशित होने चाहिए वो कितने और कहा कहा प्रकाशित हुए है । परंतु विश्वविद्यालय ने यह कह कर जवाब देने के इंकार कर दिया कि एक तो मौजूदा वीसी के संबंधी सारा रिकार्ड डिस्ट्राय कर दिया गय है दूसरा यह जवाब थर्ड पार्टी को नहीं दिया जा सकता।
यह भ्री सामने आया कि विश्वविद्यालय अलग अलग विभागों के प्रध्यापकों जिनका विश्वविद्यालय प्राशासनिक अधिकारियों के साथ निकटता है उनकी और से फैलाई अनियमितताओं संबंधी कोई भी जवाब आरटीआई के मामध्य से देना जरूरती नहीं समझते। जबकि विश्वविद्यालय प्रकाशस के विरोधी अधिकारियों और प्रोफेसरों व कर्मचारियों की सूचना बिना किसी आरटीआई के ही प्रचारित कर देते है। प्रध्यापिका प्रो गुरप्रीत ने कहा कि उसने विश्वविद्यालय के कई अन्य अधिकारियों के संबंध में भी अलग अलग सूचनाएं देने के लिए आरटीआई डाली हुई है जिनका जवाब समय खत्म होने के बाद भी उनको नहीं दिया जा रहा। इस लिए वह अब इस मामले को लेकर सूचना कमिशन पंजाब और हाईकोर्ट में भी जाएगी।
— पंकज शर्मा
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