शुक्रवार, 26 नवंबर 2010

क्योंकि मैं एक स्त्री हूँ

जब मैंने जन्म लिया ,

तब से ही

मैंने शुरू किया ,

प्रहार झेलना ,

पुरुषों के बनाये हुए नियमों की,

बंदिशों

से मैं लहू लुहान हुई ,

किन्तु मरी नहीं ,

क्योंकि मैं एक स्त्री हूँ ,........

इसलिए मैं जिन्दा हूँ ,


मैं जिस रास्ते से होकर चलती हूँ.

उस

पर कांटे बिछे हुए हैं ,

मैं अपनी रफ़्तार कितनी भी तेज करुँगी ,

मेरे

अतीत में वे उतने ही ज़ख्म डालेंगे ,

मुझे

मेरी सीमित बातचीत ,

सीमित राह, सीमित इच्छायों ,

और सीमित सपनों के

बारे में ,

सम्यक ज्ञान दिया जायेगा ,

मुझे

मजबूर किया जायेगा ,

दुर्बल, कोमल, भीरु और लाजबन्ती होने के लिए ,

फिर

वो मुझे अबला का नाम देंगे ,

फिर भी

वो मुझे रोक नहीं पाएंगे ,

न ही पूर्ण कर पाएंगे वो अपना नरमेघ यज्ञ ,



क्योंकि



मैं चिरंजीवी हूँ ,

और जब मैं इस दुनियां में आयी थी ,

तभी मैंने

प्रण कर लिया था ,

नहीं पूरी करनी देनी है ,

मुझे मंशा उनकी

और ,

उन्हीं के दायरे में ही मुझे रहकर ,

आगे

और उनसे कहीं आगे बढ़कर दिखाना है ,



--------------- KIRAN SRIVASTAVA MEETU

कोई टिप्पणी नहीं: