— पंजाब एवं नेशनल अनुसूचित जाति आयोग सहित जीएनडीयू प्रबंधन को भेजी शिकायत
अमृतसर
गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के कांस्टीच्यूएंट कालेज बेबे नानकी
मिट्ठड़ा के प्रबंधक विवादों में घिरने शुरू हो गए है। जीएनडीयू के
अधिकारी मुद्दे को लेकर चुप्पी धारण किए हुए है। कालेज की ही एक
प्राध्यापिका द्वारा प्रिंसीपल के खिलाफ प्रताडित करने की शिकायत का अभी
तक कोई फैसला नही हुआ है। जबकि प्रिंसिपल के खिलाफ एक अन्य पटीशन
जीएनडीयू के एडहाक प्राध्यापक यूनियान के अध्यक्ष डा गुरप्रीत सिंह ने
पंजाब एससी आयोग के साथ साथ राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोद में दायर कर दी
है। इस की प्रतिया प्रभावित प्रोफेसर की ओर से जीएनडीयू के रजिस्ट्रार डा
केएस काहलों और वीसी डा जसपाल सिंह को भी भेज दी है। एक एक प्रति
विश्वविद्यालय के चांसलर और पंजाब के राज्यपाल तथा कपूरथला के डीसी कोे
भी भेजी गई है। शिकायत में आरोप लगाए गए है कि कालेज के प्रिंसिपल की ओर
से उसके साथ जाति सूचक शब्दों का उपयोग किया है। जिस की रिकार्डिंग की
सबूत के रूप में उसके पास है। इस लिए मामले की जांच की जाए और आरोपी के
खिलाफ एक्ट के अनुसार कानूनी कार्रवाई की जाए।
उल्लेखनीय है कि इस से पहले इसी कालेज पंजाबी विभाग की एडहाक
प्राध्यापिका ने भी कालेज के एक अंग्रेजी विभाग के प्रोफेसर और प्रिंसिपल
के उपर मानसिक रूप में प्रताडित करने के लिखित आरोप लगाए थे जिस की जांच
अभी तक विचाराधीन है। इस संबंध में अधिकारी चाहे मामले को ठंडे बस्ते
में डाल रहे है पंरतु एडहाक प्राध्यापक यूनियन के अलावा इस मामले संबंधी
किसी ने एक्शन नहीं लिया।
जीएनडीयू एडहाक प्राध्यापक यूनियन के महासचिव प्रो सुखदेव सिह और
उपाध्यक्ष विशाल शर्मा ने बताया कि इसी बौखलाहट में आकर प्रिंसीपल
द्वारा 21 अगस्त को सुबह अपने उक्त महिला प्राध्यापिका को अपने कार्यालय
में बुलाकर अनाप शनाप बोलने के साथ साथ यूनियन के अध्यक्ष के खिलाफ भी
जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया। जिसके सबूत यूनियन के पास भी मौजूद है।
मामले को लेकर यूनियन के अध्यक्ष डा.गुरप्रीत सिंह ने बताया कि उक्त
कालेज में केवल एक ही पटीशनर प्राध्यापिका है जिस पर मानसिक रूप से दबाव
बनाकर उसे नौकरी छोडऩे के लिए मजबूर किया जा रहा है। उनके अनुसार वे अपनी
अधिकारिक मांगों के लिए संघर्ष कर रहे हैं ऐसे में उनके प्रति जातिसूचक
शब्दों का प्रयोग करके उन्हें अपमानित करना कहां तक उचित है। उन्होंने
मांग की कि प्रिंसीपल के खिलाफ जांच के उपरांत कार्रवाई की जाए। शिकायत
को लेकर विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डा केएस काहलों से संपर्क किया गया
तो उनकी ओर से फोन नही उठाया गया।
— पंकज शर्मा
अमृतसर
गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के कांस्टीच्यूएंट कालेज बेबे नानकी
मिट्ठड़ा के प्रबंधक विवादों में घिरने शुरू हो गए है। जीएनडीयू के
अधिकारी मुद्दे को लेकर चुप्पी धारण किए हुए है। कालेज की ही एक
प्राध्यापिका द्वारा प्रिंसीपल के खिलाफ प्रताडित करने की शिकायत का अभी
तक कोई फैसला नही हुआ है। जबकि प्रिंसिपल के खिलाफ एक अन्य पटीशन
जीएनडीयू के एडहाक प्राध्यापक यूनियान के अध्यक्ष डा गुरप्रीत सिंह ने
पंजाब एससी आयोग के साथ साथ राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोद में दायर कर दी
है। इस की प्रतिया प्रभावित प्रोफेसर की ओर से जीएनडीयू के रजिस्ट्रार डा
केएस काहलों और वीसी डा जसपाल सिंह को भी भेज दी है। एक एक प्रति
विश्वविद्यालय के चांसलर और पंजाब के राज्यपाल तथा कपूरथला के डीसी कोे
भी भेजी गई है। शिकायत में आरोप लगाए गए है कि कालेज के प्रिंसिपल की ओर
से उसके साथ जाति सूचक शब्दों का उपयोग किया है। जिस की रिकार्डिंग की
सबूत के रूप में उसके पास है। इस लिए मामले की जांच की जाए और आरोपी के
खिलाफ एक्ट के अनुसार कानूनी कार्रवाई की जाए।
उल्लेखनीय है कि इस से पहले इसी कालेज पंजाबी विभाग की एडहाक
प्राध्यापिका ने भी कालेज के एक अंग्रेजी विभाग के प्रोफेसर और प्रिंसिपल
के उपर मानसिक रूप में प्रताडित करने के लिखित आरोप लगाए थे जिस की जांच
अभी तक विचाराधीन है। इस संबंध में अधिकारी चाहे मामले को ठंडे बस्ते
में डाल रहे है पंरतु एडहाक प्राध्यापक यूनियन के अलावा इस मामले संबंधी
किसी ने एक्शन नहीं लिया।
जीएनडीयू एडहाक प्राध्यापक यूनियन के महासचिव प्रो सुखदेव सिह और
उपाध्यक्ष विशाल शर्मा ने बताया कि इसी बौखलाहट में आकर प्रिंसीपल
द्वारा 21 अगस्त को सुबह अपने उक्त महिला प्राध्यापिका को अपने कार्यालय
में बुलाकर अनाप शनाप बोलने के साथ साथ यूनियन के अध्यक्ष के खिलाफ भी
जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया। जिसके सबूत यूनियन के पास भी मौजूद है।
मामले को लेकर यूनियन के अध्यक्ष डा.गुरप्रीत सिंह ने बताया कि उक्त
कालेज में केवल एक ही पटीशनर प्राध्यापिका है जिस पर मानसिक रूप से दबाव
बनाकर उसे नौकरी छोडऩे के लिए मजबूर किया जा रहा है। उनके अनुसार वे अपनी
अधिकारिक मांगों के लिए संघर्ष कर रहे हैं ऐसे में उनके प्रति जातिसूचक
शब्दों का प्रयोग करके उन्हें अपमानित करना कहां तक उचित है। उन्होंने
मांग की कि प्रिंसीपल के खिलाफ जांच के उपरांत कार्रवाई की जाए। शिकायत
को लेकर विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डा केएस काहलों से संपर्क किया गया
तो उनकी ओर से फोन नही उठाया गया।
— पंकज शर्मा
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