गुरुवार, 8 जुलाई 2010

हर पखवाड़े बदलेंगे पेट्रोल के दाम!

नई दिल्ली। सरकारी तेल कंपनियां विमान ईंधन यानी एटीएफ की तरह अब पेट्रोल के दाम भी हर 15 दिन में बदलने की तैयारी कर रही हैं। ग्लोबल बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आने वाले उतार-चढ़ाव के हिसाब से पेट्रोल की कीमतें भी घट-बढ़ जाया करेंगी। पेट्रोल के नियंत्रणमुक्त दाम की नई व्यवस्था अगले सप्ताह से शुरू हो सकती है।




सरकार ने इस साल जून के अंत में पेट्रोल के दाम नियंत्रणमुक्त कर दिए थे। इस निर्णय के बाद दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 3.50 रुपये प्रति लीटर बढ़ गई। इसके साथ ही सरकार ने पेट्रोल की खुदरा कीमतों में बदलाव के तौर-तरीके तय करने का मामला उद्योग पर ही छोड़ दिया।



सूत्रों ने बताया कि इंडियन आयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने कीमतों में बदलाव के तौर तरीके तय करने पर गुरुवार से चर्चा शुरू कर दी है। निजी कंपनियां- रिलायंस इंडस्ट्रीज, एस्सार आयल और रायल डच-शेल ने भी इस मसले पर विचार-विमर्श कर रही हैं। ज्यादातर कंपनियों का मानना है कि पेट्रोल कीमतों में बदलाव हर पखवाड़े किया जाना चाहिए। वहीं, देश की सबसे बड़ी तेल कंपनी इंडियन आयल कीमतों में जल्दी-जल्दी बदलाव के पक्ष में नहीं है। उसका मानना है कि इससे इससे पेट्रोल पंप जमाखोरी कर सकते हैं।



पेट्रोल कीमतों में 15 दिन में बदलाव के समर्थकों का कहना है कि तेल कंपनियों के पास ऐसा तंत्र पहले से ही है, जिसमें महीने की पहली और 16 तारीख को ईंधन के मूल्य घोषित किए जाते हैं। एटीएफ को सरकार ने वर्ष 2002 में नियंत्रणमुक्त किया था। तभी से इसकी कीमतों में हर पखवाड़े समीक्षा के बाद बदलाव किया जाता है। भाजपा के नेतृत्व वाली राजग सरकार ने वर्ष 2002 में पेट्रोल व डीजल मूल्यों को नियंत्रणमुक्त किया था। उसके बाद एक अप्रैल, 2002 से 21 माह तक हर 15 दिन पर कीमतों में बदलाव किया गया। लेकिन मई, 2004 में आम चुनाव से कुछ माह पहले इस व्यवस्था को रोक दिया गया। संप्रग सरकार के सत्ता में आने के बाद पेट्रोल व डीजल की कीमतें फिर सरकार के नियंत्रण में आ गईं।



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