— पाकिस्तानी गजल गायक गुलाम अली को निर्मल सिंह ने धारण किया था अपना उस्ताद
अमृतसर
सिख पंथ के चर्चित प्रसिद्ध कीर्तनीए व श्री हरिमंदिर साहिब के पूर्व हजूरी रागी भाई निर्मल सिंह खालसा का कोरोना वायरस की बीमारी के प्रभाव के चलते देहांत हो गया। खालसा का जन्म 12 अप्रैल 1952 को जंडवाला भीम सिंह गांव जिला फिरोपुर में हुआ। उन्होंने 5वीं तक स्कूली शिक्षा हासिल की थी। इस के बाद उन्होंने अमृतसर के शहीद सिख मिशनरी कालेज से वर्ष 1974 से लेकर 1976 तक गुरमति संगीत में डिप्लोमा हासिल किया। वर्ष 1977 में वह ऋषिकेष स्थित गुरमति कालेज में संगीत के अध्यापक की सेवाएं भी देते रहे। वर्ष 1978 में वह शहीद सिख मिशनरी कालेज बुढ्ढा जौहर गंगानगर राजस्थान में भी संगीत अध्यापक की सेवाएं देते रहे। वर्ष 1979 में उनको श्री हरिमंदिर साहिब में एसजीपीसी की ओर से हजूरी रागी तैनात किया गया। हजूरी रागी के रूप में निर्मल सिंह की ओर से सिख पंथ के पांचों तख्तों और अलग अलग इतिहासिक गुरुद्वारों में भी कीर्तन किया। दुनिया के करीब 71 देशों में जाकर निर्मल सिंह कीर्तन व प्रचार किया।
निर्मल सिख खालसा पहले रागी थे जिन्होंने श्री गुरु ग्रंथ साहिब में दर्ज 31 रागों की पूर्ण जानकारी थी। पाकिस्तान के गजल गायक गुलाम अली को निर्मल सिंह ने अपना उस्तार धारण किया था। वह पहले रागी थे जिन्होंने गुलाम अली के साथ मिल कर कीर्तन किया और इस की एक एलबम भी तैयार करवाई। वर्ष 2009 में निर्मल सिंह को भारत सरकार की ओर से कला के क्षेत्र में पदम श्री अवार्ड प्रदान किया गया। इस अवार्ड की सूची में उनका नाम 23वें नंबर पर था। निर्मल सिंह ने दश्म ग्रंथ की बाणी की भी पूर्ण जानकारी थी। इस ग्रंथ की बाणी का भी निर्मल सिंह की ओर से रागों में गायन किया गया था।
निर्मल सिंह की 50 से अधिक आडियों, वीडियो, वीसीडी, डीवडी व एमपी थ्री कैसिटें अलग अलग म्यूजिक कंपनियों टी सीरिज, म्यूजिक टूडे, म्यूजिक मैमरीज , टिप्स, फाइन टच और सागा आदि ने तैयार करके रिलीज की थी। निर्मल सिंह पंजाब सरकार की भाषा विभाग की एडवाईजरी कमेटी के भी सदस्य रहे। एसजीपीसी की ओर से रागियों के चयन के लिए गठत की गई कमेटी के भी वह सदस्य थे। उनकी पत्नी का नाम नसीब कौर है। उनके दो बेटे व दो बेटियां है। एक बेटा अमरीका में है। एक बेटी की शादी हो चुकी है। वर्ष 1918 में गणतंत्र दिवस की परेड में शामिल होने वालों के लिए लंगर की सेवा उपर पंजाब सरकार की ओर से तैयार की गई झांकी का संगीत संगत व पंगत को भी तांती साजों के माध्यम से निर्मल सिंह ने ही तैयार करवाया था। ना को बैरी नहीं बिगाना सगल संगि हम काउ बान आई के शब्द का गायन भी गणतंत्र दिवस पर राजपथ पर जा चलाया गया वह भी निर्मल सिंह की ओर से गाया गया था।
निर्मल सिंह 4 दिसंबर को यूके से भारत आए। इस के बाद वह 2 मार्च को रागी बलबीर सिंह के भोग में कीर्तन करने के लिए गए थे 19 मार्च को उन्होंने चंडीगढ की कोठी नंबर 27 ए में कीर्तन किया। उनकों खांसी , बुखर , थकावट व सांस लेने में मुश्किल की समस्या पैदा हो गई। 21 मार्च को वह गुरु नानक देव अस्पताल में चैकअप के लिए गए। वहां उनकी थोड़ी बहुत जांच करके बाद घर भेज दिया गया। उनकी समस्या ठीक न हुई तो वह श्री गुरु रामदास मेडिकल कालेज व अस्पताल में चैकअप करवाने के लिए गए। वहां उनकी हालत गंभीर लगी तो उनको गुरु नानक देव अस्तपाल में दोबारा भेजा गया। वहां उनके कोरोना वायरस की रिपोर्ट एक अप्रैल को पाजिटव आई। 2 अप्रेल को सुबह करीब सवा चार बने उनका देहांत हो गया।
