— जत्थेदार के आदेशों के बाद एसजीपीसी ने भी किया मामले को लेकर गृह
मंत्री से मिलने का एलान
, अमृतसर
श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह ने पटियाला जेल में
बंद फांसी की सजा का इंतजार कर रहे बलवंत सिंह राजोआना के मामले में
एसजीपीसी की ढुलमुल कार्रवाई का कड़ा संज्ञान लिया है। इस मुद्दे पर सिंह
साहिब ने एसजीपीसी और दिल्ली कमेटी के अध्यक्षकों को मामले को गंभीरता से
लेने के लिए कहा है। अकाल तख्त के जत्थेदार ने भी इस सबंधी एसजीपीसी की
खिचाई तब की जब राजोआना में जेल के अंदर अनशन रखने की धमकी दी और इस को
लेकर विभिन्न सिख संगठनों ने आवाज बुलंद करनी शुरू कर दी। जत्थेदार की ओर
से इस मामले संबंधी नोटिस लेने के बाद एसजीपीसी ने भी मामले को लेकर 18
जुलाई को केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के साथ मुलाकात करने का एलान
कर दिया है।
श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदर ज्ञानी गुरबचन सिंह ने एसजीपीसी और
दिल्ली कमेटी के अध्यक्षों को सख्ती से कहा है कि वह अपने सारे अन्य
कामों को छोड़ कर राजोआने के मामले की गंभीरता को समझते हुए राजोआना के
लिए राष्ट्रपति के समक्ष की गई रहम की अपील पर सही ढंग से फालोअप करें।
क्योंकि सरकारें जेलों में बंद व अपनी सजाए पूरी कर चुके सिखों की रिहाई
के प्रति गंभीरता नहीं दिखा रही है। जिस को मुख्य रख बलवंत सिंह राजोआना
अनशन करने के लिए मजबूर हो रहे है। राजोआना ने पटियाला की जेल में 16 से
अनशन शुरू कर दिया है। जेल के सुपरिटेंडेंट को लिखे पत्र में राजोआना ने
कहा कि अकाली दल की ओर से 28 मार्च 2012 को राष्ट्रपति के पास उसकी फांसी
की सजा को उम्र कैद में बदलने के लिए अपील दायर की थी। परंतु बाद में इस
अपील पर कोई भी पैरवाई नहीं की गई। जिस के चलते राजोआना ने अनशन शुरू कर
दिया है। इस मुद्दे के लेकर अकाली दल के खिलाफ सिख कौम के अंदर कोई बडा
विरोध पैदा न हो जाए। इस को मुख्य रख जत्थेदार अकाल तख्त ने दिल्ली कमेटी
और एसजीपीसी के अध्यक्षों को राजोआना मामले पर पैरवाई करने के आदेश दिए
है।
— पंकज शर्मा
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