सदियो बाद ह्आ है उजला
जाने क्यो सुधियो का दर्पन
हार गई वैरागन प्रग्या
जीत गया तन का सम्मोहन
चहक उठे है चंचल खंजन
याद किसी के आए लोचन
लगे बबूल कल्पतरू जैसे
माटी लगी महकता चंदन
Anita Gaur
जाने क्यो सुधियो का दर्पन
हार गई वैरागन प्रग्या
जीत गया तन का सम्मोहन
चहक उठे है चंचल खंजन
याद किसी के आए लोचन
लगे बबूल कल्पतरू जैसे
माटी लगी महकता चंदन
Anita Gaur
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