— पंकज शर्मा
सिख पंथ के चर्चित प्रसिद्ध कीर्तनीए व श्री हरिमंदिर साहिब के पूर्व हजूरी रागी भाई निर्मल सिंह खालसा का कोरोना वायरस की बीमारी के प्रभाव के चलते देहांत हो गया। खालसा का जन्म 12 अप्रैल 1952 को जंडवाला भीम सिंह गांव जिला फिरोपुर में हुआ। उन्होंने 5वीं तक स्कूली शिक्षा हासिल की थी। इस के बाद उन्होंने अमृतसर के शहीद सिख मिशनरी कालेज से वर्ष 1974 से लेकर 1976 तक गुरमति संगीत में डिप्लोमा हासिल किया। वर्ष 1977 में वह ऋषिकेष स्थित गुरमति कालेज में संगीत के अध्यापक की सेवाएं भी देते रहे। वर्ष 1978 में वह शहीद सिख मिशनरी कालेज बुढ्ढा जौहर गंगानगर राजस्थान में भी संगीत अध्यापक की सेवाएं देते रहे। वर्ष 1979 में उनको श्री हरिमंदिर साहिब में एसजीपीसी की ओर से हजूरी रागी तैनात किया गया। हजूरी रागी के रूप में निर्मल सिंह की ओर से सिख पंथ के पांचों तख्तों और अलग अलग इतिहासिक गुरुद्वारों में भी कीर्तन किया। दुनिया के करीब 71 देशों में जाकर निर्मल सिंह कीर्तन व प्रचार किया।
निर्मल सिख खालसा पहले रागी थे जिन्होंने श्री गुरु ग्रंथ साहिब में दर्ज 31 रागों की पूर्ण जानकारी थी। पाकिस्तान के गजल गायक गुलाम अली को निर्मल सिंह ने अपना उस्तार धारण किया था। वह पहले रागी थे जिन्होंने गुलाम अली के साथ मिल कर कीर्तन किया और इस की एक एलबम भी तैयार करवाई। वर्ष 2009 में निर्मल सिंह को भारत सरकार की ओर से कला के क्षेत्र में पदम श्री अवार्ड प्रदान किया गया। इस अवार्ड की सूची में उनका नाम 23वें नंबर पर था। निर्मल सिंह ने दश्म ग्रंथ की बाणी की भी पूर्ण जानकारी थी। इस ग्रंथ की बाणी का भी निर्मल सिंह की ओर से रागों में गायन किया गया था।
निर्मल सिंह की 50 से अधिक आडियों, वीडियो, वीसीडी, डीवडी व एमपी थ्री कैसिटें अलग अलग म्यूजिक कंपनियों टी सीरिज, म्यूजिक टूडे, म्यूजिक मैमरीज , टिप्स, फाइन टच और सागा आदि ने तैयार करके रिलीज की थी। निर्मल सिंह पंजाब सरकार की भाषा विभाग की एडवाईजरी कमेटी के भी सदस्य रहे। एसजीपीसी की ओर से रागियों के चयन के लिए गठत की गई कमेटी के भी वह सदस्य थे। उनकी पत्नी का नाम नसीब कौर है। उनके दो बेटे व दो बेटियां है। एक बेटा अमरीका में है। एक बेटी की शादी हो चुकी है। वर्ष 1918 में गणतंत्र दिवस की परेड में शामिल होने वालों के लिए लंगर की सेवा उपर पंजाब सरकार की ओर से तैयार की गई झांकी का संगीत संगत व पंगत को भी तांती साजों के माध्यम से निर्मल सिंह ने ही तैयार करवाया था। ना को बैरी नहीं बिगाना सगल संगि हम काउ बान आई के शब्द का गायन भी गणतंत्र दिवस पर राजपथ पर जा चलाया गया वह भी निर्मल सिंह की ओर से गाया गया था।
निर्मल सिंह 4 दिसंबर को यूके से भारत आए। इस के बाद वह 2 मार्च को रागी बलबीर सिंह के भोग में कीर्तन करने के लिए गए थे 19 मार्च को उन्होंने चंडीगढ की कोठी नंबर 27 ए में कीर्तन किया। उनकों खांसी , बुखर , थकावट व सांस लेने में मुश्किल की समस्या पैदा हो गई। 21 मार्च को वह गुरु नानक देव अस्पताल में चैकअप के लिए गए। वहां उनकी थोड़ी बहुत जांच करके बाद घर भेज दिया गया। उनकी समस्या ठीक न हुई तो वह श्री गुरु रामदास मेडिकल कालेज व अस्पताल में चैकअप करवाने के लिए गए। वहां उनकी हालत गंभीर लगी तो उनको गुरु नानक देव अस्तपाल में दोबारा भेजा गया। वहां उनके कोरोना वायरस की रिपोर्ट एक अप्रैल को पाजिटव आई। 2 अप्रेल को सुबह करीब सवा चार बने उनका देहांत हो गया।
— पंकज शर्मा
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